AI-generated illustration: a rocky stream flowing among wildflowers in a valley at sunset.
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यशायाह

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बाइबल पाठ

कृत्रिम आवाज़ (AI)

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अब मैं अपने प्रिय के लिये और उसकी दाख की बारी के विषय में गीत गाऊँगा: एक अति उपजाऊ टीले पर मेरे प्रिय की एक दाख की बारी थी। यह भी देखें: मारकुस 12:1लूकस 20:9योहन 15:1उसने उसकी मिट्टी खोदी और उसके पत्थर बीनकर उसमें उत्तम जाति की एक दाखलता लगाई; उसके बीच में उसने एक गुम्मट बनाया, और दाखरस के लिये एक कुण्ड भी खोदा; तब उसने दाख की आशा की, परन्तु उसमें निकम्मी दाखें ही लगीं। यह भी देखें: यिर्मयाह 2:21व्यवस्थाविवरण 32:32-33यशायाह 1:2-4अब हे यरूशलेम के निवासियों और हे यहूदा के मनुष्यों, मेरे और मेरी दाख की बारी के बीच न्याय करो। यह भी देखें: लूकस 20:15-16मत्ती 21:40-41रोमियों 2:5मेरी दाख की बारी के लिये और क्या करना रह गया जो मैंने उसके लिये न किया हो? फिर क्या कारण है कि जब मैंने दाख की आशा की तब उसमें निकम्मी दाखें लगीं? यह भी देखें: मत्ती 23:37मीका 6:3-4प्रेरित-चरित 7:51-60अब मैं तुम को बताता हूँ कि अपनी दाख की बारी से क्या करूँगा। मैं उसके काँटेवाले बाड़े को उखाड़ दूँगा कि वह चट की जाए, और उसकी दीवार को ढा दूँगा कि वह रौंदी जाए। यह भी देखें: यशायाह 28:18लूकस 21:24विलापगीत 1:15मैं उसे उजाड़ दूँगा; वह न तो फिर छाँटी और न खोदी जाएगी और उसमें भाँति-भाँति के कटीले पेड़ उगेंगे; मैं मेघों को भी आज्ञा दूँगा कि उस पर जल न बरसाएँ। यह भी देखें: यशायाह 7:23-25यिर्मयाह 25:11यशायाह 24:1-3क्योंकि सेनाओं के यहोवा की दाख की बारी इस्राएल का घराना, और उसका प्रिय पौधा यहूदा के लोग है; और उसने उनमें न्याय की आशा की परन्तु अन्याय देख पड़ा; उसने धार्मिकता की आशा की, परन्तु उसे चिल्लाहट ही सुन पड़ी! (भज. 80:8, मत्ती 3:8-10) यह भी देखें: स्तोत्र ग्रन्थ 80:8-11मत्ती 3:8-10याकूब 5:4हाय उन पर जो घर से घर, और खेत से खेत यहाँ तक मिलाते जाते हैं कि कुछ स्थान नहीं बचता, कि तुम देश के बीच अकेले रह जाओ। यह भी देखें: मीका 2:2हबक्कूक 2:9-12यिर्मयाह 22:13-17सेनाओं के यहोवा ने मेरे सुनते कहा है: “निश्चय बहुत से घर सुनसान हो जाएँगे, और बड़े-बड़े और सुन्दर घर निर्जन हो जाएँगे। (आमो. 6:11, मत्ती 26:38) यह भी देखें: मत्ती 23:38आमोस 5:11आमोस 3:7क्योंकि दस बीघे की दाख की बारी से एक ही बत दाखमधु मिलेगा, और होमेर भर के बीच से एक ही एपा अन्न उत्पन्न होगा।” यह भी देखें: लैव्यव्यवस्था 26:26हाग्गै 2:16हाग्गै 1:6हाय उन पर जो बड़े तड़के उठकर मदिरा पीने लगते हैं और बड़ी रात तक दाखमधु पीते रहते हैं जब तक उनको गर्मी न चढ़ जाए! यह भी देखें: नीतिवचन 23:29-30नीतिवचन 20:1रोमियों 13:13उनके भोजों में वीणा, सारंगी, डफ, बाँसुरी और दाखमधु, ये सब पाये जाते हैं; परन्तु वे यहोवा के कार्य की ओर दृष्टि नहीं करते, और उसके हाथों के काम को नहीं देखते। यह भी देखें: स्तोत्र ग्रन्थ 28:5अय्यूब 34:27अय्यूब 21:11-14इसलिए अज्ञानता के कारण मेरी प्रजा बँधुवाई में जाती है, उसके प्रतिष्ठित पुरुष भूखे मरते और साधारण लोग प्यास से व्याकुल होते हैं। यह भी देखें: होशे 4:6यशायाह 1:3यशायाह 1:7इसलिए अधोलोक ने अत्यन्त लालसा करके अपना मुँह हद से ज्यादा पसारा है, और उनका वैभव और भीड़-भाड़ और आनन्द करनेवाले सब के सब उसके मुँह में जा पड़ते हैं। यह भी देखें: नीतिवचन 30:16हबक्कूक 2:5लूकस 21:34साधारण मनुष्य दबाए जाते और बड़े मनुष्य नीचे किए जाते हैं, और अभिमानियों की आँखें नीची की जाती हैं। यह भी देखें: यशायाह 2:11यशायाह 2:9यिर्मयाह 5:4-5परन्तु सेनाओं का यहोवा न्याय करने के कारण महान ठहरता, और पवित्र परमेश्वर धर्मी होने के कारण पवित्र ठहरता है! यह भी देखें: स्तोत्र ग्रन्थ 46:101 इतिहास 29:11यशायाह 12:4तब भेड़ों के बच्चे मानो अपने खेत में चरेंगे, परन्तु हष्टपुष्टों के उजड़े स्थान परदेशियों को चराई के लिये मिलेंगे। यह भी देखें: सपन्याह 2:6यशायाह 7:25सपन्याह 2:14हाय उन पर जो अधर्म को अनर्थ की रस्सियों से और पाप को मानो गाड़ी के रस्से से खींच ले आते हैं, यह भी देखें: यिर्मयाह 23:14यहेजकेल 13:22यिर्मयाह 23:10जो कहते हैं, “वह फुर्ती करे और अपने काम को शीघ्र करे कि हम उसको देखें; और इस्राएल के पवित्र की युक्ति प्रगट हो, वह निकट आए कि हम उसको समझें!” यह भी देखें: यहेजकेल 12:22यिर्मयाह 17:15यिर्मयाह 5:12-13हाय उन पर जो बुरे को भला और भले को बुरा कहते, जो अंधियारे को उजियाला और उजियाले को अंधियारा ठहराते, और कड़वे को मीठा और मीठे को कड़वा करके मानते हैं! यह भी देखें: नीतिवचन 17:152 तीमुथियुस 3:1-5लूकस 16:15हाय उन पर जो अपनी दृष्टि में ज्ञानी और अपने लेखे बुद्धिमान हैं! (नीति. 3:7, 26:12, रोम. 12:16) यह भी देखें: 1 कुरिन्थियों 3:18-20नीतिवचन 3:7रोमियों 12:16हाय उन पर जो दाखमधु पीने में वीर और मदिरा को तेज बनाने में बहादुर हैं, यह भी देखें: यशायाह 5:11हबक्कूक 2:15यशायाह 28:7जो घूस लेकर दुष्टों को निर्दोष, और निर्दोषों को दोषी ठहराते हैं! यह भी देखें: यशायाह 10:2स्तोत्र ग्रन्थ 94:21याकूब 5:6इस कारण जैसे अग्नि की लौ से खूँटी भस्म होती है और सूखी घास जलकर बैठ जाती है, वैसे ही उनकी जड़ सड़ जाएगी और उनके फूल धूल होकर उड़ जाएँगे; क्योंकि उन्होंने सेनाओं के यहोवा की व्यवस्था को निकम्मी जाना, और इस्राएल के पवित्र के वचन को तुच्छ जाना है। यह भी देखें: लूकस 3:17अय्यूब 18:16योएल 2:5इस कारण यहोवा का क्रोध अपनी प्रजा पर भड़का है, और उसने उनके विरुद्ध हाथ बढ़ाकर उनको मारा है, और पहाड़ काँप उठे; और लोगों की लोथें सड़कों के बीच कूड़ा सी पड़ी हैं। इतने पर भी उसका क्रोध शान्त नहीं हुआ और उसका हाथ अब तक बढ़ा हुआ है। यह भी देखें: यशायाह 10:4यशायाह 9:21यशायाह 9:17वह दूर-दूर की जातियों के लिये झण्डा खड़ा करेगा, और सीटी बजाकर उनको पृथ्वी की छोर से बुलाएगा; देखो, वे फुर्ती करके वेग से आएँगे! यह भी देखें: जकर्याह 10:8व्यवस्थाविवरण 28:49यशायाह 7:18उनमें कोई थका नहीं न कोई ठोकर खाता है; कोई उँघने या सोनेवाला नहीं, किसी का फेंटा नहीं खुला, और किसी के जूतों का बन्धन नहीं टूटा; यह भी देखें: योएल 2:7-8अय्यूब 12:18अय्यूब 12:21उनके तीर शुद्ध और धनुष चढ़ाए हुए हैं, उनके घोड़ों के खुर वज्र के से और रथों के पहिये बवण्डर सरीखे हैं। यह भी देखें: स्तोत्र ग्रन्थ 45:5यहेजकेल 21:9-11नहूम 2:3-4वे सिंह या जवान सिंह के समान गरजते हैं; वे गुर्राकर अहेर को पकड़ लेते और उसको ले भागते हैं, और कोई उसे उनसे नहीं छुड़ा सकता। यह भी देखें: यशायाह 42:22मीका 5:8जकर्याह 11:3उस समय वे उन पर समुद्र के गर्जन के समान गरजेंगे और यदि कोई देश की ओर देखे, तो उसे अंधकार और संकट देख पड़ेगा और ज्योति मेघों से छिप जाएगी। यह भी देखें: यशायाह 8:22योएल 2:10यिर्मयाह 4:23-28

यह भी देखें: क्रॉस-संदर्भ OpenBible.info (CC BY) से, आंशिक रूप से Treasury of Scripture Knowledge (सार्वजनिक डोमेन) पर आधारित।

टिप्पणियाँ · हेडॉक (1859, सार्वजनिक डोमेन)26 टिप्पणियाँ

टिप्पणियाँ अंग्रेज़ी में फ़ा. जॉर्ज लियो हेडॉक की 19वीं सदी की काथलिक टीका, जैसी प्रकाशित हुई।

ये टिप्पणियाँ अपने समय के विवादों को बनाए रखती हैं: कुछ यहूदी लोगों या अन्य ख्रीस्तीयों के बारे में कठोरता से बोलती हैं। आज कलीसिया कुछ और सिखाती है: ख्रीस्त की मृत्यु के लिए यहूदी लोगों को दोषी नहीं ठहराया जा सकता (नोस्त्रा एताते 4; धर्मशिक्षा 597–598), और अन्य समुदायों के ख्रीस्तीय प्रभु में हमारे भाई-बहन हैं (उनितातिस रेदिन्तेग्रात्सियो 3)। ख्रीस्तीय एकता

यशायाह 5:1

Ver. 1. My cousin. So the prophet calls Christ, as being of his family and kindred, by descending from the house of David. Ch. M. --- Heb. and Sept.

"beloved." Dod may also mean a near relation. C. --- Isaias being of the same tribe, sets before us the lamentations of Christ over Jerusalem. Lu. xix. 41. W.

--- The Hebrews had canticles of sorrow, as well as of joy. The prophet thus endeavours to impress more deeply on the minds of the people what he had been saying. The master of the vineyard is God himself. v. 7. C. --- Hill. Lit. in the horn, the son of oil. Ch. --- The best vines grew among olive and fig trees.

Doubdan 21. --- Sept. "in a horn, ( mountain) in a fat soil." H.

↑ 1

यशायाह 5:2

Ver. 2. Stones. They burn and starve in different seasons. Col. xii. 3. ---

Choicest. Heb. sorek.

H. --- There was a famous valley of this name. Judg. xvi. 4. The angels guarded the vineyard, in which Abraham, Moses, &c. were found. --- Tower. To keep the wine, &c. Mat. xxi. 33. It denotes the temple, (C.) Scriptures, &c. M. --- Wild.

Sour. Deut. xxxii. 32.

↑ 2

यशायाह 5:3

Ver. 3. Judge. God condescends to have his conduct scrutinized. C. xli. 1.

↑ 3

यशायाह 5:4

Ver. 4. Was it. "Why has it produced wild grapes, while I looked?" &c.

↑ 4

यशायाह 5:5

Ver. 5. Down. By the Chaldees, and after the death of Christ. C. --- when God withdraws his aid, man is unable to stand. Yet he falls by his own fault, which God only permits. W.

↑ 5

यशायाह 5:6

Ver. 6. It. During the whole of the captivity, the land might keep its sabbaths.

Lev. xxvi. 34. C.

--- The people shall be deprived of saving doctrine. M.

↑ 6

यशायाह 5:7

Ver. 7. Israel. This comparison is very common. Ps. lxxix. 9. Mat. xx. 1. C. ---

The preceding parable is explained. M. --- Cry. For vengeance. Jer. xii. 8. Gen.

iv. 10. and xviii. 20. C.

↑ 7

यशायाह 5:8

Ver. 8. Even. Sept. "to take from your neighbour: shall," &c. H.

↑ 8

यशायाह 5:9

Ver. 9. Things. Unjust practices. --- Inhabitant. What will your avarice avail, (H.) since you must abandon all? C.

↑ 9

यशायाह 5:10

Ver. 10. Measure. Heb. "both." --- Thirty. Heb. "a chomer shall yield an epha."

↑ 10

यशायाह 5:11

Ver. 11. To follow. Heb. "for shecar," (C.) palm wine, (Theod.) or any inebriating liquor. S. Jer.

in C. xxviii. Our version is conformable to Aquila and Sym. H. --- Num. vi. 3.

Eccle. x. 16.

↑ 11

यशायाह 5:12

Ver. 12. Work. Chastisement. v. 19. and c. xxviii. 21. C. --- They are admonished to observe the festivals of the Lord, and not to indulge in riotousness. W.

↑ 12

यशायाह 5:14

Ver. 14. Hell. Or the grave, which never says enough. Prov. xxx. 15. Isaias alludes to what should happen under Nabuchodonosor, as if it were past. G.

↑ 14

यशायाह 5:16

Ver. 16. Justice. All will be taught to adore him. H.

↑ 16

यशायाह 5:17

Ver. 17. Strangers. Ammonites, &c. (C.) shall occupy part of the land. H.

↑ 17

यशायाह 5:18

Ver. 18. Cart. Fatiguing themselves with iniquity, (Wisd. v. 7. C.) and delaying your conversion. S. Isid. M.

↑ 18

यशायाह 5:19

Ver. 19. It. The Jews were often guilty of the like insolence. Jer. xvii. 15.

↑ 19

यशायाह 5:21

Ver. 21. Conceits. Blind guides. Mat. xv. 14.

↑ 21

यशायाह 5:22

Ver. 22. Drink. Heb. "mix shecar." People generally mixed wine and water. They also strove who could drink most, and the Greeks had a feast for this purpose, (C.) which they styled Choas, for the measure which was to be swallowed down. Aristoph. Acharn. act. iv. 4. and 5. ult. ---

Cyrus the younger boasted to the Gr. ambassadors, that "he could drink and bear more wine than his brother." Plut. in Artax.

↑ 22

यशायाह 5:23

Ver. 23. Justice. Declaring the righteous guilty. v. 20. H.

↑ 23

यशायाह 5:25

Ver. 25. Still. After the ruin of Jerusalem, the people were led away. C. ---

Grievous sins must be severely punished, as was that of the murderers of Christ. W.

↑ 25

यशायाह 5:26

Ver. 26. Off. Like a king, leading all his subjects to battle. C. --- Whistle. He alludes to the custom of leading forth bees by music. C. vii. 18. S. Cyr. ---

Earth. The Chaldees, (c. xli. 9. Jer.

vi. 22.) and not the Romans, as some would suppose. --- Swiftly. Like an eagle.

Dan. vii. 4. Jer.

xlviii. 40.

↑ 26

यशायाह 5:27

Ver. 27. Broken. They shall march incessantly. Ezec. xxvi. 7. and xxx. 11.

↑ 27

यशायाह 5:28

Ver. 28. Hoofs. They were hardened, but not shod. Xenoph. Amos vi. 13.

↑ 28

यशायाह 5:29

Ver. 29. Lion. Nabuchodonosor is compared to one. v. 26. Jer. iv. 7.

↑ 29

यशायाह 5:30

Ver. 30. Mist. Denoting calamity. Heb. "ruin." Sept. "indigence." C.

↑ 30

लाइसेंस: Notes by Fr. George Leo Haydock (1774–1849), from the Douay-Rheims Bible with Haydock's commentary (first ed. Thomas Haydock, Manchester/Dublin, 1811–1814; New York: Edward Dunigan & Brother, 1859); New Testament notes compiled with Fr. Benedict Rayment. Public domain. Digital text: "The Haydock Bible", Internet Archive (archive.org/details/TheHaydockBible), uploaded 2011 under the Public Domain Mark. · आभार और लाइसेंस

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