AI-generated illustration: an ancient olive tree on a terraced hillside in morning sun.
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सभोपदेशक

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बाइबल पाठ

कृत्रिम आवाज़ (AI)

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हर एक बात का एक अवसर और प्रत्येक काम का, जो आकाश के नीचे होता है, एक समय है। यह भी देखें: सभोपदेशक 3:17मत्ती 16:3सभोपदेशक 8:5-6जन्म का समय, और मरण का भी समय; बोने का समय; और बोए हुए को उखाड़ने का भी समय है; यह भी देखें: इब्रानियों 9:27अय्यूब 14:5मत्ती 15:13घात करने का समय, और चंगा करने का भी समय; ढा देने का समय, और बनाने का भी समय है; यह भी देखें: होशे 6:1-21 शमूएल 2:6यिर्मयाह 45:4रोने का समय, और हँसने का भी समय; छाती पीटने का समय, और नाचने का भी समय है; यह भी देखें: रोमियों 12:15स्तोत्र ग्रन्थ 30:5याकूब 4:9पत्थर फेंकने का समय, और पत्थर बटोरने का भी समय; गले लगाने का समय, और गले लगाने से रुकने का भी समय है; यह भी देखें: 2 राजाओं 3:25यहोशू 10:27यहोशू 4:3-9ढूँढ़ने का समय, और खो देने का भी समय; बचा रखने का समय, और फेंक देने का भी समय है; यह भी देखें: फिलिप्पियों 3:7-8लूकस 9:24-25मारकुस 8:35-37फाड़ने का समय, और सीने का भी समय; चुप रहने का समय, और बोलने का भी समय है; यह भी देखें: मीका 7:5आमोस 5:13एस्तेर 4:13-14प्रेम करने का समय, और बैर करने का भी समय; लड़ाई का समय, और मेल का भी समय है। यह भी देखें: इफिसियों 5:25इफिसियों 5:28-29लूकस 14:26काम करनेवाले को अपने परिश्रम से क्या लाभ होता है? यह भी देखें: सभोपदेशक 1:3सभोपदेशक 5:16नीतिवचन 14:23मैंने उस दुःख भरे काम को देखा है जो परमेश्वर ने मनुष्यों के लिये ठहराया है कि वे उसमें लगे रहें। यह भी देखें: सभोपदेशक 1:13-14उत्पत्ति 3:19सभोपदेशक 2:26उसने सब कुछ ऐसा बनाया कि अपने-अपने समय पर वे सुन्दर होते हैं; फिर उसने मनुष्यों के मन में अनादि-अनन्तकाल का ज्ञान उत्पन्न किया है, तो भी जो काम परमेश्वर ने किया है, वह आदि से अन्त तक मनुष्य समझ नहीं सकता। यह भी देखें: रोमियों 11:33रोमियों 1:19-20अय्यूब 11:7मैंने जान लिया है कि मनुष्यों के लिये आनन्द करने और जीवन भर भलाई करने के सिवाय, और कुछ भी अच्छा नहीं; यह भी देखें: स्तोत्र ग्रन्थ 37:3सभोपदेशक 3:221 तीमुथियुस 6:18और यह भी परमेश्वर का दान है कि मनुष्य खाए-पीए और अपने सब परिश्रम में सुखी रहे। यह भी देखें: सभोपदेशक 2:24यशायाह 65:21-23सभोपदेशक 9:7मैं जानता हूँ कि जो कुछ परमेश्वर करता है वह सदा स्थिर रहेगा; न तो उसमें कुछ बढ़ाया जा सकता है और न कुछ घटाया जा सकता है; परमेश्वर ऐसा इसलिए करता है कि लोग उसका भय मानें। यह भी देखें: याकूब 1:17स्तोत्र ग्रन्थ 33:11रोमियों 11:36जो कुछ हुआ वह इससे पहले भी हो चुका; जो होनेवाला है, वह हो भी चुका है; और परमेश्वर बीती हुई बात को फिर पूछता है। यह भी देखें: सभोपदेशक 1:9-10सभोपदेशक 6:10फिर मैंने सूर्य के नीचे क्या देखा कि न्याय के स्थान में दुष्टता होती है, और धार्मिकता के स्थान में भी दुष्टता होती है। यह भी देखें: सभोपदेशक 4:1सभोपदेशक 5:8स्तोत्र ग्रन्थ 94:21-22मैंने मन में कहा, “परमेश्वर धर्मी और दुष्ट दोनों का न्याय करेगा,” क्योंकि उसके यहाँ एक-एक विषय और एक-एक काम का समय है। यह भी देखें: 2 कुरिन्थियों 5:10सभोपदेशक 12:14मत्ती 16:27मैंने मन में कहा, “यह इसलिए होता है कि परमेश्वर मनुष्यों को जाँचे और कि वे देख सके कि वे पशु-समान हैं।” यह भी देखें: स्तोत्र ग्रन्थ 73:22स्तोत्र ग्रन्थ 49:12इब्रानियों 9:27क्योंकि जैसी मनुष्यों की वैसी ही पशुओं की भी दशा होती है; दोनों की वही दशा होती है, जैसे एक मरता वैसे ही दूसरा भी मरता है। सभी की श्वास एक सी है, और मनुष्य पशु से कुछ बढ़कर नहीं; सब कुछ व्यर्थ ही है। यह भी देखें: स्तोत्र ग्रन्थ 49:12स्तोत्र ग्रन्थ 49:20अय्यूब 14:10-12सब एक स्थान में जाते हैं; सब मिट्टी से बने हैं, और सब मिट्टी में फिर मिल जाते हैं। यह भी देखें: उत्पत्ति 3:19अय्यूब 34:15सभोपदेशक 12:7क्या मनुष्य का प्राण ऊपर की ओर चढ़ता है और पशुओं का प्राण नीचे की ओर जाकर मिट्टी में मिल जाता है? यह कौन जानता है? यह भी देखें: सभोपदेशक 12:7योहन 14:32 कुरिन्थियों 5:1अतः मैंने यह देखा कि इससे अधिक कुछ अच्छा नहीं कि मनुष्य अपने कामों में आनन्दित रहे, क्योंकि उसका भाग यही है; कौन उसके पीछे होनेवाली बातों को देखने के लिये उसको लौटा लाएगा? यह भी देखें: सभोपदेशक 2:24सभोपदेशक 3:11-12सभोपदेशक 10:14

यह भी देखें: क्रॉस-संदर्भ OpenBible.info (CC BY) से, आंशिक रूप से Treasury of Scripture Knowledge (सार्वजनिक डोमेन) पर आधारित।

टिप्पणियाँ · हेडॉक (1859, सार्वजनिक डोमेन)13 टिप्पणियाँ

टिप्पणियाँ अंग्रेज़ी में फ़ा. जॉर्ज लियो हेडॉक की 19वीं सदी की काथलिक टीका, जैसी प्रकाशित हुई।

ये टिप्पणियाँ अपने समय के विवादों को बनाए रखती हैं: कुछ यहूदी लोगों या अन्य ख्रीस्तीयों के बारे में कठोरता से बोलती हैं। आज कलीसिया कुछ और सिखाती है: ख्रीस्त की मृत्यु के लिए यहूदी लोगों को दोषी नहीं ठहराया जा सकता (नोस्त्रा एताते 4; धर्मशिक्षा 597–598), और अन्य समुदायों के ख्रीस्तीय प्रभु में हमारे भाई-बहन हैं (उनितातिस रेदिन्तेग्रात्सियो 3)। ख्रीस्तीय एकता

सभोपदेशक 3:1

Ver. 1. Heaven, in this world, where alone things change. S. Jer. --- Nothing is here perpetual, but to be used in a proper manner. W. --- The heart must not be attached to any thing created. C.

--- Pleasure had been condemned and approved. C. 2. He shews that all must have its time. M.

↑ 1

सभोपदेशक 3:5

Ver. 5. Stones, with a sling, or to render a field useless. 4 K. iii. 25. Is. v. 2. ---

Embraces.

Countenance was sometimes prescribed for married people. Lev. xx. 18. and 1

Cor. vii. S. Jer.

S. Aug. Ench. 78. C. --- Hatred often succeeds love. v. 8. and 2 K. xiii. 14. H.

↑ 5

सभोपदेशक 3:9

Ver. 9. Labour? What advantage does he derive from any of these things? C. i.

3. C.

↑ 9

सभोपदेशक 3:11

Ver. 11. Consideration. Lit. "dispute." Heb. and Sept. "heart." H. --- Pagn. "He has implanted the desire of immortality in their hearts." --- End. If we could discover the properties of each thing, we should be in raptures; (C.) but as we cannot, this increases our vexation. M.

↑ 11

सभोपदेशक 3:12

Ver. 12. Well; virtuously: or, perhaps, as literally, to enjoy himself. v. 13. C. ---

Thus thinks the man of pleasure. Is. xxii. 31. S. Jer.

↑ 12

सभोपदेशक 3:13

Ver. 13. God. He gives peace and plenty; and still more, the grace to use these things, so as to obtain heaven. C.

↑ 13

सभोपदेशक 3:14

Ver. 14. Feared. The order of the seasons, &c. teaches men to adore Providence. S. Jer. --- He has arranged every thing, how mutable soever. S.

Aug. Conf. i. 6.

↑ 14

सभोपदेशक 3:15

Ver. 15. Past. He causes plants to spring forth afresh. Heb. Sept. &c. "But will God seek after the oppressed?" Here commences another objection. C.

↑ 15

सभोपदेशक 3:17

Ver. 17. And then. Prot. "for there is a time there (v. 1.) for every purpose, and for every work."

At the day of judgment all will receive their due. H.

↑ 17

सभोपदेशक 3:18

यह 19वीं सदी की टिप्पणी विवादात्मक भाषा का उपयोग करती है; इसे इस पैनल के शीर्ष पर दी गई टिप्पणी के प्रकाश में पढ़ें।

Ver. 18. Beasts. Another doubt; or suggestion of infidels. S. Greg. Dial. iv. 4.

↑ 18

सभोपदेशक 3:19

Ver. 19. Man hath nothing more, &c. viz. as to the life of the body. Ch.

↑ 19

सभोपदेशक 3:21

Ver. 21. Who knoweth, &c. viz. experimentally; since no one in this life can see a spirit. But as to the spirits of the beasts, which is merely animal, and becomes extinct by the death of the beast, who can tell the manner it acts so as to give life and motion, and by death to descend downward, that is, to be no more? Ch. --- Few are able to prove that the soul of man is immortal rather that that of beasts, since the bodies of both are subject to the like inconveniences.

The objection is answered C. xii. 7. C. --- The difficulty of answering is intimated by "Who?" &c. Ps. xiv. 1. M.

↑ 21

सभोपदेशक 3:22

Ver. 22. After him. He knows not who shall be his heir, or how soon he may die.

None returns from the other world to inform him of what is there transacted.

Thus the libertine encourages himself. C.

↑ 22

लाइसेंस: Notes by Fr. George Leo Haydock (1774–1849), from the Douay-Rheims Bible with Haydock's commentary (first ed. Thomas Haydock, Manchester/Dublin, 1811–1814; New York: Edward Dunigan & Brother, 1859); New Testament notes compiled with Fr. Benedict Rayment. Public domain. Digital text: "The Haydock Bible", Internet Archive (archive.org/details/TheHaydockBible), uploaded 2011 under the Public Domain Mark. · आभार और लाइसेंस

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