AI-generated illustration: the prophet Ezekiel stands on a hillside at dawn as the breath of God sweeps through the valley and the people of the dry bones rise up alive. Classical sacred-art style.
AI द्वारा निर्मित

यहेजकेल

33
बाइबल पाठ

कृत्रिम आवाज़ (AI)

चित्र स्टूडियो में खोलें
यहोवा का यह वचन मेरे पास पहुँचा: “हे मनुष्य के सन्तान, अपने लोगों से कह, जब मैं किसी देश पर तलवार चलाने लगूँ, और उस देश के लोग किसी को अपना पहरुआ करके ठहराएँ, यह भी देखें: यहेजकेल 33:30यहेजकेल 14:17यहेजकेल 33:17तब यदि वह यह देखकर कि इस देश पर तलवार चलने वाली है, नरसिंगा फूँककर लोगों को चिता दे, यह भी देखें: होशे 8:1नहेम्याह 4:20नहेम्याह 4:18तो जो कोई नरसिंगे का शब्द सुनने पर न चेते और तलवार के चलने से मर जाए, उसका खून उसी के सिर पड़ेगा। यह भी देखें: यहेजकेल 18:13प्रेरित-चरित 18:6यहेजकेल 33:9उसने नरसिंगे का शब्द सुना, परन्तु न चेता; इसलिए उसका खून उसी को लगेगा। परन्तु, यदि वह चेत जाता, तो अपना प्राण बचा लेता। (मत्ती 27:25) यह भी देखें: इब्रानियों 11:7निर्गमन 9:19-21योहन 8:39परन्तु यदि पहरुआ यह देखने पर कि तलवार चलने वाली है नरसिंगा फूँककर लोगों को न चिताए, और तलवार के चलने से उनमें से कोई मर जाए, तो वह तो अपने अधर्म में फँसा हुआ मर जाएगा, परन्तु उसके खून का लेखा मैं पहरुए ही से लूँगा। यह भी देखें: यहेजकेल 3:18-202 शमूएल 4:11यहेजकेल 33:8-9“इसलिए, हे मनुष्य के सन्तान, मैंने तुझे इस्राएल के घराने का पहरुआ ठहरा दिया है; तू मेरे मुँह से वचन सुन-सुनकर उन्हें मेरी ओर से चिता दे। यह भी देखें: यिर्मयाह 26:2यहेजकेल 3:17-21यहेजकेल 2:7-8यदि मैं दुष्ट से कहूँ, ‘हे दुष्ट, तू निश्चय मरेगा,’ तब यदि तू दुष्ट को उसके मार्ग के विषय न चिताए, तो वह दुष्ट अपने अधर्म में फँसा हुआ मरेगा, परन्तु उसके खून का लेखा में तुझी से लूँगा। यह भी देखें: प्रेरित-चरित 20:26-27यहेजकेल 33:6यहेजकेल 33:14परन्तु यदि तू दुष्ट को उसके मार्ग के विषय चिताए कि वह अपने मार्ग से फिरे और वह अपने मार्ग से न फिरे, तो वह तो अपने अधर्म में फँसा हुआ मरेगा, परन्तु तू अपना प्राण बचा लेगा। यह भी देखें: यहेजकेल 3:19प्रेरित-चरित 20:26नीतिवचन 15:10“फिर हे मनुष्य के सन्तान, इस्राएल के घराने से यह कह, तुम लोग कहते हो: ‘हमारे अपराधों और पापों का भार हमारे ऊपर लदा हुआ है और हम उसके कारण नाश हुए जाते हैं; हम कैसे जीवित रहें?’ यह भी देखें: यहेजकेल 37:11यशायाह 49:14यहेजकेल 4:17इसलिए तू उनसे यह कह, परमेश्वर यहोवा की यह वाणी है: मेरे जीवन की सौगन्ध, मैं दुष्ट के मरने से कुछ भी प्रसन्न नहीं होता, परन्तु इससे कि दुष्ट अपने मार्ग से फिरकर जीवित रहे; हे इस्राएल के घराने, तुम अपने-अपने बुरे मार्ग से फिर जाओ; तुम क्यों मरो? यह भी देखें: 1 तीमुथियुस 2:4यहेजकेल 18:232 पतरस 3:9हे मनुष्य के सन्तान, अपने लोगों से यह कह, जब धर्मी जन अपराध करे तब उसकी धार्मिकता उसे बचा न सकेगी; और दुष्ट की दुष्टता भी जो हो, जब वह उससे फिर जाए, तो उसके कारण वह न गिरेगा; और धर्मी जन जब वह पाप करे, तब अपनी धार्मिकता के कारण जीवित न रहेगा। यह भी देखें: 2 इतिहास 7:14यहेजकेल 33:18-19रोमियों 3:25यदि मैं धर्मी से कहूँ कि तू निश्चय जीवित रहेगा, और वह अपने धार्मिकता पर भरोसा करके कुटिल काम करने लगे, तब उसके धार्मिकता के कामों में से किसी का स्मरण न किया जाएगा; जो कुटिल काम उसने किए हों वह उन्हीं में फँसा हुआ मरेगा। यह भी देखें: यहेजकेल 18:24इब्रानियों 10:38यहेजकेल 18:4फिर जब मैं दुष्ट से कहूँ, तू निश्चय मरेगा, और वह अपने पाप से फिरकर न्याय और धर्म के काम करने लगे, यह भी देखें: यहेजकेल 18:27यशायाह 55:7यिर्मयाह 18:7-8अर्थात् यदि दुष्ट जन बन्धक लौटा दे, अपनी लूटी हुई वस्तुएँ भर दे, और बिना कुटिल काम किए जीवनदायक विधियों पर चलने लगे, तो वह न मरेगा; वह निश्चय जीवित रहेगा। यह भी देखें: यहेजकेल 20:11लूकस 19:8निर्गमन 22:1-4जितने पाप उसने किए हों, उनमें से किसी का स्मरण न किया जाएगा; उसने न्याय और धर्म के काम किए और वह निश्चय जीवित रहेगा। यह भी देखें: यशायाह 43:25यहेजकेल 18:22मीका 7:18-19“तो भी तुम्हारे लोग कहते हैं, प्रभु की चाल ठीक नहीं; परन्तु उन्हीं की चाल ठीक नहीं है। यह भी देखें: मत्ती 25:24-26यहेजकेल 18:29यहेजकेल 18:25जब धर्मी अपने धार्मिकता से फिरकर कुटिल काम करने लगे, तब निश्चय वह उनमें फँसा हुआ मर जाएगा। यह भी देखें: यहेजकेल 33:12-13इब्रानियों 10:382 पतरस 2:20-22जब दुष्ट अपनी दुष्टता से फिरकर न्याय और धर्म के काम करने लगे, तब वह उनके कारण जीवित रहेगा। यह भी देखें: यहेजकेल 18:27-28यहेजकेल 33:14तो भी तुम कहते हो कि प्रभु की चाल ठीक नहीं? हे इस्राएल के घराने, मैं हर एक व्यक्ति का न्याय उसकी चाल ही के अनुसार करूँगा।” यह भी देखें: मत्ती 16:27यहेजकेल 18:25यहेजकेल 33:17फिर हमारी बँधुआई के ग्यारहवें वर्ष के दसवें महीने के पाँचवें दिन को, एक व्यक्ति जो यरूशलेम से भागकर बच गया था, वह मेरे पास आकर कहने लगा, “नगर ले लिया गया।” यह भी देखें: यहेजकेल 1:2यिर्मयाह 39:1-82 इतिहास 36:17-21उस भागे हुए के आने से पहले साँझ को यहोवा की शक्ति मुझ पर हुई थी; और भोर तक अर्थात् उस मनुष्य के आने तक उसने मेरा मुँह खोल दिया; अतः मेरा मुँह खुला ही रहा, और मैं फिर गूँगा न रहा। यह भी देखें: यहेजकेल 1:3यहेजकेल 24:26-27यहेजकेल 3:26-27तब यहोवा का यह वचन मेरे पास पहुँचा: “हे मनुष्य के सन्तान, इस्राएल की भूमि के उन खण्डहरों के रहनेवाले यह कहते हैं, अब्राहम एक ही मनुष्य था, तो भी देश का अधिकारी हुआ; परन्तु हम लोग बहुत से हैं, इसलिए देश निश्चय हमारे ही अधिकार में दिया गया है। यह भी देखें: यशायाह 51:2यहेजकेल 33:27प्रेरित-चरित 7:5इस कारण तू उनसे कह, परमेश्वर यहोवा यह कहता है, तुम लोग तो माँस लहू समेत खाते और अपनी मूरतों की ओर दृष्टि करते, और हत्या करते हो; फिर क्या तुम उस देश के अधिकारी रहने पाओगे? यह भी देखें: यिर्मयाह 7:9-10उत्पत्ति 9:4व्यवस्थाविवरण 12:16तुम अपनी-अपनी तलवार पर भरोसा करते और घिनौने काम करते, और अपने-अपने पड़ोसी की स्त्री को अशुद्ध करते हो; फिर क्या तुम उस देश के अधिकारी रहने पाओगे? यह भी देखें: सपन्याह 3:3उत्पत्ति 27:40मीका 2:1-2तू उनसे यह कह, परमेश्वर यहोवा यह कहता है: मेरे जीवन की सौगन्ध, निःसन्देह जो लोग खण्डहरों में रहते हैं, वे तलवार से गिरेंगे, और जो खुले मैदान में रहता है, उसे मैं जीवजन्तुओं का आहार कर दूँगा, और जो गढ़ों और गुफाओं में रहते हैं, वे मरी से मरेंगे। (यिर्म. 42:22) यह भी देखें: यिर्मयाह 42:221 शमूएल 13:6यहेजकेल 39:4मैं उस देश को उजाड़ ही उजाड़ कर दूँगा; और उसके बल का घमण्ड जाता रहेगा; और इस्राएल के पहाड़ ऐसे उजड़ेंगे कि उन पर होकर कोई न चलेगा। यह भी देखें: यहेजकेल 7:24मीका 7:13यिर्मयाह 44:2इसलिए जब मैं उन लोगों के किए हुए सब घिनौने कामों के कारण उस देश को उजाड़ ही उजाड़ कर दूँगा, तब वे जान लेंगे कि मैं यहोवा हूँ। यह भी देखें: यहेजकेल 6:7यिर्मयाह 5:1-9यहेजकेल 7:27“हे मनुष्य के सन्तान, तेरे लोग दीवारों के पास और घरों के द्वारों में तेरे विषय में बातें करते और एक दूसरे से कहते हैं, ‘आओ, सुनो, यहोवा की ओर से कौन सा वचन निकलता है।’ यह भी देखें: मत्ती 15:8यिर्मयाह 23:35मत्ती 22:16-17वे प्रजा के समान तेरे पास आते और मेरी प्रजा बनकर तेरे सामने बैठकर तेरे वचन सुनते हैं, परन्तु वे उन पर चलते नहीं; मुँह से तो वे बहुत प्रेम दिखाते हैं, परन्तु उनका मन लालच ही में लगा रहता है। यह भी देखें: स्तोत्र ग्रन्थ 78:36-37मत्ती 13:22याकूब 1:22-24तू उनकी दृष्टि में प्रेम के मधुर गीत गानेवाले और अच्छे बजानेवाले का सा ठहरा है, क्योंकि वे तेरे वचन सुनते तो है, परन्तु उन पर चलते नहीं। यह भी देखें: मारकुस 6:20मारकुस 4:16-17योहन 5:35इसलिए जब यह बात घटेगी, और वह निश्चय घटेगी! तब वे जान लेंगे कि हमारे बीच एक भविष्यद्वक्ता आया था।” यह भी देखें: यिर्मयाह 28:9यहेजकेल 2:51 शमूएल 3:19-20

यह भी देखें: क्रॉस-संदर्भ OpenBible.info (CC BY) से, आंशिक रूप से Treasury of Scripture Knowledge (सार्वजनिक डोमेन) पर आधारित।

टिप्पणियाँ · हेडॉक (1859, सार्वजनिक डोमेन)14 टिप्पणियाँ

टिप्पणियाँ अंग्रेज़ी में फ़ा. जॉर्ज लियो हेडॉक की 19वीं सदी की काथलिक टीका, जैसी प्रकाशित हुई।

ये टिप्पणियाँ अपने समय के विवादों को बनाए रखती हैं: कुछ यहूदी लोगों या अन्य ख्रीस्तीयों के बारे में कठोरता से बोलती हैं। आज कलीसिया कुछ और सिखाती है: ख्रीस्त की मृत्यु के लिए यहूदी लोगों को दोषी नहीं ठहराया जा सकता (नोस्त्रा एताते 4; धर्मशिक्षा 597–598), और अन्य समुदायों के ख्रीस्तीय प्रभु में हमारे भाई-बहन हैं (उनितातिस रेदिन्तेग्रात्सियो 3)। ख्रीस्तीय एकता

यहेजकेल 33:2

Ver. 2. Take. Before (C. iii. 17.) God made the choice, (C.) as he does here, v. 7.

He confirms the authority of those who are appointed to govern. --- Meanest.

Lit. "last," (H.) which seems to denote such as are chosen without regard to their dignity or obscurity in life. Gen. xlvii. 2. and 3

K. xii. 31. C. --- Pastors are not excused from admonishing the people for fear of danger or despair of reclaiming them, as each one is bound to do his duty.

S. Jer. W.

↑ 2

यहेजकेल 33:6

Ver. 6. Iniquity, not regarding the admonitions of his pastor; (C. iii. 18. C.) or rather of conscience, when the guide proves faithless and silent, as in this instance. H. --- The people were persuaded that none suffered except for some fault. v. 10. Jer. xxxi. 30. Dan. xiii. 52. Gen. xliv.

16. The author of the Book of Job takes great pains to remove this mistake.

God sometimes sends crosses for a trial, (C.) and to increase the merit of his servants; though it be very true, (H.)

"no one is miserable except he deserve it." S. Aug.

↑ 6

यहेजकेल 33:8

Ver. 8. Surely die a temporal, (Theod.) or rather an eternal death. S. Jer.

↑ 8

यहेजकेल 33:10

Ver. 10. Live? They suppose their case to be desperate, as their fathers had sinned. C. xviii. The prophet shews that none are punished except for their own faults, (C.) and that "each one has free-will to be saved or to be lost." S.

Jer.

↑ 10

यहेजकेल 33:11

Ver. 11. Desire. The sinner's damnation is not an object of God's pleasure. C.

xviii. 23. C. ---

He has an antecedent will to save all. He knocks at the door of our heart, (Apoc. iii. 20.) and if man do what depends on him, nothing will be wanting on the part of God. S. Tho. i. 2. q. 109.

and 112. W.

↑ 11

यहेजकेल 33:12

Ver. 12. Hurt him. God effaces all past crimes: yet a relapse makes them as it were revive, and is pardoned with more difficulty. Mat. xviii. 35. Some read, "In what day the converted sinner groans, he shall be saved," as if they had taken in part of Is. xxx. 15.

↑ 12

यहेजकेल 33:17

Ver. 17. Equitable; as we are much more inclined to vice than to virtue. This argumentation is inconclusive, as God owes nothing to man; and what good the latter does, is an effect of His grace. The propensity to evil is no excuse, as man is still free. He is judged according to the dispositions in which he is found at the hour of death; yet we must not infer, that those who have spent their lives in sinning will be no worse treated than the person who dies guilty of a single crime.

↑ 17

यहेजकेल 33:21

Ver. 21. Twelfth. Rom. Sept. "tenth." Syr. "eleventh year,...in the twelfth month;"

which Theodoret thinks more probable, as the city was taken in the ninth of the fourth month of that year. Yet even so, it is strange that the news should not arrive before. Some think (C.) that the messenger came also to announce what happened after the death of Godolias. Sanct. ---

Captivity. Here it is evident that the prophet dates from that event. C. i. &c. H.

--- As he prophesied on the very day when the city was besieged, (C. xxiv. 2.) so (v. 26.) he foretold that one should come three years after to inform him of the capture. W. --- Then the people would believe him, (ib. v. 27. C.) and he would open his mouth boldly. v. 22. H.

↑ 21

यहेजकेल 33:24

Ver. 24. Places. He has answered those who despaired. v. 10. Now he turns to the presumptuous, who expected to be treated like Abraham, though they did not imitate his virtues.

C. --- They perhaps entertained these sentiments before the death of Godolias, thinking to establish themselves in the land. Afterwards the prophet Jeremias could not prevail on them to remain, though God promised them security.

↑ 24

यहेजकेल 33:25

Ver. 25. To them. Grabe marks to v. 27. Thus saith, &c. as wanting in the Sept.

though not in the Alex. copy. S. Jerom reckons eight verses or lines omitted.

H. --- The Comp. and Theodoret read them with some variations. --- The blood.

It must be carefully extracted. Gen. ix. 4. Lev. vii. 26.

--- Uncleannesses; idols, in which you trust.

↑ 25

यहेजकेल 33:26

Ver. 26. Swords, thinking to live thereby, (Gen. xxvii. 40.) and to be secure. But I will disarm you. The pestilence shall find out those in the rocks. v. 27.

↑ 26

यहेजकेल 33:30

Ver. 30. Walls, the resort of idle people. C.

↑ 30

यहेजकेल 33:31

Ver. 31. In to a religious meeting. Chal. Perhaps they came on the sabbath to his house. Yet they made a just and song of his instructions. C. --- They heard them with pleasure, but did not reform their lives. H.

↑ 31

यहेजकेल 33:33

Ver. 33. Coming. The desolation of Jerusalem, (H.) and what I have foretold, hath already taken place; or, the news will presently arrive: as it did the following morning. v. 21. C.

↑ 33

लाइसेंस: Notes by Fr. George Leo Haydock (1774–1849), from the Douay-Rheims Bible with Haydock's commentary (first ed. Thomas Haydock, Manchester/Dublin, 1811–1814; New York: Edward Dunigan & Brother, 1859); New Testament notes compiled with Fr. Benedict Rayment. Public domain. Digital text: "The Haydock Bible", Internet Archive (archive.org/details/TheHaydockBible), uploaded 2011 under the Public Domain Mark. · आभार और लाइसेंस

मनन

इस अंश के लिए अभी कोई समीक्षित मनन नहीं।

संस्करण: Hindi Indian Revised Version · लाइसेंस: CC BY-SA 4.0
Hindi Indian Revised Version (IRV) © 2017, 2018, 2019 Bridge Connectivity Solutions Pvt. Ltd. Licensed under CC BY-SA 4.0 (https://creativecommons.org/licenses/by-sa/4.0/). Source: eBible.org (https://ebible.org/find/details.php?id=hin2017). Changes: none to the wording; formatting only (verse-per-line import). No endorsement by the licensor is implied.
आभार और लाइसेंस