AI-generated illustration: Moses holds two blank stone tablets on Mount Sinai under fire and cloud as the people wait below. Classical sacred-art style.
AI द्वारा निर्मित

व्यवस्थाविवरण

9
बाइबल पाठ

कृत्रिम आवाज़ (AI)

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“हे इस्राएल, सुन, आज तू यरदन पार इसलिए जानेवाला है, कि ऐसी जातियों को जो तुझ से बड़ी और सामर्थी हैं, और ऐसे बड़े नगरों को जिनकी शहरपनाह आकाश से बातें करती हैं, अपने अधिकार में ले ले। यह भी देखें: व्यवस्थाविवरण 11:31व्यवस्थाविवरण 1:28व्यवस्थाविवरण 4:38उनमें बड़े-बड़े और लम्बे-लम्बे लोग, अर्थात् अनाकवंशी रहते हैं, जिनका हाल तू जानता है, और उनके विषय में तूने यह सुना है, कि अनाकवंशियों के सामने कौन ठहर सकता है? यह भी देखें: गिनती 13:22व्यवस्थाविवरण 7:24दानिय्येल 8:4इसलिए आज तू यह जान ले, कि जो तेरे आगे भस्म करनेवाली आग के समान पार जानेवाला है वह तेरा परमेश्वर यहोवा है; और वह उनका सत्यानाश करेगा, और वह उनको तेरे सामने दबा देगा; और तू यहोवा के वचन के अनुसार उनको उस देश से निकालकर शीघ्र ही नष्ट कर डालेगा। (इब्रा. 12:29) यह भी देखें: व्यवस्थाविवरण 4:24रोमियों 8:31इब्रानियों 12:29“जब तेरा परमेश्वर यहोवा उन्हें तेरे सामने से निकाल देगा तब यह न सोचना, कि यहोवा तेरे धार्मिकता के कारण तुझे इस देश का अधिकारी होने को ले आया है, किन्तु उन जातियों की दुष्टता ही के कारण यहोवा उनको तेरे सामने से निकालता है। (रोम. 10:6) यह भी देखें: व्यवस्थाविवरण 8:17व्यवस्थाविवरण 18:9-14व्यवस्थाविवरण 9:5तू जो उनके देश का अधिकारी होने के लिये जा रहा है, इसका कारण तेरा धार्मिकता या मन की सिधाई नहीं है; तेरा परमेश्वर यहोवा जो उन जातियों को तेरे सामने से निकालता है, उसका कारण उनकी दुष्टता है, और यह भी कि जो वचन उसने अब्राहम, इसहाक, और याकूब, अर्थात् तेरे पूर्वजों को शपथ खाकर दिया था, उसको वह पूरा करना चाहता है। यह भी देखें: तीतुस 3:5उत्पत्ति 17:8उत्पत्ति 26:4“इसलिए यह जान ले कि तेरा परमेश्वर यहोवा, जो तुझे वह अच्छा देश देता है कि तू उसका अधिकारी हो, उसे वह तेरे धार्मिकता के कारण नहीं दे रहा है; क्योंकि तू तो एक हठीली जाति है। यह भी देखें: व्यवस्थाविवरण 10:16व्यवस्थाविवरण 9:13व्यवस्थाविवरण 31:27इस बात का स्मरण रख और कभी भी न भूलना, कि जंगल में तूने किस-किस रीति से अपने परमेश्वर यहोवा को क्रोधित किया; और जिस दिन से तू मिस्र देश से निकला है जब तक तुम इस स्थान पर न पहुँचे तब तक तुम यहोवा से बलवा ही बलवा करते आए हो। यह भी देखें: गिनती 21:5निर्गमन 14:11निर्गमन 16:2फिर होरेब के पास भी तुम ने यहोवा को क्रोधित किया, और वह क्रोधित होकर तुम्हें नष्ट करना चाहता था। यह भी देखें: स्तोत्र ग्रन्थ 106:19-22निर्गमन 32:7-10निर्गमन 32:16जब मैं उस वाचा के पत्थर की पटियाओं को जो यहोवा ने तुम से बाँधी थी लेने के लिये पर्वत के ऊपर चढ़ गया, तब चालीस दिन और चालीस रात पर्वत ही के ऊपर रहा; और मैंने न तो रोटी खाई न पानी पिया। यह भी देखें: निर्गमन 34:28निर्गमन 24:18निर्गमन 24:15और यहोवा ने मुझे अपने ही हाथ की लिखी हुई पत्थर की दोनों पटियाओं को सौंप दिया, और वे ही वचन जिन्हें यहोवा ने पर्वत के ऊपर आग के मध्य में से सभा के दिन तुम से कहे थे वे सब उन पर लिखे हुए थे। (प्रेरि. 7:38, 2 कुरि. 3:3) यह भी देखें: निर्गमन 31:18व्यवस्थाविवरण 18:16इब्रानियों 8:10और चालीस दिन और चालीस रात के बीत जाने पर यहोवा ने पत्थर की वे दो वाचा की पटियाएँ मुझे दे दीं। यह भी देखें: व्यवस्थाविवरण 9:9इब्रानियों 8:6-10गिनती 10:33और यहोवा ने मुझसे कहा, ‘उठ, यहाँ से झटपट नीचे जा; क्योंकि तेरी प्रजा के लोग जिनको तू मिस्र से निकालकर ले आया है वे बिगड़ गए हैं; जिस मार्ग पर चलने की आज्ञा मैंने उन्हें दी थी उसको उन्होंने झटपट छोड़ दिया है; अर्थात् उन्होंने तुरन्त अपने लिये एक मूर्ति ढालकर बना ली है।’ यह भी देखें: निर्गमन 32:7-8न्यायियों 2:17व्यवस्थाविवरण 31:29“फिर यहोवा ने मुझसे यह भी कहा, ‘मैंने उन लोगों को देख लिया, वे हठीली जाति के लोग हैं; यह भी देखें: व्यवस्थाविवरण 9:6व्यवस्थाविवरण 10:162 राजाओं 17:14इसलिए अब मुझे तू मत रोक, ताकि मैं उन्हें नष्ट कर डालूँ, और धरती के ऊपर से उनका नाम या चिन्ह तक मिटा डालूँ, और मैं उनसे बढ़कर एक बड़ी और सामर्थी जाति तुझी से उत्पन्न करूँगा। यह भी देखें: व्यवस्थाविवरण 29:20निर्गमन 32:10-13स्तोत्र ग्रन्थ 9:5तब मैं उलटे पैर पर्वत से नीचे उतर चला, और पर्वत अग्नि से दहक रहा था और मेरे दोनों हाथों में वाचा की दोनों पटियाएँ थीं। यह भी देखें: निर्गमन 19:18व्यवस्थाविवरण 5:23व्यवस्थाविवरण 4:11और मैंने देखा कि तुम ने अपने परमेश्वर यहोवा के विरुद्ध महापाप किया; और अपने लिये एक बछड़ा ढालकर बना लिया है, और तुरन्त उस मार्ग से जिस पर चलने की आज्ञा यहोवा ने तुम को दी थी उसको तुम ने तज दिया। यह भी देखें: निर्गमन 32:19प्रेरित-चरित 7:40-41तब मैंने उन दोनों पटियाओं को अपने दोनों हाथों से लेकर फेंक दिया, और तुम्हारी आँखों के सामने उनको तोड़ डाला। तब तुम्हारे उस महापाप के कारण जिसे करके तुम ने यहोवा की दृष्टि में बुराई की, और उसे रिस दिलाई थी, मैं यहोवा के सामने मुँह के बल गिर पड़ा, और पहले के समान, अर्थात् चालीस दिन और चालीस रात तक, न तो रोटी खाई और न पानी पिया। यह भी देखें: निर्गमन 34:28व्यवस्थाविवरण 9:9स्तोत्र ग्रन्थ 106:23मैं तो यहोवा के उस कोप और जलजलाहट से डर रहा था, क्योंकि वह तुम से अप्रसन्न होकर तुम्हारा सत्यानाश करने को था। परन्तु यहोवा ने उस बार भी मेरी सुन ली। (इब्रा. 12:21) यह भी देखें: याकूब 5:16-17निर्गमन 32:14व्यवस्थाविवरण 10:10और यहोवा हारून से इतना कोपित हुआ कि उसका भी सत्यानाश करना चाहा; परन्तु उसी समय मैंने हारून के लिये भी प्रार्थना की। यह भी देखें: निर्गमन 32:21इब्रानियों 7:26-28निर्गमन 32:35और मैंने वह बछड़ा जिसे बनाकर तुम पापी हो गए थे लेकर, आग में डालकर फूँक दिया; और फिर उसे पीस-पीसकर ऐसा चूर चूरकर डाला कि वह धूल के समान जीर्ण हो गया; और उसकी उस राख को उस नदी में फेंक दिया जो पर्वत से निकलकर नीचे बहती थी। यह भी देखें: निर्गमन 32:20यशायाह 31:7यशायाह 2:18-21“फिर तबेरा, और मस्सा, और किब्रोतहत्तावा में भी तुम ने यहोवा को रिस दिलाई थी। यह भी देखें: गिनती 11:34निर्गमन 17:7गिनती 11:1-5फिर जब यहोवा ने तुम को कादेशबर्ने से यह कहकर भेजा, ‘जाकर उस देश के जिसे मैंने तुम्हें दिया है अधिकारी हो जाओ,’ तब भी तुम ने अपने परमेश्वर यहोवा की आज्ञा के विरुद्ध बलवा किया, और न तो उसका विश्वास किया, और न उसकी बात ही मानी। यह भी देखें: स्तोत्र ग्रन्थ 106:24-25इब्रानियों 4:2स्तोत्र ग्रन्थ 78:22जिस दिन से मैं तुम्हें जानता हूँ उस दिन से तुम यहोवा से बलवा ही करते आए हो। यह भी देखें: व्यवस्थाविवरण 31:27प्रेरित-चरित 7:51व्यवस्थाविवरण 9:6-7“मैं यहोवा के सामने चालीस दिन और चालीस रात मुँह के बल पड़ा रहा, क्योंकि यहोवा ने कह दिया था, कि वह तुम्हारा सत्यानाश करेगा। यह भी देखें: व्यवस्थाविवरण 9:18व्यवस्थाविवरण 9:16और मैंने यहोवा से यह प्रार्थना की, ‘हे प्रभु यहोवा, अपना प्रजारूपी निज भाग, जिनको तूने अपने महान प्रताप से छुड़ा लिया है, और जिनको तूने अपने बलवन्त हाथ से मिस्र से निकाल लिया है, उन्हें नष्ट न कर। यह भी देखें: तीतुस 2:14निर्गमन 32:11-13यिर्मयाह 14:21अपने दास अब्राहम, इसहाक, और याकूब को स्मरण कर; और इन लोगों की हठ, और दुष्टता, और पाप पर दृष्टि न कर, यह भी देखें: यिर्मयाह 14:21मीका 7:18-19निर्गमन 32:13जिससे ऐसा न हो कि जिस देश से तू हमको निकालकर ले आया है, वहाँ के लोग कहने लगें, कि यहोवा उन्हें उस देश में जिसके देने का वचन उनको दिया था नहीं पहुँचा सका, और उनसे बैर भी रखता था, इसी कारण उसने उन्हें जंगल में लाकर मार डाला है।’ यह भी देखें: गिनती 14:16निर्गमन 32:12ये लोग तेरी प्रजा और निज भाग हैं, जिनको तूने अपने बड़े सामर्थ्य और बलवन्त भुजा के द्वारा निकाल ले आया है।” यह भी देखें: नहेम्याह 1:101 राजाओं 8:51व्यवस्थाविवरण 9:26

यह भी देखें: क्रॉस-संदर्भ OpenBible.info (CC BY) से, आंशिक रूप से Treasury of Scripture Knowledge (सार्वजनिक डोमेन) पर आधारित।

टिप्पणियाँ · हेडॉक (1859, सार्वजनिक डोमेन)13 टिप्पणियाँ

टिप्पणियाँ अंग्रेज़ी में फ़ा. जॉर्ज लियो हेडॉक की 19वीं सदी की काथलिक टीका, जैसी प्रकाशित हुई।

ये टिप्पणियाँ अपने समय के विवादों को बनाए रखती हैं: कुछ यहूदी लोगों या अन्य ख्रीस्तीयों के बारे में कठोरता से बोलती हैं। आज कलीसिया कुछ और सिखाती है: ख्रीस्त की मृत्यु के लिए यहूदी लोगों को दोषी नहीं ठहराया जा सकता (नोस्त्रा एताते 4; धर्मशिक्षा 597–598), और अन्य समुदायों के ख्रीस्तीय प्रभु में हमारे भाई-बहन हैं (उनितातिस रेदिन्तेग्रात्सियो 3)। ख्रीस्तीय एकता

व्यवस्थाविवरण 9:1

Ver. 1. This day, very soon, (M.) within the space of a month. C. --- Sky: an hyperbole to denote their surprising height. W.

↑ 1

व्यवस्थाविवरण 9:2

Ver. 2. Stand. Heb. "who can stand before the sons of Enak?" as if this were a sort of proverb.

C. --- The spies had formerly terrified the people with the report of the high walls and gigantic inhabitants of Chanaan. Num. xiii. 18.

↑ 2

व्यवस्थाविवरण 9:3

Ver. 3. Fire. See C. iv. 24. The conducting angel would fight for the Hebrews. H.

↑ 3

व्यवस्थाविवरण 9:7

Ver. 7. Strove. Heb. "irritated." C. --- Sept. "continually disbelieved the Lord."

Moses hence takes occasion to lay before the people their frequent and most heinous offences, on account of which they might justly have feared being destroyed, as much as the infamous nations whom they were about to supplant. They might thus be convinced that they had been chosen gratuitously. H.

--- For God hates nothing more than ingratitude and presumption. C.

↑ 7

व्यवस्थाविवरण 9:8

Ver. 8. Would, if He had not been appeased by earnest supplication, as v. 20.

↑ 8

व्यवस्थाविवरण 9:12

यह 19वीं सदी की टिप्पणी विवादात्मक भाषा का उपयोग करती है; इसे इस पैनल के शीर्ष पर दी गई टिप्पणी के प्रकाश में पढ़ें।

Ver. 12. Have quickly. Heb. "have become corrupt; they have quickly abandoned the way which I commanded them." H. --- Sept. "the people hath sinned...they have quickly transgressed," &c.

C. --- Idol. Protestants have "image." The Hebrews had called the similitude of a calf their god.

Ex. xxxii. H.

↑ 12

व्यवस्थाविवरण 9:16

Ver. 16. Sinned, by idolatry, which comprises every sort of sin. Hence the Scripture only specifies that Jeroboam caused Israel to sin, when it means to assert that he engaged the people in the worship of idols. C.

↑ 16

व्यवस्थाविवरण 9:18

Ver. 18. Sins. Many believe that Moses spent the whole time in obtaining pardon. Hiscuni agrees herein with the other Rabbins, only he thinks Moses was all the time in the tabernacle.

Other 40 days, or a third rigid fast, were requisite to obtain the second tables of the law, as the text seems to insinuate, (v. 25. C. x. 10,) unless Moses repeat what he has here asserted, as many able chronologers suppose. Torneil, Usher, &c. C. T. --- The former opinion is maintained, however, by Salien, &c.

Ex. xxxiv. H.

↑ 18

व्यवस्थाविवरण 9:21

Ver. 21. Sin. The Scripture designates by this name not only the evil action, but also the propensity to it, the object, matter, occasion, punishment , or victim of sin. --- The calf. He broke the idol in pieces, and then ground it small. Ex. xxxii.

20. C.

↑ 21

व्यवस्थाविवरण 9:22

Ver. 22. Burning, &c. The places called in Heb. "Tabera, Masa, and Kibroth Hattaavah." H. ---

At the first, the murmurers were burnt; (Num. xi. 1) at the second or at Raphidim, (C.) the people demanded water, and were supplied from Horeb; (Ex.

xvii. 2. 7. M.) though some confound this with the former place. It seems rather to refer to the temptation, or murmur of the people, on account of quails. Num.

xi. 34. Ps. lxxvii. 18. C.

↑ 22

व्यवस्थाविवरण 9:23

Ver. 23. Slighted. Heb. "rebelled against," &c. as v. 24. Sept. "you were incredulous to." See Num. xiii. 3.

↑ 23

व्यवस्थाविवरण 9:24

Ver. 24. To know you. When Moses slew the Egyptian, and would have pacified two of his contending brethren, they refused to receive his mediation; so also, when he returned from Madian, to rescue them from slavery, they presently began to murmur against him, and continued to do so frequently for 40 years.

H. --- Sept. refers this to God, "from the day that he was known to you," and received you for his peculiar people. Ex. xi. 25.

↑ 24

व्यवस्थाविवरण 9:25

Ver. 25. Nights. See v. 18. C. --- After specifying various seditions of the people, Moses returns to what he had been saying respecting the tables of the law, and shews with what difficulty he obtained pardon for the people, and the second tables. H. --- Some people believe that Moses was thrice 40 days in the mountain. He mentions the prayer which he addressed to God before his first descent. Ex. xxxii. 11. M.

↑ 25

लाइसेंस: Notes by Fr. George Leo Haydock (1774–1849), from the Douay-Rheims Bible with Haydock's commentary (first ed. Thomas Haydock, Manchester/Dublin, 1811–1814; New York: Edward Dunigan & Brother, 1859); New Testament notes compiled with Fr. Benedict Rayment. Public domain. Digital text: "The Haydock Bible", Internet Archive (archive.org/details/TheHaydockBible), uploaded 2011 under the Public Domain Mark. · आभार और लाइसेंस

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