
यिर्मयाह · IRV-HI
यिर्मयाह
3
बाइबल पाठकृत्रिम आवाज़ (AI)
“वे कहते हैं, ‘यदि कोई अपनी पत्नी को त्याग दे, और वह उसके पास से जाकर दूसरे पुरुष की हो जाए, तो वह पहला क्या उसके पास फिर जाएगा?’ क्या वह देश अति अशुद्ध न हो जाएगा? यहोवा की यह वाणी है कि तूने बहुत से प्रेमियों के साथ व्यभिचार किया है, क्या तू अब मेरी ओर फिरेगी? यह भी देखें: व्यवस्थाविवरण 24:1-4यहेजकेल 16:26होशे 14:1-4मुँण्ड़े टीलों की ओर आँखें उठाकर देख! ऐसा कौन सा स्थान है जहाँ तूने कुकर्म न किया हो? मार्गों में तू ऐसी बैठी जैसे एक अरबी जंगल में। तूने देश को अपने व्यभिचार और दुष्टता से अशुद्ध कर दिया है। यह भी देखें: यहेजकेल 16:24-25यहेजकेल 8:4-6यिर्मयाह 2:20इसी कारण वर्षा रोक दी गई और पिछली बरसात नहीं होती; तो भी तेरा माथा वेश्या के समान है, तू लज्जित होना ही नहीं चाहती। यह भी देखें: लैव्यव्यवस्था 26:19यिर्मयाह 5:24यशायाह 5:6क्या तू अब मुझे पुकारकर कहेगी, ‘हे मेरे पिता, तू ही मेरी जवानी का साथी है? यह भी देखें: यिर्मयाह 2:2यिर्मयाह 3:19यिर्मयाह 31:9क्या वह सदा क्रोधित रहेगा? क्या वह उसको सदा बनाए रहेगा?’ तूने ऐसा कहा तो है, परन्तु तूने बुरे काम प्रबलता के साथ किए हैं।” यह भी देखें: मीका 7:3यशायाह 57:16यिर्मयाह 3:12फिर योशिय्याह राजा के दिनों में यहोवा ने मुझसे यह भी कहा, “क्या तूने देखा कि भटकनेवाली इस्राएल ने क्या किया है? उसने सब ऊँचे पहाड़ों पर और सब हरे पेड़ों के तले जा जाकर व्यभिचार किया है। यह भी देखें: यिर्मयाह 3:8यिर्मयाह 17:2यहेजकेल 20:28तब मैंने सोचा, जब ये सब काम वह कर चुके तब मेरी ओर फिरेगी; परन्तु वह न फिरी, और उसकी विश्वासघाती बहन यहूदा ने यह देखा। यह भी देखें: यहेजकेल 16:46होशे 6:1-4होशे 14:1फिर मैंने देखा, जब मैंने भटकनेवाली इस्राएल को उसके व्यभिचार करने के कारण त्याग कर उसे त्यागपत्र दे दिया; तो भी उसकी विश्वासघाती बहन यहूदा न डरी, वरन् जाकर वह भी व्यभिचारिणी बन गई। यह भी देखें: व्यवस्थाविवरण 24:1यशायाह 50:1होशे 4:15-17उसके निर्लज्ज-व्यभिचारिणी होने के कारण देश भी अशुद्ध हो गया, उसने पत्थर और काठ के साथ भी व्यभिचार किया। यह भी देखें: यिर्मयाह 2:27यशायाह 57:6यिर्मयाह 3:2इतने पर भी उसकी विश्वासघाती बहन यहूदा पूर्ण मन से मेरी ओर नहीं फिरी, परन्तु कपट से, यहोवा की यही वाणी है।” यह भी देखें: होशे 7:14यिर्मयाह 12:2स्तोत्र ग्रन्थ 78:36-37यहोवा ने मुझसे कहा, “भटकनेवाली इस्राएल, विश्वासघातिन यहूदा से कम दोषी निकली है। यह भी देखें: यहेजकेल 23:11यहेजकेल 16:51-52होशे 11:7तू जाकर उत्तर दिशा में ये बातें प्रचार कर, ‘यहोवा की यह वाणी है, हे भटकनेवाली इस्राएल लौट आ, मैं तुझ पर क्रोध की दृष्टि न करूँगा; क्योंकि यहोवा की यह वाणी है, मैं करुणामय हूँ; मैं सर्वदा क्रोध न रखे रहूँगा। यह भी देखें: यहेजकेल 33:11स्तोत्र ग्रन्थ 86:15व्यवस्थाविवरण 4:29-31केवल अपना यह अधर्म मान ले कि तू अपने परमेश्वर यहोवा से फिर गई और सब हरे पेड़ों के तले इधर-उधर दूसरों के पास गई, और मेरी बातों को नहीं माना, यहोवा की यह वाणी है। यह भी देखें: व्यवस्थाविवरण 12:2यिर्मयाह 3:25यिर्मयाह 2:25“हे भटकनेवाले बच्चों, लौट आओ, क्योंकि मैं तुम्हारा स्वामी हूँ; यहोवा की यह वाणी है। तुम्हारे प्रत्येक नगर से एक, और प्रत्येक कुल से दो को लेकर मैं सिय्योन में पहुँचा दूँगा। यह भी देखें: होशे 2:19-20यिर्मयाह 2:19यिर्मयाह 31:32“मैं तुम्हें अपने मन के अनुकूल चरवाहे दूँगा, जो ज्ञान और बुद्धि से तुम्हें चराएँगे। यह भी देखें: यिर्मयाह 23:4प्रेरित-चरित 20:28इफिसियों 4:11-12उन दिनों में जब तुम इस देश में बढ़ो, और फूलो-फलो, तब लोग फिर ऐसा न कहेंगे, यहोवा की वाचा का सन्दूक; यहोवा की यह भी वाणी है। उसका विचार भी उनके मन में न आएगा, न लोग उसके न रहने से चिन्ता करेंगे; और न उसकी मरम्मत होगी। यह भी देखें: आमोस 9:14-15यशायाह 65:17यहेजकेल 37:26उस समय यरूशलेम यहोवा का सिंहासन कहलाएगा, और सब जातियाँ उसी यरूशलेम में मेरे नाम के निमित्त इकट्ठी हुआ करेंगी, और, वे फिर अपने बुरे मन के हठ पर न चलेंगी। यह भी देखें: यहेजकेल 43:7यिर्मयाह 17:12मीका 4:1-5उन दिनों में यहूदा का घराना इस्राएल के घराने के साथ चलेगा और वे दोनों मिलकर उत्तर के देश से इस देश में आएँगे जिसे मैंने उनके पूर्वजों को निज भाग करके दिया था। यह भी देखें: यिर्मयाह 31:8यिर्मयाह 23:8आमोस 9:15“मैंने सोचा था, मैं कैसे तुझे लड़कों में गिनकर वह मनभावना देश दूँ जो सब जातियों के देशों का शिरोमणि है। मैंने सोचा कि तू मुझे पिता कहेगी, और मुझसे फिर न भटकेगी। (1 पत. 1:3-7) यह भी देखें: रोमियों 8:15-17यिर्मयाह 3:4यिर्मयाह 31:9इसमें तो सन्देह नहीं कि जैसे विश्वासघाती स्त्री अपने प्रिय से मन फेर लेती है, वैसे ही हे इस्राएल के घराने, तू मुझसे फिर गया है, यहोवा की यही वाणी है।” यह भी देखें: यशायाह 48:8यिर्मयाह 5:11यहेजकेल 16:15-52मुँण्ड़े टीलों पर से इस्राएलियों के रोने और गिड़गिड़ाने का शब्द सुनाई दे रहा है, क्योंकि वे टेढ़ी चाल चलते रहे हैं और अपने परमेश्वर यहोवा को भूल गए हैं। यह भी देखें: यिर्मयाह 3:2यिर्मयाह 31:9यिर्मयाह 2:32“हे भटकनेवाले बच्चों, लौट आओ, मैं तुम्हारा भटकना सुधार दूँगा। देख, हम तेरे पास आए हैं; क्योंकि तू ही हमारा परमेश्वर यहोवा है। यह भी देखें: होशे 14:1होशे 14:4जकर्याह 13:9निश्चय पहाड़ों और पहाड़ियों पर का कोलाहल व्यर्थ ही है। इस्राएल का उद्धार निश्चय हमारे परमेश्वर यहोवा ही के द्वारा है। यह भी देखें: स्तोत्र ग्रन्थ 121:1-2स्तोत्र ग्रन्थ 3:8यशायाह 12:2परन्तु हमारी जवानी ही से उस बदनामी की वस्तु ने हमारे पुरखाओं की कमाई अर्थात् उनकी भेड़-बकरी और गाय-बैल और उनके बेटे-बेटियों को निगल लिया है। यह भी देखें: होशे 9:10यहेजकेल 16:63यहेजकेल 16:61हम लज्जित होकर लेट जाएँ, और हमारा संकोच हमारी ओढ़नी बन जाए; क्योंकि हमारे पुरखा और हम भी युवा अवस्था से लेकर आज के दिन तक अपने परमेश्वर यहोवा के विरुद्ध पाप करते आए हैं; और हमने अपने परमेश्वर यहोवा की बातों को नहीं माना है।” यह भी देखें: यिर्मयाह 22:21विलापगीत 5:16नीतिवचन 5:13
यह भी देखें: क्रॉस-संदर्भ OpenBible.info (CC BY) से, आंशिक रूप से Treasury of Scripture Knowledge (सार्वजनिक डोमेन) पर आधारित।
मनन
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टिप्पणियाँ · हेडॉक (1859, सार्वजनिक डोमेन)20 टिप्पणियाँ
टिप्पणियाँ अंग्रेज़ी में फ़ा. जॉर्ज लियो हेडॉक की 19वीं सदी की काथलिक टीका, जैसी प्रकाशित हुई।
ये टिप्पणियाँ अपने समय के विवादों को बनाए रखती हैं: कुछ यहूदी लोगों या अन्य ख्रीस्तीयों के बारे में कठोरता से बोलती हैं। आज कलीसिया कुछ और सिखाती है: ख्रीस्त की मृत्यु के लिए यहूदी लोगों को दोषी नहीं ठहराया जा सकता (नोस्त्रा एताते 4; धर्मशिक्षा 597–598), और अन्य समुदायों के ख्रीस्तीय प्रभु में हमारे भाई-बहन हैं (उनितातिस रेदिन्तेग्रात्सियो 3)। ख्रीस्तीय एकता
यिर्मयाह 3:1
Ver. 1. It. Heb. "a saying." Sept. "If," &c. Deut. xxiv. 1. H. --- Woman. Heb.
"land." ---
Lovers. Sept. "shepherds," C. seeking aid from idols and foreigners.
↑ 1यिर्मयाह 3:2
Ver. 2. High. Lit. "straight forward." H. --- On the hills, idolatry and immorality prevailed. ---
Ways, where harlots used to sit. Gen. xxxviii. 14. Prov. vii. 9. and xxxiii. 27. ---
Robber; "Arab,"
(Chal. &c.) or "crow." (Sept.) C. --- No sin is so great as to be irremissible to the true penitent.
W.
↑ 2यिर्मयाह 3:3
Ver. 3. Rain; about November. Deut. xi. 14. This drought happened under Josias, (C. v. 24.) and was different from that specified, C. viii. 13. and xiv. 1.
↑ 3यिर्मयाह 3:4
Ver. 4. Guide. Husband. Prov. ii. 16. and Joel i. 8.
↑ 4यिर्मयाह 3:5
Ver. 5. Wilt. Heb. "will he," &c. The faithless people will not use this language, but do all the evil possible.
↑ 5यिर्मयाह 3:6
Ver. 6. Days, before the 18th year. God now pronounces sentence (C.) on all. H.
--- Rebellious, a faithless wife. The kingdom of Israel gave way to idolatry first.
But the people were less favoured than Juda, which had many prophets and good kings, the temple, &c. Moreover, the misfortunes of Israel did not open the eyes of their brethren. C. --- Both the ten tribes, and the two tribes (W.) which adhered to the line of David, prevaricated. H.
↑ 6यिर्मयाह 3:10
Ver. 10. Falsehood. Their reform was only apparent, under Joas, &c. C.
↑ 10यिर्मयाह 3:11
Ver. 11. Soul, and appeared comparatively innocent. v. 6. Ezec. xvi. 51. S. Jer.
--- Yet neither of them was excusable. W.
↑ 11यिर्मयाह 3:12
Ver. 12. North. Samaria, or rather Assyria, where the people were captives. ---
Face, in anger.
↑ 12यिर्मयाह 3:13
Ver. 13. Ways, dividing thy love, and adoring idols with me.
↑ 13यिर्मयाह 3:14
Ver. 14. Kindred. Only few Israelites returned under Cyrus. The rest came by degrees, though it was more fully accomplished by the conversion of the Gentiles.
↑ 14यिर्मयाह 3:15
Ver. 15. Pastors. Zorobabel, &c. but more particularly Christ and his apostles.
↑ 15यिर्मयाह 3:16
Ver. 16. Ark. It was no longer at Jerusalem. The law and its figures cease.
↑ 16यिर्मयाह 3:17
Ver. 17. All. Many might embrace the Jewish religion. But the predictions of the prophets on this head, were not verified, till the gospel was preached. C. ---
Then many embraced the faith: several captives also returned to God. W.
↑ 17यिर्मयाह 3:18
Ver. 18. North. Sept. add, "and from all places" where the Jews were in captivity. H. --- Many thus returned to their own country. v. 14. C. --- Israel had been led into captivity sooner, but all were released at once. Theodor. W.
↑ 18यिर्मयाह 3:19
Ver. 19. Gentiles, which they all covet, or to which they are invited in the Church. C. --- Me. On these conditions thou shalt be restored. H.
↑ 19यिर्मयाह 3:21
Ver. 21. God. Hence proceed these miseries and lamentations.
↑ 21यिर्मयाह 3:23
Ver. 23. Liars, unfruitful; and the idols have left us empty. C. --- They were placed on the hills.
Houbigant.
↑ 23यिर्मयाह 3:24
Ver. 24. Confusion. Thus Baal was styled Boseth, contemptuously. Jer. xi. 13.
↑ 24यिर्मयाह 3:25
Ver. 25. Shame. We are justly punished with exile, (C.) and death. M.
↑ 25लाइसेंस: Notes by Fr. George Leo Haydock (1774–1849), from the Douay-Rheims Bible with Haydock's commentary (first ed. Thomas Haydock, Manchester/Dublin, 1811–1814; New York: Edward Dunigan & Brother, 1859); New Testament notes compiled with Fr. Benedict Rayment. Public domain. Digital text: "The Haydock Bible", Internet Archive (archive.org/details/TheHaydockBible), uploaded 2011 under the Public Domain Mark. · आभार और लाइसेंस