
यिर्मयाह · IRV-HI
यिर्मयाह
12
बाइबल पाठकृत्रिम आवाज़ (AI)
हे यहोवा, यदि मैं तुझ से मुकद्दमा लड़ूँ, तो भी तू धर्मी है; मुझे अपने साथ इस विषय पर वाद-विवाद करने दे। दुष्टों की चाल क्यों सफल होती है? क्या कारण है कि विश्वासघाती बहुत सुख से रहते हैं? यह भी देखें: मलाकी 3:15स्तोत्र ग्रन्थ 92:7स्तोत्र ग्रन्थ 37:1तू उनको बोता और वे जड़ भी पकड़ते; वे बढ़ते और फलते भी हैं; तू उनके मुँह के निकट है परन्तु उनके मनों से दूर है। यह भी देखें: यशायाह 29:13तीतुस 1:16मत्ती 15:8हे यहोवा तू मुझे जानता है; तू मुझे देखता है, और तूने मेरे मन की परीक्षा करके देखा कि मैं तेरी ओर किस प्रकार रहता हूँ। जैसे भेड़-बकरियाँ घात होने के लिये झुण्ड में से निकाली जाती हैं, वैसे ही उनको भी निकाल ले और वध के दिन के लिये तैयार कर। (भज. 17:3) यह भी देखें: 2 राजाओं 20:3यिर्मयाह 17:18स्तोत्र ग्रन्थ 139:1-4कब तक देश विलाप करता रहेगा, और सारे मैदान की घास सूखी रहेगी? देश के निवासियों की बुराई के कारण पशु-पक्षी सब नाश हो गए हैं, क्योंकि उन लोगों ने कहा, “वह हमारे अन्त को न देखेगा।” यह भी देखें: यिर्मयाह 9:10स्तोत्र ग्रन्थ 107:34यिर्मयाह 4:25“तू जो प्यादों ही के संग दौड़कर थक गया है तो घोड़ों के संग कैसे बराबरी कर सकेगा? और यद्यपि तू शान्ति के इस देश में निडर है, परन्तु यरदन के आस-पास के घने जंगल में तू क्या करेगा? यह भी देखें: 1 पतरस 4:12नीतिवचन 24:10इब्रानियों 12:3-4क्योंकि तेरे भाई और तेरे घराने के लोगों ने भी तेरा विश्वासघात किया है; वे तेरे पीछे ललकारते हैं, यदि वे तुझ से मीठी बातें भी कहें, तो भी उन पर विश्वास न करना।” यह भी देखें: नीतिवचन 26:25यिर्मयाह 9:4स्तोत्र ग्रन्थ 12:2“मैंने अपना घर छोड़ दिया, अपना निज भाग मैंने त्याग दिया है; मैंने अपनी प्राणप्रिया को शत्रुओं के वश में कर दिया है। यह भी देखें: स्तोत्र ग्रन्थ 78:59-60यशायाह 2:6यिर्मयाह 11:15क्योंकि मेरा निज भाग मेरे देखने में वन के सिंह के समान हो गया और मेरे विरुद्ध गरजा है; इस कारण मैंने उससे बैर किया है। यह भी देखें: आमोस 6:8होशे 9:15जकर्याह 11:8क्या मेरा निज भाग मेरी दृष्टि में चित्तीवाले शिकारी पक्षी के समान नहीं है? क्या शिकारी पक्षी चारों ओर से उसे घेरे हुए हैं? जाओ सब जंगली पशुओं को इकट्ठा करो; उनको लाओ कि खा जाएँ। यह भी देखें: यशायाह 56:9यिर्मयाह 7:33प्रकाशितवाक्य 19:17-18बहुत से चरवाहों ने मेरी दाख की बारी को बिगाड़ दिया, उन्होंने मेरे भाग को लताड़ा, वरन् मेरे मनोहर भाग के खेत को सुनसान जंगल बना दिया है। यह भी देखें: यिर्मयाह 23:1यशायाह 5:1-7यशायाह 63:18उन्होंने उसको उजाड़ दिया; वह उजड़कर मेरे सामने विलाप कर रहा है। सारा देश उजड़ गया है, तो भी कोई नहीं सोचता। यह भी देखें: यशायाह 42:25यिर्मयाह 23:10यिर्मयाह 14:2जंगल के सब मुंडे टीलों पर नाश करनेवाले चढ़ आए हैं; क्योंकि यहोवा की तलवार देश के एक छोर से लेकर दूसरी छोर तक निगलती जाती है; किसी मनुष्य को शान्ति नहीं मिलती। यह भी देखें: आमोस 9:4यिर्मयाह 47:6यशायाह 34:6उन्होंने गेहूँ तो बोया, परन्तु कँटीली झाड़ियाँ काटीं, उन्होंने कष्ट तो उठाया, परन्तु उससे कुछ लाभ न हुआ। यहोवा के क्रोध के भड़कने के कारण वे अपने खेतों की उपज के विषय में लज्जित हो।” यह भी देखें: व्यवस्थाविवरण 28:38हाग्गै 1:6मीका 6:15मेरे दुष्ट पड़ोसी उस भाग पर हाथ लगाते हैं, जिसका भागी मैंने अपनी प्रजा इस्राएल को बनाया है। उनके विषय यहोवा यह कहता है: “मैं उनको उनकी भूमि में से उखाड़ डालूँगा, और यहूदा के घराने को भी उनके बीच में से उखाड़ूँगा। यह भी देखें: जकर्याह 2:8यिर्मयाह 3:18जकर्याह 10:6-12उन्हें उखाड़ने के बाद मैं फिर उन पर दया करूँगा, और उनमें से हर एक को उसके निज भाग और भूमि में फिर से लगाऊँगा। (व्यव. 30:3) यह भी देखें: यिर्मयाह 49:6यिर्मयाह 48:47यिर्मयाह 49:39यदि वे मेरी प्रजा की चाल सीखकर मेरे ही नाम की सौगन्ध, यहोवा के जीवन की सौगन्ध, खाने लगें, जिस प्रकार से उन्होंने मेरी प्रजा को बाल की सौगन्ध खाना सिखाया था, तब मेरी प्रजा के बीच उनका भी वंश बढ़ेगा। यह भी देखें: यिर्मयाह 4:2यहोशू 23:7सपन्याह 1:5परन्तु यदि वे न मानें, तो मैं उस जाति को ऐसा उखाड़ूँगा कि वह फिर कभी न पनपेगी, यहोवा की यही वाणी है।” यह भी देखें: यशायाह 60:12स्तोत्र ग्रन्थ 2:8-121 पतरस 2:6-8
यह भी देखें: क्रॉस-संदर्भ OpenBible.info (CC BY) से, आंशिक रूप से Treasury of Scripture Knowledge (सार्वजनिक डोमेन) पर आधारित।
मनन
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टिप्पणियाँ · हेडॉक (1859, सार्वजनिक डोमेन)14 टिप्पणियाँ
टिप्पणियाँ अंग्रेज़ी में फ़ा. जॉर्ज लियो हेडॉक की 19वीं सदी की काथलिक टीका, जैसी प्रकाशित हुई।
ये टिप्पणियाँ अपने समय के विवादों को बनाए रखती हैं: कुछ यहूदी लोगों या अन्य ख्रीस्तीयों के बारे में कठोरता से बोलती हैं। आज कलीसिया कुछ और सिखाती है: ख्रीस्त की मृत्यु के लिए यहूदी लोगों को दोषी नहीं ठहराया जा सकता (नोस्त्रा एताते 4; धर्मशिक्षा 597–598), और अन्य समुदायों के ख्रीस्तीय प्रभु में हमारे भाई-बहन हैं (उनितातिस रेदिन्तेग्रात्सियो 3)। ख्रीस्तीय एकता
यिर्मयाह 12:1
Ver. 1. Is just. Heb. "judgment." Sept. "I will make my apology to thee."
Jeremias had been grievously persecuted by his countrymen: he therefore mentions a subject which has been the source of much perplexity. The success of the wicked is a temptation for weak souls. See Job xxi. Ps. lxxii. 3.
Hab. i. 13. C. --- The prophets often speak in their names, not being ignorant or doubtful of the justice of divine providence. W.
↑ 1यिर्मयाह 12:2
Ver. 2. Reins. They have thy name in their mouth, but not in their heart. Is. xxix.
13. Mat. xv. 8.
↑ 2यिर्मयाह 12:3
Ver. 3. Gather. God orders his prophet to announce the misery of the wicked.
↑ 3यिर्मयाह 12:4
Ver. 4. Mourn? Is not this a proof of my providence in chastising Juda? This famine is specified C. viii. 13. and xiv. 4. C. --- Last end. Two letters seem to be transposed in Heb. as the Sept. read
"ways." Kennicott. --- The impious blaspheme as if all were ruled by chance. C.
↑ 4यिर्मयाह 12:5
Ver. 5. Horses. If thou hast been terrified at the threats of thy fellow-citizens, how wilt thou withstand those of Jerusalem? (M.) or he speaks to Juda, who would not be able to resist the Chaldees, since the Philistines, &c. had routed the Jews, though destitute of cavalry. --- Jordan, or the nations of Ammon, &c.
on that side. C. --- Prot. "if in the land of peace, wherein thou trustedst, they wearied thee, then how wilt," &c. H.
↑ 5यिर्मयाह 12:6
Ver. 6. To thee. Edom, &c. made a league with Sedecias, which they broke.
They always bore a hatred to the Jews, though sprung from the same stock. C.
xxvii. 1. Lam. iv. 21. C.
↑ 6यिर्मयाह 12:7
Ver. 7. Soul; people, (H.) whose punishment was decreed. Say not, therefore, that the wicked always prosper.
↑ 7यिर्मयाह 12:9
Ver. 9. As a. Sept. "a den of the hyena:" Alex. "robbers." Grabe inserts, "or a den around it?" H.
--- They have read auss, "a den," instead of hait, "a bird." Bochart, (iii. 11.) however, shews that the latter word denotes various wild beasts, and nearly follows the Sept. Though the inheritance be most charming, it shall not pass unpunished. C.
↑ 9यिर्मयाह 12:10
Ver. 10. Pastors; princes of my people, as well (H.) as of the Chaldees. C. vi. 3.
↑ 10यिर्मयाह 12:11
Ver. 11. Heart, to seek God and the cause of their misfortunes.
↑ 11यिर्मयाह 12:13
Ver. 13. Fruits. They shall not satisfy your expectations or wants.
↑ 13यिर्मयाह 12:14
Ver. 14. Land. Nabuchodonosor led the Ammonites, &c. into captivity, five years after the Jews.
Jos. Ant. x. 11. C. --- After the children are chastised, the rod is burnt. W.
↑ 14यिर्मयाह 12:15
Ver. 15. Land; the Jews, as well as their neighbours. C. xlix. 6. M. Is. xxiii. 15.
Ezec. xvi. 55.
↑ 15यिर्मयाह 12:16
Ver. 16. People. After the captivity, converts were more cherished. Yet the predictions concerning the call of the Gentiles were accomplished only by the preaching of the gospel. C.
↑ 16लाइसेंस: Notes by Fr. George Leo Haydock (1774–1849), from the Douay-Rheims Bible with Haydock's commentary (first ed. Thomas Haydock, Manchester/Dublin, 1811–1814; New York: Edward Dunigan & Brother, 1859); New Testament notes compiled with Fr. Benedict Rayment. Public domain. Digital text: "The Haydock Bible", Internet Archive (archive.org/details/TheHaydockBible), uploaded 2011 under the Public Domain Mark. · आभार और लाइसेंस