
नीतिवचन · IRV-HI
नीतिवचन
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बाइबल पाठकृत्रिम आवाज़ (AI)
हे मेरे पुत्र, मेरी शिक्षा को न भूलना; अपने हृदय में मेरी आज्ञाओं को रखे रहना; यह भी देखें: योहन 14:21-24नीतिवचन 4:5व्यवस्थाविवरण 6:6-9क्योंकि ऐसा करने से तेरी आयु बढ़ेगी, और तू अधिक कुशल से रहेगा। यह भी देखें: इफिसियों 6:1-3नीतिवचन 4:10स्तोत्र ग्रन्थ 91:16कृपा और सच्चाई तुझ से अलग न होने पाएँ; वरन् उनको अपने गले का हार बनाना, और अपनी हृदयरूपी पटिया पर लिखना। (2 कुरि. 3:3) यह भी देखें: नीतिवचन 7:32 कुरिन्थियों 3:3इब्रानियों 10:16तब तू परमेश्वर और मनुष्य दोनों का अनुग्रह पाएगा, तू अति प्रतिष्ठित होगा। (लूका 2:52, रोम. 12:17, 2 कुरि. 8:21) यह भी देखें: लूकस 2:521 शमूएल 2:26रोमियों 14:18तू अपनी समझ का सहारा न लेना, वरन् सम्पूर्ण मन से यहोवा पर भरोसा रखना। यह भी देखें: स्तोत्र ग्रन्थ 37:5यिर्मयाह 17:7-8नीतिवचन 28:26उसी को स्मरण करके सब काम करना, तब वह तेरे लिये सीधा मार्ग निकालेगा। यह भी देखें: नीतिवचन 16:3स्तोत्र ग्रन्थ 32:8फिलिप्पियों 4:6अपनी दृष्टि में बुद्धिमान न होना; यहोवा का भय मानना, और बुराई से अलग रहना। (रोम. 12:16) यह भी देखें: अय्यूब 28:28रोमियों 12:16नीतिवचन 26:12ऐसा करने से तेरा शरीर भला चंगा, और तेरी हड्डियाँ पुष्ट रहेंगी। यह भी देखें: नीतिवचन 4:22स्तोत्र ग्रन्थ 147:3नीतिवचन 16:24अपनी सम्पत्ति के द्वारा और अपनी भूमि की सारी पहली उपज देकर यहोवा की प्रतिष्ठा करना; यह भी देखें: व्यवस्थाविवरण 26:2-151 कुरिन्थियों 16:2निर्गमन 23:19इस प्रकार तेरे खत्ते भरे और पूरे रहेंगे, और तेरे रसकुण्डों से नया दाखमधु उमड़ता रहेगा। यह भी देखें: नीतिवचन 19:17व्यवस्थाविवरण 28:8नीतिवचन 11:24-25हे मेरे पुत्र, यहोवा की शिक्षा से मुँह न मोड़ना, और जब वह तुझे डाँटे, तब तू बुरा न मानना, यह भी देखें: अय्यूब 5:17प्रकाशितवाक्य 3:19इब्रानियों 12:5-12जैसे पिता अपने प्रिय पुत्र को डाँटता है, वैसे ही यहोवा जिससे प्रेम रखता है उसको डाँटता है। (इफि. 6:4, इब्रा. 12:5-7) यह भी देखें: व्यवस्थाविवरण 8:5प्रकाशितवाक्य 3:19नीतिवचन 29:17क्या ही धन्य है वह मनुष्य जो बुद्धि पाए, और वह मनुष्य जो समझ प्राप्त करे, यह भी देखें: नीतिवचन 8:32-35नीतिवचन 4:5-9सभोपदेशक 9:15-18जो उपलब्धि बुद्धि से प्राप्त होती है, वह चाँदी की प्राप्ति से बड़ी, और उसका लाभ शुद्ध सोने के लाभ से भी उत्तम है। यह भी देखें: नीतिवचन 8:10-11नीतिवचन 16:16नीतिवचन 8:19वह बहुमूल्य रत्नों से अधिक मूल्यवान है, और जितनी वस्तुओं की तू लालसा करता है, उनमें से कोई भी उसके तुल्य न ठहरेगी। यह भी देखें: नीतिवचन 8:11स्तोत्र ग्रन्थ 73:25-26नीतिवचन 31:10उसके दाहिने हाथ में दीर्घायु, और उसके बाएँ हाथ में धन और महिमा हैं। यह भी देखें: नीतिवचन 3:22 कुरिन्थियों 6:10नीतिवचन 22:4उसके मार्ग आनन्ददायक हैं, और उसके सब मार्ग कुशल के हैं। यह भी देखें: लूकस 1:79यशायाह 26:3फिलिप्पियों 4:8-9जो बुद्धि को ग्रहण कर लेते हैं, उनके लिये वह जीवन का वृक्ष बनती है; और जो उसको पकड़े रहते हैं, वह धन्य हैं। यह भी देखें: नीतिवचन 11:30नीतिवचन 15:4प्रकाशितवाक्य 2:7यहोवा ने पृथ्वी की नींव बुद्धि ही से डाली; और स्वर्ग को समझ ही के द्वारा स्थिर किया। यह भी देखें: स्तोत्र ग्रन्थ 104:24यिर्मयाह 10:12योहन 1:3उसी के ज्ञान के द्वारा गहरे सागर फूट निकले, और आकाशमण्डल से ओस टपकती है। यह भी देखें: उत्पत्ति 7:11स्तोत्र ग्रन्थ 65:9-12अय्यूब 36:27-28हे मेरे पुत्र, ये बातें तेरी दृष्टि की ओट न होने पाए; तू खरी बुद्धि और विवेक की रक्षा कर, यह भी देखें: यहोशू 1:8व्यवस्थाविवरण 6:6-9व्यवस्थाविवरण 32:46-47तब इनसे तुझे जीवन मिलेगा, और ये तेरे गले का हार बनेंगे। यह भी देखें: नीतिवचन 4:22नीतिवचन 1:9यशायाह 38:16तब तू अपने मार्ग पर निडर चलेगा, और तेरे पाँव में ठेस न लगेगी। यह भी देखें: नीतिवचन 10:9नीतिवचन 4:12स्तोत्र ग्रन्थ 91:11-12जब तू लेटेगा, तब भय न खाएगा, जब तू लेटेगा, तब सुख की नींद आएगी। यह भी देखें: स्तोत्र ग्रन्थ 4:8स्तोत्र ग्रन्थ 3:5नीतिवचन 6:22अचानक आनेवाले भय से न डरना, और जब दुष्टों पर विपत्ति आ पड़े, तब न घबराना; यह भी देखें: यशायाह 41:10-14स्तोत्र ग्रन्थ 112:71 पतरस 3:14क्योंकि यहोवा तुझे सहारा दिया करेगा, और तेरे पाँव को फंदे में फँसने न देगा। यह भी देखें: स्तोत्र ग्रन्थ 91:3नीतिवचन 14:261 शमूएल 2:9जो भलाई के योग्य है उनका भला अवश्य करना, यदि ऐसा करना तेरी शक्ति में है। यह भी देखें: गलातियों 6:10याकूब 2:15-16रोमियों 13:7यदि तेरे पास देने को कुछ हो, तो अपने पड़ोसी से न कहना कि जा कल फिर आना, कल मैं तुझे दूँगा। (2 कुरि. 8:12) यह भी देखें: लैव्यव्यवस्था 19:13व्यवस्थाविवरण 24:12-152 कुरिन्थियों 8:11जब तेरा पड़ोसी तेरे पास निश्चिन्त रहता है, तब उसके विरुद्ध बुरी युक्ति न बाँधना। यह भी देखें: नीतिवचन 6:14स्तोत्र ग्रन्थ 55:20स्तोत्र ग्रन्थ 59:3जिस मनुष्य ने तुझ से बुरा व्यवहार न किया हो, उससे अकारण मुकद्दमा खड़ा न करना। यह भी देखें: 2 तीमुथियुस 2:24नीतिवचन 29:22रोमियों 12:18-21उपद्रवी पुरुष के विषय में डाह न करना, न उसकी सी चाल चलना; यह भी देखें: नीतिवचन 24:1स्तोत्र ग्रन्थ 37:1गलातियों 5:21क्योंकि यहोवा कुटिल मनुष्य से घृणा करता है, परन्तु वह अपना भेद सीधे लोगों पर प्रगट करता है। यह भी देखें: स्तोत्र ग्रन्थ 25:14नीतिवचन 11:20नीतिवचन 17:15दुष्ट के घर पर यहोवा का श्राप और धर्मियों के वासस्थान पर उसकी आशीष होती है। यह भी देखें: स्तोत्र ग्रन्थ 37:22लैव्यव्यवस्था 26:14-46अय्यूब 8:6-7ठट्ठा करनेवालों का वह निश्चय ठट्ठा करता है; परन्तु दीनों पर अनुग्रह करता है। (याकू. 4:6, 1 पत. 5:5) यह भी देखें: याकूब 4:61 पतरस 5:5स्तोत्र ग्रन्थ 138:6बुद्धिमान महिमा को पाएँगे, परन्तु मूर्खों की बढ़ती अपमान ही की होगी। यह भी देखें: स्तोत्र ग्रन्थ 132:18यशायाह 65:13-151 शमूएल 2:30
यह भी देखें: क्रॉस-संदर्भ OpenBible.info (CC BY) से, आंशिक रूप से Treasury of Scripture Knowledge (सार्वजनिक डोमेन) पर आधारित।
मनन
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टिप्पणियाँ · हेडॉक (1859, सार्वजनिक डोमेन)22 टिप्पणियाँ
टिप्पणियाँ अंग्रेज़ी में फ़ा. जॉर्ज लियो हेडॉक की 19वीं सदी की काथलिक टीका, जैसी प्रकाशित हुई।
ये टिप्पणियाँ अपने समय के विवादों को बनाए रखती हैं: कुछ यहूदी लोगों या अन्य ख्रीस्तीयों के बारे में कठोरता से बोलती हैं। आज कलीसिया कुछ और सिखाती है: ख्रीस्त की मृत्यु के लिए यहूदी लोगों को दोषी नहीं ठहराया जा सकता (नोस्त्रा एताते 4; धर्मशिक्षा 597–598), और अन्य समुदायों के ख्रीस्तीय प्रभु में हमारे भाई-बहन हैं (उनितातिस रेदिन्तेग्रात्सियो 3)। ख्रीस्तीय एकता
नीतिवचन 3:1
Ver. 1. My son. God speaks, or the master instructs his disciple. v. 21. C. --- We must remember and love instruction, and reduce it to practice. W.
↑ 1नीतिवचन 3:2
Ver. 2. Peace. These prefigured more substantial blessings. C.
↑ 2नीतिवचन 3:3
Ver. 3. Truth. Be kind and faithful to all. Gen. xxiv. 27. Ps. xxiv. 10.
↑ 3नीतिवचन 3:4
Ver. 4. Good. Sept. "forecast good before the Lord and men." S. Paul seems to allude to this version, Rom. xii. 17. and 2 Cor. viii. 22. H.
↑ 4नीतिवचन 3:5
Ver. 5. All. God will have nothing by halves. --- Lean not. By pride. 2 Cor. xii. 13.
All must be referred to God. C. --- In him we may safely trust. W.
↑ 5नीतिवचन 3:8
Ver. 8. Bones. Thou shalt enjoy perfect health.
↑ 8नीतिवचन 3:9
Ver. 9. Fruits. Sept. add, "of justice;" to intimate that no presents will be acceptable, which have been unjustly acquired.
↑ 9नीतिवचन 3:11
Ver. 11. Him. Correction is rather a proof of love than of anger. Ps. iii. 19. C. ---
God thus shews that he approves of his servants; and therefore his other promises, which seem of a temporal nature, must be understood with reference to the next life. W.
↑ 11नीतिवचन 3:12
Ver. 12. And as. Sept. "but he scourgeth every son whom he receiveth," as S.
Paul quotes this passage. Heb. xii. 6. The verb is now wanting in Heb. or ceab;
"as a father" may signify
" scourgeth, in piel, (M.) with i prefixed. C.
↑ 12नीतिवचन 3:15
Ver. 15. Riches. Heb. peninim, (H.) "pearls." Job xxviii. 18. C.
↑ 15नीतिवचन 3:16
Ver. 16. Glory. Her hands are full, and she grants favours with profusion, (H.) as with both hands, promising eternal life. W.
↑ 16नीतिवचन 3:18
Ver. 18. Life. Like that planted in paradise. Gen. ii. 9.
↑ 18नीतिवचन 3:19
Ver. 19. Wisdom. Hitherto he had spoken of that virtue. Now he treats of the uncreated wisdom, (C.) which is God the Son. M. Jans. S. Greg. Mor. xii. 4.
↑ 19नीतिवचन 3:20
Ver. 20. Out. The higher and lower waters being divided, (C.) or the channels formed to receive the waters. Piscat. --- It may also speak of the deluge. Ven.
Bede.--- With. Heb. "have distilled dew." This is so copious, as to resemble rain in Palestine. Judg. vi. 37. and 2 K. xvii. 12.
↑ 20नीतिवचन 3:22
Ver. 22. Mouth. There have been wise and virtuous men afflicted, v. 11. But they have borne all with patience, and have merited a more glorious reward than what this earth could afford. C.
↑ 22नीतिवचन 3:27
Ver. 27. Able. Prot. "withhold not good from them to whom it is due, when it is in the power of thine hand to do it." Relieve the distressed. H. --- They have a title to that wealth, since those who possess it are bound to relieve the indigent. C. --- Sept. "refrain not from doing good," &c.
H.
↑ 27नीतिवचन 3:28
Ver. 28. Present. Alms in season are doubly valuable. W. --- Antigonus acquired the title of Doson, "about to give," as he never gave, (Plutarch) but only promised.
↑ 28नीतिवचन 3:30
Ver. 30. Cause. We may defend ourselves; but herein great discretion is necessary. C. --- Cum pari contendere anceps est: cum superiore furiosum; cum inferiore sordidum. Senec. Prov.
↑ 30नीतिवचन 3:31
Ver. 31. Ways. Of injustice. Seek not to attain his prosperity by the same means. C.
↑ 31नीतिवचन 3:33
Ver. 33. Want. Heb. "a curse." --- Shall be. Heb. "he blesseth." H.
↑ 33नीतिवचन 3:34
Ver. 34. Scorners. Lit. "he will delude the scorners." H. --- He will treat them as they would treat others. Ps. xvii. 27. C. --- Sept. "the Lord resisteth the proud,"
&c. So the apostles quote this passage. 1 Pet. v. 5. Jam. iv. 6. H.
↑ 34नीतिवचन 3:35
Ver. 35. Disgrace. They are seen by more, and their fall is more dangerous. C.
--- "A fool extols what is ignominious." Pagn. H.
↑ 35लाइसेंस: Notes by Fr. George Leo Haydock (1774–1849), from the Douay-Rheims Bible with Haydock's commentary (first ed. Thomas Haydock, Manchester/Dublin, 1811–1814; New York: Edward Dunigan & Brother, 1859); New Testament notes compiled with Fr. Benedict Rayment. Public domain. Digital text: "The Haydock Bible", Internet Archive (archive.org/details/TheHaydockBible), uploaded 2011 under the Public Domain Mark. · आभार और लाइसेंस