एआई द्वारा बनाया गया चित्र: मिस्सा में घोषित वचन
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आज के पाठ

The Presentation of the Lordपर्व

रविवार चक्र B · सप्ताह-दिवस चक्र I

पाठ Hindi Indian Revised Version (IRV-HI) से; आपके देश में पाठ-संग्रह का आधिकारिक अनुवाद भिन्न हो सकता है।

मिस्सा के पाठ

  1. पहला पाठ मलाकी 3:1-4

    1“देखो, मैं अपने दूत को भेजता हूँ, और वह मार्ग को मेरे आगे सुधारेगा, और प्रभु, जिसे तुम ढूँढ़ते हो, वह अचानक अपने मन्दिर में आ जाएगा; हाँ वाचा का वह दूत, जिसे तुम चाहते हो, सुनो, वह आता है, सेनाओं के यहोवा का यही वचन है।” (मत्ती 11:3,10, मर. 1:2, लूका 1:17,76, लूका 7:19,27, यूह. 3:28) 2परन्तु उसके आने के दिन को कौन सह सकेगा? और जब वह दिखाई दे, तब कौन खड़ा रह सकेगा? क्योंकि वह सुनार की आग और धोबी के साबुन के समान है। (प्रका. 6:17) 3वह रूपे का तानेवाला और शुद्ध करनेवाला बनेगा, और लेवियों को शुद्ध करेगा और उनको सोने रूपे के समान निर्मल करेगा, तब वे यहोवा की भेंट धार्मिकता से चढ़ाएँगे। (1 पत. 1:7) 4तब यहूदा और यरूशलेम की भेंट यहोवा को ऐसी भाएगी, जैसी पहले दिनों में और प्राचीनकाल में भाती थी।

    IRV-HI · Hindi Indian Revised Version (IRV) © 2017, 2018, 2019 Bridge Connectivity Solutions Pvt. Ltd. Licensed under CC BY-SA 4.0 (https://creativecommons.org/licenses/by-sa/4.0/). Source: eBible.org (https://ebible.org/find/details.php?id=hin2017). Changes: none to the wording; formatting only (verse-per-line import). No endorsement by the licensor is implied. संदर्भ में पढ़ें: मलाकी 3:1-4

  2. अनुवाक्य भजन स्तोत्र ग्रन्थ 24:7, 8, 9, 10

    7हे फाटकों, अपने सिर ऊँचे करो! हे सनातन के द्वारों, ऊँचे हो जाओ! क्योंकि प्रतापी राजा प्रवेश करेगा। 8वह प्रतापी राजा कौन है? यहोवा जो सामर्थी और पराक्रमी है, परमेश्वर जो युद्ध में पराक्रमी है! 9हे फाटकों, अपने सिर ऊँचे करो हे सनातन के द्वारों तुम भी खुल जाओ! क्योंकि प्रतापी राजा प्रवेश करेगा! 10वह प्रतापी राजा कौन है? सेनाओं का यहोवा, वही प्रतापी राजा है। (सेला)

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  3. दूसरा पाठ इब्रानियों 2:14-18

    14इसलिए जबकि बच्चे माँस और लहू के भागी हैं, तो वह आप भी उनके समान उनका सहभागी हो गया; ताकि मृत्यु के द्वारा उसे जिसे मृत्यु पर शक्ति मिली थी, अर्थात् शैतान को निकम्मा कर दे, (रोम. 8:3, कुलु. 2:15) 15और जितने मृत्यु के भय के मारे जीवन भर दासत्व में फँसे थे, उन्हें छुड़ा ले। 16क्योंकि वह तो स्वर्गदूतों को नहीं वरन् अब्राहम के वंश को सम्भालता है। (गला. 3:29, यशा. 41:8-10) 17इस कारण उसको चाहिए था, कि सब बातों में अपने भाइयों के समान बने; जिससे वह उन बातों में जो परमेश्वर से सम्बंध रखती हैं, एक दयालु और विश्वासयोग्य महायाजक बने ताकि लोगों के पापों के लिये प्रायश्चित करे। 18क्योंकि जब उसने परीक्षा की दशा में दुःख उठाया, तो वह उनकी भी सहायता कर सकता है, जिनकी परीक्षा होती है।

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  4. सुसमाचार से पहले जयघोष लूकस 2:32

  5. सुसमाचार लूकस 2:22-40

    22और जब मूसा की व्यवस्था के अनुसार मरियम के शुद्ध होने के दिन पूरे हुए तो यूसुफ और मरियम उसे यरूशलेम में ले गए, कि प्रभु के सामने लाएँ। (लैव्य. 12:6) 23जैसा कि प्रभु की व्यवस्था में लिखा है: “हर एक पहलौठा प्रभु के लिये पवित्र ठहरेगा।” (निर्ग. 13:2,12) 24और प्रभु की व्यवस्था के वचन के अनुसार, “पण्‍डुकों का एक जोड़ा, या कबूतर के दो बच्चे लाकर बलिदान करें।” (लैव्य. 12:8) 25उस समय यरूशलेम में शमौन नामक एक मनुष्य था, और वह मनुष्य धर्मी और भक्त था; और इस्राएल की शान्ति की प्रतीक्षा कर रहा था, और पवित्र आत्मा उस पर था। 26और पवित्र आत्मा के द्वारा प्रकट हुआ, कि जब तक तू प्रभु के मसीह को देख न लेगा, तब तक मृत्यु को न देखेगा। 27और वह आत्मा के सिखाने से मन्दिर में आया; और जब माता-पिता उस बालक यीशु को भीतर लाए, कि उसके लिये व्यवस्था की रीति के अनुसार करें, 28तो उसने उसे अपनी गोद में लिया और परमेश्वर का धन्यवाद करके कहा: 29“हे प्रभु, अब तू अपने दास को अपने वचन के अनुसार शान्ति से विदा कर दे; 30क्योंकि मेरी आँखों ने तेरे उद्धार को देख लिया है। 31जिसे तूने सब देशों के लोगों के सामने तैयार किया है। (यशा. 40:5) 32कि वह अन्यजातियों को सत्य प्रकट करने के लिए एक ज्योति होगा, और तेरे निज लोग इस्राएल की महिमा हो।” (यशा. 42:6, यशा. 49:6) 33और उसका पिता और उसकी माता इन बातों से जो उसके विषय में कही जाती थीं, आश्चर्य करते थे। 34तब शमौन ने उनको आशीष देकर, उसकी माता मरियम से कहा, “देख, वह तो इस्राएल में बहुतों के गिरने, और उठने के लिये, और एक ऐसा चिन्ह होने के लिये ठहराया गया है, जिसके विरोध में बातें की जाएँगी (यशा. 8:14-15) 35(वरन् तेरा प्राण भी तलवार से आर-पार छिद जाएगा) इससे बहुत हृदयों के विचार प्रगट होंगे।” 36और आशेर के गोत्र में से हन्नाह नामक फनूएल की बेटी एक भविष्यद्वक्तिन थी: वह बहुत बूढ़ी थी, और विवाह होने के बाद सात वर्ष अपने पति के साथ रह पाई थी। 37वह चौरासी वर्ष की विधवा थी: और मन्दिर को नहीं छोड़ती थी पर उपवास और प्रार्थना कर करके रात-दिन उपासना किया करती थी। 38और वह उस घड़ी वहाँ आकर परमेश्वर का धन्यवाद करने लगी, और उन सभी से, जो यरूशलेम के छुटकारे की प्रतीक्षा कर रहे थे, उसके विषय में बातें करने लगी। (यशा. 52:9) 39और जब वे प्रभु की व्यवस्था के अनुसार सब कुछ निपटा चुके तो गलील में अपने नगर नासरत को फिर चले गए। 40और बालक बढ़ता, और बलवन्त होता, और बुद्धि से परिपूर्ण होता गया; और परमेश्वर का अनुग्रह उस पर था।

    या: लूकस 2:22-32

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सामान्य रोमन पंचांग। राष्ट्रीय पंचांगों (जैसे प्रभु प्रकाश या स्वर्गारोहण रविवार को) में पाठ भिन्न हो सकते हैं।

संदर्भ: Ordo Lectionum Missae, द्वितीय आदर्श संस्करण (Libreria Editrice Vaticana, 1981)। भजन का अनुवाक्य नहीं दिखाया गया है।