
लैव्यव्यवस्था · IRV-HI
लैव्यव्यवस्था
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बाइबल पाठकृत्रिम आवाज़ (AI)
फिर यहोवा ने मूसा से कहा, “इस्राएलियों से यह कह कि यदि कोई मनुष्य उन कामों में से जिनको यहोवा ने मना किया है, किसी काम को भूल से करके पापी हो जाए; यह भी देखें: स्तोत्र ग्रन्थ 19:12लैव्यव्यवस्था 4:27इब्रानियों 9:7और यदि अभिषिक्त याजक ऐसा पाप करे, जिससे प्रजा दोषी ठहरे, तो अपने पाप के कारण वह एक निर्दोष बछड़ा यहोवा को पापबलि करके चढ़ाए। यह भी देखें: लैव्यव्यवस्था 9:2इब्रानियों 7:27-28लैव्यव्यवस्था 4:14वह उस बछड़े को मिलापवाले तम्बू के द्वार पर यहोवा के आगे ले जाकर उसके सिर पर हाथ रखे, और उस बछड़े को यहोवा के सामने बलि करे। यह भी देखें: लैव्यव्यवस्था 1:3-4लैव्यव्यवस्था 16:21यशायाह 53:6और अभिषिक्त याजक बछड़े के लहू में से कुछ लेकर मिलापवाले तम्बू में ले जाए; यह भी देखें: लैव्यव्यवस्था 16:14गिनती 19:4लैव्यव्यवस्था 4:16-17और याजक अपनी उँगली लहू में डुबो-डुबोकर और उसमें से कुछ लेकर पवित्रस्थान के बीचवाले पर्दे के आगे यहोवा के सामने सात बार छिड़के। यह भी देखें: लैव्यव्यवस्था 26:18लैव्यव्यवस्था 14:18लैव्यव्यवस्था 16:19और याजक उस लहू में से कुछ और लेकर सुगन्धित धूप की वेदी के सींगों पर जो मिलापवाले तम्बू में है यहोवा के सामने लगाए; फिर बछड़े के सब लहू को वेदी के पाए पर होमबलि की वेदी जो मिलापवाले तम्बू के द्वार पर है उण्डेल दे। यह भी देखें: लैव्यव्यवस्था 8:15लैव्यव्यवस्था 9:9लैव्यव्यवस्था 5:9फिर वह पापबलि के बछड़े की सब चर्बी को उससे अलग करे, अर्थात् जिस चर्बी से अंतड़ियाँ ढपी रहती हैं, और जितनी चर्बी उनमें लिपटी रहती है, यह भी देखें: लैव्यव्यवस्था 4:26लैव्यव्यवस्था 3:3-5यशायाह 53:10और दोनों गुर्दे और उनके ऊपर की चर्बी जो कमर के पास रहती है, और गुर्दों समेत कलेजे के ऊपर की झिल्ली, इन सभी को वह ऐसे अलग करे, यह भी देखें: लैव्यव्यवस्था 3:4जैसे मेलबलिवाले चढ़ावे के बछड़े से अलग किए जाते हैं, और याजक इनको होमबलि की वेदी पर जलाए। परन्तु उस बछड़े की खाल, पाँव, सिर, अंतड़ियाँ, गोबर, यह भी देखें: गिनती 19:5निर्गमन 29:14लैव्यव्यवस्था 8:14-17और सारा माँस, अर्थात् समूचा बछड़ा छावनी से बाहर शुद्ध स्थान में, जहाँ राख डाली जाएगी, ले जाकर लकड़ी पर रखकर आग से जलाए; जहाँ राख डाली जाती है वह वहीं जलाया जाए। यह भी देखें: इब्रानियों 13:11लैव्यव्यवस्था 6:10-11निर्गमन 29:14“यदि इस्राएल की सारी मण्डली अज्ञानता के कारण पाप करे और वह बात मण्डली की आँखों से छिपी हो, और वे यहोवा की किसी आज्ञा के विरुद्ध कुछ करके दोषी ठहरे हों; यह भी देखें: लैव्यव्यवस्था 5:17लैव्यव्यवस्था 5:2-5यहोशू 7:11तो जब उनका किया हुआ पाप प्रगट हो जाए तब मण्डली एक बछड़े को पापबलि करके चढ़ाए। वह उसे मिलापवाले तम्बू के आगे ले जाए, यह भी देखें: लैव्यव्यवस्था 4:3लैव्यव्यवस्था 4:23लैव्यव्यवस्था 4:28और मण्डली के वृद्ध लोग अपने-अपने हाथों को यहोवा के आगे बछड़े के सिर पर रखें, और वह बछड़ा यहोवा के सामने बलि किया जाए। यह भी देखें: लैव्यव्यवस्था 1:4लैव्यव्यवस्था 16:21व्यवस्थाविवरण 21:3-9तब अभिषिक्त याजक बछड़े के लहू में से कुछ मिलापवाले तम्बू में ले जाए; यह भी देखें: लैव्यव्यवस्था 4:5-12इब्रानियों 9:12-14और याजक अपनी उँगली लहू में डुबो-डुबोकर उसे बीचवाले पर्दे के आगे सात बार यहोवा के सामने छिड़के। यह भी देखें: लैव्यव्यवस्था 4:6-7और उसी लहू में से वेदी के सींगों पर जो यहोवा के आगे मिलापवाले तम्बू में है लगाए; और बचा हुआ सब लहू होमबलि की वेदी के पाए पर जो मिलापवाले तम्बू के द्वार पर है उण्डेल दे। यह भी देखें: लैव्यव्यवस्था 4:7और वह बछड़े की कुल चर्बी निकालकर वेदी पर जलाए। यह भी देखें: लैव्यव्यवस्था 4:35लैव्यव्यवस्था 12:8लैव्यव्यवस्था 6:7जैसे पापबलि के बछड़े से किया था वैसे ही इससे भी करे; इस भाँति याजक इस्राएलियों के लिये प्रायश्चित करे, तब उनका पाप क्षमा किया जाएगा। यह भी देखें: गिनती 15:25लैव्यव्यवस्था 12:8इब्रानियों 10:10-12और वह बछड़े को छावनी से बाहर ले जाकर उसी भाँति जलाए जैसे पहले बछड़े को जलाया था; यह तो मण्डली के निमित्त पापबलि ठहरेगा। यह भी देखें: लैव्यव्यवस्था 16:15मत्ती 20:281 तीमुथियुस 2:5-6“जब कोई प्रधान पुरुष पाप करके, अर्थात् अपने परमेश्वर यहोवा कि किसी आज्ञा के विरुद्ध भूल से कुछ करके दोषी हो जाए, यह भी देखें: लैव्यव्यवस्था 4:2लैव्यव्यवस्था 4:132 शमूएल 21:1-3और उसका पाप उस पर प्रगट हो जाए, तो वह एक निर्दोष बकरा बलिदान करने के लिये ले आए; यह भी देखें: लैव्यव्यवस्था 4:14रोमियों 8:3लैव्यव्यवस्था 5:4और बकरे के सिर पर अपना हाथ रखे, और बकरे को उस स्थान पर बलि करे जहाँ होमबलि पशु यहोवा के आगे बलि किए जाते हैं; यह पापबलि ठहरेगा। यह भी देखें: लैव्यव्यवस्था 3:2यशायाह 53:6लैव्यव्यवस्था 1:11तब याजक अपनी उँगली से पापबलि पशु के लहू में से कुछ लेकर होमबलि की वेदी के सींगों पर लगाए, और उसका लहू होमबलि की वेदी के पाए पर उण्डेल दे। यह भी देखें: लैव्यव्यवस्था 4:18लैव्यव्यवस्था 4:34लैव्यव्यवस्था 4:7और वह उसकी कुल चर्बी को मेलबलि की चर्बी के समान वेदी पर जलाए; और याजक उसके पाप के विषय में प्रायश्चित करे, तब वह क्षमा किया जाएगा। यह भी देखें: लैव्यव्यवस्था 4:20गिनती 15:28लैव्यव्यवस्था 3:5“यदि साधारण लोगों में से कोई अज्ञानता से पाप करे, अर्थात् कोई ऐसा काम जिसे यहोवा ने मना किया हो करके दोषी हो, और उसका वह पाप उस पर प्रगट हो जाए, यह भी देखें: लैव्यव्यवस्था 4:2गिनती 15:27लैव्यव्यवस्था 4:13तो वह उस पाप के कारण एक निर्दोष बकरी बलिदान के लिये ले आए; यह भी देखें: लैव्यव्यवस्था 4:23लैव्यव्यवस्था 4:32लैव्यव्यवस्था 4:3और वह अपना हाथ पापबलि पशु के सिर पर रखे, और होमबलि के स्थान पर पापबलि पशु का बलिदान करे। यह भी देखें: लैव्यव्यवस्था 4:24लैव्यव्यवस्था 4:4लैव्यव्यवस्था 1:4और याजक उसके लहू में से अपनी उँगली से कुछ लेकर होमबलि की वेदी के सींगों पर लगाए, और उसके सब लहू को उसी वेदी के पाए पर उण्डेल दे। यह भी देखें: लैव्यव्यवस्था 4:7लैव्यव्यवस्था 4:25लैव्यव्यवस्था 4:34और वह उसकी सब चर्बी को मेलबलि पशु की चर्बी के समान अलग करे, तब याजक उसको वेदी पर यहोवा के निमित्त सुखदायक सुगन्ध के लिये जलाए; और इस प्रकार याजक उसके लिये प्रायश्चित करे, तब उसे क्षमा मिलेगी। यह भी देखें: लैव्यव्यवस्था 4:26लैव्यव्यवस्था 4:35उत्पत्ति 8:21“यदि वह पापबलि के लिये एक मेम्ना ले आए, तो वह निर्दोष मादा हो, यह भी देखें: लैव्यव्यवस्था 4:281 पतरस 2:221 पतरस 3:18और वह अपना हाथ पापबलि पशु के सिर पर रखे, और उसको पापबलि के लिये वहीं बलिदान करे जहाँ होमबलि पशुबलि किया जाता है। यह भी देखें: लैव्यव्यवस्था 4:29-31लैव्यव्यवस्था 4:4तब याजक अपनी उँगली से पापबलि के लहू में से कुछ लेकर होमबलि की वेदी के सींगों पर लगाए, और उसके सब लहू को वेदी के पाए पर उण्डेल दे। यह भी देखें: लैव्यव्यवस्था 4:30लैव्यव्यवस्था 4:25लैव्यव्यवस्था 4:7और वह उसकी सब चर्बी को मेलबलिवाले मेम्ने की चर्बी के समान अलग करे, और याजक उसे वेदी पर यहोवा के हवनों के ऊपर जलाए; और इस प्रकार याजक उसके पाप के लिये प्रायश्चित करे, और वह क्षमा किया जाएगा। यह भी देखें: लैव्यव्यवस्था 4:26लैव्यव्यवस्था 4:30-31लैव्यव्यवस्था 4:20
यह भी देखें: क्रॉस-संदर्भ OpenBible.info (CC BY) से, आंशिक रूप से Treasury of Scripture Knowledge (सार्वजनिक डोमेन) पर आधारित।
मनन
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टिप्पणियाँ · हेडॉक (1859, सार्वजनिक डोमेन)13 टिप्पणियाँ
टिप्पणियाँ अंग्रेज़ी में फ़ा. जॉर्ज लियो हेडॉक की 19वीं सदी की काथलिक टीका, जैसी प्रकाशित हुई।
ये टिप्पणियाँ अपने समय के विवादों को बनाए रखती हैं: कुछ यहूदी लोगों या अन्य ख्रीस्तीयों के बारे में कठोरता से बोलती हैं। आज कलीसिया कुछ और सिखाती है: ख्रीस्त की मृत्यु के लिए यहूदी लोगों को दोषी नहीं ठहराया जा सकता (नोस्त्रा एताते 4; धर्मशिक्षा 597–598), और अन्य समुदायों के ख्रीस्तीय प्रभु में हमारे भाई-बहन हैं (उनितातिस रेदिन्तेग्रात्सियो 3)। ख्रीस्तीय एकता
लैव्यव्यवस्था 4:2
Ver. 2. Ignorance. To be ignorant of what we are bound to know is sinful: and for such culpable ignorance, these sacrifices, prescribed in this and the following chapter, were appointed. Ch. ---
Not to be done. Hence the Rabbins admit sins of ignorance, only against the negative precepts.
But when God forbids one thing, he commands the contrary; and we may sin by ignorance against any of his ordinances. If the ignorance be voluntary, it enhances the crime; and Aristotle well observes that drunkards, who do an injury, are to be doubly punished, because their fault is voluntary in its cause, (ad Nicom. iii. 7). But if the ignorance were perfectly involuntary, and inculpable, no sacrifice was required; so that God here speaks only of that sort of ignorance which involved some degree of negligence. This fault could not be forgiven without interior good dispositions. The sacrifice only reached to the cleansing of the flesh, (Heb. ix. 13,) or to screen the culprit from the severity of the law and of the magistrates; (C.) though they might help the inward dispositions of the heart, and thus contribute to obtain God's pardon.
Orig. S. Aug. q.
20. The difference between peccatum and delictum, is not perfectly ascertained. Some think the former word denotes sins of malice, and the latter those of ignorance. Tirinus maintains the contrary, as a more costly sacrifice, he says, is required for the latter. H.
↑ 2लैव्यव्यवस्था 4:3
Ver. 3. Anointed. That is, "the high priest." Sept. Inferior priests were not anointed, except the sons of Aaron, at the beginning. C. --- Ignorance in such a one is greatly to be avoided, as it tends to scandalize the people. H. --- The same ceremonies are prescribed, as on the day of expiation; only the priest did not enter the most holy place. --- Offend, in some smaller matter. If he engaged his brethren in the crime of idolatry, he should die. Deut. xiii. 15. C. ---
Before the solemn unction, he might be expiated, like one of the princes. M.
↑ 3लैव्यव्यवस्था 4:3
Ver. 3. Calf. Heb. par, does not specify the age. C.
↑ 3लैव्यव्यवस्था 4:5
Ver. 5. The blood. As the figure of the blood of Christ shed for the remission of our sins; and carried by him into the sanctuary of heaven.
↑ 5लैव्यव्यवस्था 4:6
Ver. 6. Seven. A number consecrated in Scripture, (C.) and not superstitious.
W. --- Apuleius (Met. xi.) mentions it. Septies submerso fluctibus capite. C. ---
Sanctuary, or most holy place.
M.
↑ 6लैव्यव्यवस्था 4:12
Ver. 12. Ashes of the victims. They were first laid beside the altar of holocausts. By this ceremony, the priest begged that his sins might be removed from the sight of God, (M.) by virtue of Christ's sacrifice, who suffered out of the gate of Jerusalem. Heb. xiii. 13. The high priest was obliged to offer this sacrifice himself, to expiate his own sin, as well as that of the people. Heb.
ix. 7.
↑ 12लैव्यव्यवस्था 4:13
Ver. 13. Multitude assembled. Sept. add, "be involuntarily ignorant, and no one of the congregation perceive the truth, ( or word,) and shall transgress, by commission or omission, one of all the precepts of the Lord." Such was the offence of Saul and the people. 1 K. xiv. 33. On these occasions, the elders were to put their hands on the victim, to acknowledge the general offence, if it were not of too heinous a nature to be expiated by sacrifice. See Deut. xiii. 12.
↑ 13लैव्यव्यवस्था 4:22
Ver. 22. A prince. King, magistrate, general, chief of a tribe, or great family; in a word, one elevated above the rest ( Nasi); as appears, Num. i. 4. vii. 2.
↑ 22लैव्यव्यवस्था 4:24
Ver. 24. He. Sam. and Sept. read, "they shall have," referring it to the priests.
↑ 24लैव्यव्यवस्था 4:26
Ver. 26. Him. Moses does not here specify what was to be done with the flesh.
But (C. vi. 26,) he commands it to be given to the priests. C. --- In the sacrifices for the sins of the multitude, or of the priest, all was consumed; to express a greater detestation of such offences, (T.) and that the priests might derive no benefit from them. Theod. q. 3. S. Tho. i. 2. q. 102. a. 3. W. --- Those who offered these victims received no part of them again, nor were oil or incense used; as all delicacies must be rejected by penitents. T.
↑ 26लैव्यव्यवस्था 4:27
Ver. 27. The land. A rustic or plebeian. M. --- The offences of such might be expiated by the sacrifice of a goat, ewe, lamb, ram, two pigeons, or flour. C. v.
7. xi. 15. C.
↑ 27लैव्यव्यवस्था 4:29
Ver. 29. Of, &c. One Heb. MS. the Sept. and Syriac read, "in the place in which he shall slay the holocaust." The Sam. has they slay, both here and v. 24. and 33, which seems the truer reading.
Kennicott.
↑ 29लैव्यव्यवस्था 4:35
Ver. 35. For a. Heb. may be "according to, like (H.) upon, besides, after the holocausts." C. See C. iii. 5.
↑ 35लाइसेंस: Notes by Fr. George Leo Haydock (1774–1849), from the Douay-Rheims Bible with Haydock's commentary (first ed. Thomas Haydock, Manchester/Dublin, 1811–1814; New York: Edward Dunigan & Brother, 1859); New Testament notes compiled with Fr. Benedict Rayment. Public domain. Digital text: "The Haydock Bible", Internet Archive (archive.org/details/TheHaydockBible), uploaded 2011 under the Public Domain Mark. · आभार और लाइसेंस