
निर्गमन · IRV-HI
निर्गमन
29
बाइबल पाठकृत्रिम आवाज़ (AI)
“उन्हें पवित्र करने को जो काम तुझे उनसे करना है कि वे मेरे लिये याजक का काम करें वह यह है: एक निर्दोष बछड़ा और दो निर्दोष मेढ़े लेना, यह भी देखें: 1 पतरस 1:19लैव्यव्यवस्था 5:15-16निर्गमन 29:21और अख़मीरी रोटी, और तेल से सने हुए मैदे के अख़मीरी फुलके, और तेल से चुपड़ी हुई अख़मीरी पपड़ियाँ भी लेना। ये सब गेहूँ के मैदे के बनवाना। यह भी देखें: गिनती 6:15लैव्यव्यवस्था 7:10निर्गमन 12:8इनको एक टोकरी में रखकर उस टोकरी को उस बछड़े और उन दोनों मेढ़ों समेत समीप ले आना। यह भी देखें: लैव्यव्यवस्था 8:2लैव्यव्यवस्था 8:31लैव्यव्यवस्था 8:26फिर हारून और उसके पुत्रों को मिलापवाले तम्बू के द्वार के समीप ले आकर जल से नहलाना। यह भी देखें: निर्गमन 40:12इब्रानियों 10:22लैव्यव्यवस्था 14:8तब उन वस्त्रों को लेकर हारून को अंगरखा और एपोद का बागा पहनाना, और एपोद और चपरास बाँधना, और एपोद का काढ़ा हुआ पटुका भी बाँधना; यह भी देखें: लैव्यव्यवस्था 8:7-8निर्गमन 28:2-8और उसके सिर पर पगड़ी को रखना, और पगड़ी पर पवित्र मुकुट को रखना। यह भी देखें: लैव्यव्यवस्था 8:9निर्गमन 28:36-39तब अभिषेक का तेल ले उसके सिर पर डालकर उसका अभिषेक करना। यह भी देखें: लैव्यव्यवस्था 21:10गिनती 35:25निर्गमन 28:41फिर उसके पुत्रों को समीप ले आकर उनको अंगरखे पहनाना, यह भी देखें: लैव्यव्यवस्था 8:13निर्गमन 28:40और उसके अर्थात् हारून और उसके पुत्रों के कमर बाँधना और उनके सिर पर टोपियाँ रखना; जिससे याजक के पद पर सदा उनका हक़ रहे। इसी प्रकार हारून और उसके पुत्रों का संस्कार करना। यह भी देखें: गिनती 18:7लैव्यव्यवस्था 8:22-28व्यवस्थाविवरण 18:5“तब बछड़े को मिलापवाले तम्बू के सामने समीप ले आना। और हारून और उसके पुत्र बछड़े के सिर पर अपने-अपने हाथ रखें, यह भी देखें: लैव्यव्यवस्था 1:4लैव्यव्यवस्था 8:14निर्गमन 29:15तब उस बछड़े को यहोवा के सम्मुख मिलापवाले तम्बू के द्वार पर बलिदान करना, यह भी देखें: लैव्यव्यवस्था 8:15निर्गमन 29:4लैव्यव्यवस्था 9:12और बछड़े के लहू में से कुछ लेकर अपनी उँगली से वेदी के सींगों पर लगाना, और शेष सब लहू को वेदी के पाए पर उण्डेल देना, यह भी देखें: निर्गमन 27:2लैव्यव्यवस्था 8:15लैव्यव्यवस्था 9:9और जिस चर्बी से अंतड़ियाँ ढपी रहती हैं, और जो झिल्ली कलेजे के ऊपर होती है, उनको और दोनों गुर्दों को उनके ऊपर की चर्बी समेत लेकर सब को वेदी पर जलाना। यह भी देखें: लैव्यव्यवस्था 3:3-41 शमूएल 2:16लैव्यव्यवस्था 8:16परन्तु बछड़े का माँस, और खाल, और गोबर, छावनी से बाहर आग में जला देना; क्योंकि यह पापबलि होगा। यह भी देखें: लैव्यव्यवस्था 4:11-12लैव्यव्यवस्था 4:21इब्रानियों 13:11-13“फिर एक मेढ़ा लेना, और हारून और उसके पुत्र उसके सिर पर अपने-अपने हाथ रखें, यह भी देखें: निर्गमन 29:19निर्गमन 29:10निर्गमन 29:3तब उस मेढ़े को बलि करना, और उसका लहू लेकर वेदी पर चारों ओर छिड़कना। यह भी देखें: निर्गमन 29:11-12और उस मेढ़े को टुकड़े-टुकड़े काटना, और उसकी अंतड़ियों और पैरों को धोकर उसके टुकड़ों और सिर के ऊपर रखना, यह भी देखें: लैव्यव्यवस्था 9:14यिर्मयाह 4:14लैव्यव्यवस्था 8:21तब उस पूरे मेढ़े को वेदी पर जलाना; वह तो यहोवा के लिये होमबलि होगा; वह सुखदायक सुगन्ध और यहोवा के लिये हवन होगा। यह भी देखें: उत्पत्ति 8:21निर्गमन 29:25यिर्मयाह 6:20“फिर दूसरे मेढ़े को लेना; और हारून और उसके पुत्र उसके सिर पर अपने-अपने हाथ रखें, यह भी देखें: निर्गमन 29:3लैव्यव्यवस्था 8:22-29तब उस मेढ़े को बलि करना, और उसके लहू में से कुछ लेकर हारून और उसके पुत्रों के दाहिने कान के सिरे पर, और उनके दाहिने हाथ और दाहिने पाँव के अँगूठों पर लगाना, और लहू को वेदी पर चारों ओर छिड़क देना। यह भी देखें: यशायाह 50:5इब्रानियों 10:221 पतरस 1:2फिर वेदी पर के लहू, और अभिषेक के तेल, इन दोनों में से कुछ कुछ लेकर हारून और उसके वस्त्रों पर, और उसके पुत्रों और उनके वस्त्रों पर भी छिड़क देना; तब वह अपने वस्त्रों समेत और उसके पुत्र भी अपने-अपने वस्त्रों समेत पवित्र हो जाएँगे। यह भी देखें: इब्रानियों 9:22लैव्यव्यवस्था 8:30निर्गमन 29:7तब मेढ़े को संस्कारवाला जानकर उसमें से चर्बी और मोटी पूँछ को, और जिस चर्बी से अंतड़ियाँ ढपी रहती हैं उसको, और कलेजे पर की झिल्ली को, और चर्बी समेत दोनों गुर्दों को, और दाहिने पुट्ठे को लेना, यह भी देखें: निर्गमन 29:13लैव्यव्यवस्था 7:32-33गिनती 18:18और अख़मीरी रोटी की टोकरी जो यहोवा के आगे धरी होगी उसमें से भी एक रोटी, और तेल से सने हुए मैदे का एक फुलका, और एक पपड़ी लेकर, यह भी देखें: निर्गमन 29:2-3लैव्यव्यवस्था 8:26इन सब को हारून और उसके पुत्रों के हाथों में रखकर हिलाए जाने की भेंट ठहराकर यहोवा के आगे हिलाया जाए। यह भी देखें: लैव्यव्यवस्था 7:30लैव्यव्यवस्था 8:27लैव्यव्यवस्था 9:21तब उन वस्तुओं को उनके हाथों से लेकर होमबलि की वेदी पर जला देना, जिससे वह यहोवा के सामने सुखदायक सुगन्ध ठहरे; वह तो यहोवा के लिये हवन होगा। यह भी देखें: लैव्यव्यवस्था 8:28निर्गमन 29:41लैव्यव्यवस्था 2:9“फिर हारून के संस्कार को जो मेढ़ा होगा उसकी छाती को लेकर हिलाए जाने की भेंट के लिये यहोवा के आगे हिलाना; और वह तेरा भाग ठहरेगा। यह भी देखें: लैव्यव्यवस्था 8:29स्तोत्र ग्रन्थ 99:6लैव्यव्यवस्था 7:31और हारून और उसके पुत्रों के संस्कार का जो मेढ़ा होगा, उसमें से हिलाए जाने की भेंटवाली छाती जो हिलाई जाएगी, और उठाए जाने का भेंटवाला पुट्ठा जो उठाया जाएगा, इन दोनों को पवित्र ठहराना। यह भी देखें: गिनती 18:11लैव्यव्यवस्था 10:15व्यवस्थाविवरण 18:3और ये सदा की विधि की रीति पर इस्राएलियों की ओर से उसका और उसके पुत्रों का भाग ठहरे, क्योंकि ये उठाए जाने की भेंटें ठहरी हैं; और यह इस्राएलियों की ओर से उनके मेलबलियों में से यहोवा के लिये उठाए जाने की भेंट होगी। यह भी देखें: लैव्यव्यवस्था 7:11-38व्यवस्थाविवरण 18:3गिनती 31:41“हारून के जो पवित्र वस्त्र होंगे वह उसके बाद उसके बेटे पोते आदि को मिलते रहें, जिससे उन्हीं को पहने हुए उनका अभिषेक और संस्कार किया जाए। यह भी देखें: गिनती 18:8गिनती 20:26-28निर्गमन 40:15उसके पुत्रों के जो उसके स्थान पर याजक होगा, वह जब पवित्रस्थान में सेवा टहल करने को मिलापवाले तम्बू में पहले आए, तब उन वस्त्रों को सात दिन तक पहने रहें। यह भी देखें: गिनती 20:28उत्पत्ति 8:12इब्रानियों 7:26“फिर याजक के संस्कार का जो मेढ़ा होगा उसे लेकर उसका माँस किसी पवित्रस्थान में पकाना; यह भी देखें: लैव्यव्यवस्था 8:31यहेजकेल 46:20-241 शमूएल 2:15तब हारून अपने पुत्रों समेत उस मेढ़े का माँस और टोकरी की रोटी, दोनों को मिलापवाले तम्बू के द्वार पर खाए। यह भी देखें: मत्ती 12:4निर्गमन 24:9-11लैव्यव्यवस्था 10:12-14जिन पदार्थों से उनका संस्कार और उन्हें पवित्र करने के लिये प्रायश्चित किया जाएगा उनको तो वे खाएँ, परन्तु पराए कुल का कोई उन्हें न खाने पाए, क्योंकि वे पवित्र होंगे। यह भी देखें: गिनती 18:4गिनती 1:51गिनती 3:10यदि संस्कारवाले माँस या रोटी में से कुछ सवेरे तक बचा रहे, तो उस बचे हुए को आग में जलाना, वह खाया न जाए; क्योंकि वह पवित्र होगा। यह भी देखें: निर्गमन 12:10लैव्यव्यवस्था 8:32लैव्यव्यवस्था 10:16“मैंने तुझे जो-जो आज्ञा दी हैं, उन सभी के अनुसार तू हारून और उसके पुत्रों से करना; और सात दिन तक उनका संस्कार करते रहना, यह भी देखें: लैव्यव्यवस्था 8:4-36निर्गमन 29:37निर्गमन 29:30अर्थात् पापबलि का एक बछड़ा प्रायश्चित के लिये प्रतिदिन चढ़ाना। और वेदी को भी प्रायश्चित करने के समय शुद्ध करना, और उसे पवित्र करने के लिये उसका अभिषेक करना। यह भी देखें: इब्रानियों 10:11निर्गमन 30:28-29इब्रानियों 9:22-23सात दिन तक वेदी के लिये प्रायश्चित करके उसे पवित्र करना, और वेदी परमपवित्र ठहरेगी; और जो कुछ उससे छू जाएगा वह भी पवित्र हो जाएगा। यह भी देखें: निर्गमन 40:10मत्ती 23:19निर्गमन 30:28-29“जो तुझे वेदी पर नित्य चढ़ाना होगा वह यह है; अर्थात् प्रतिदिन एक-एक वर्ष के दो भेड़ी के बच्चे। यह भी देखें: 1 इतिहास 16:40गिनती 28:3-8दानिय्येल 12:11एक भेड़ के बच्चे को तो भोर के समय, और दूसरे भेड़ के बच्चे को साँझ के समय चढ़ाना। यह भी देखें: यहेजकेल 46:13-152 राजाओं 16:15स्तोत्र ग्रन्थ 5:3और एक भेड़ के बच्चे के संग हीन की चौथाई कूटकर निकाले हुए तेल से सना हुआ एपा का दसवाँ भाग मैदा, और अर्घ के लिये ही की चौथाई दाखमधु देना। यह भी देखें: फिलिप्पियों 2:17लैव्यव्यवस्था 23:13यहेजकेल 46:14और दूसरे भेड़ के बच्चे को साँझ के समय चढ़ाना, और उसके साथ भोर की रीति अनुसार अन्नबलि और अर्घ दोनों देना, जिससे वह सुखदायक सुगन्ध और यहोवा के लिये हवन ठहरे। यह भी देखें: 1 राजाओं 18:36स्तोत्र ग्रन्थ 141:21 राजाओं 18:29तुम्हारी पीढ़ी से पीढ़ी में यहोवा के आगे मिलापवाले तम्बू के द्वार पर नित्य ऐसा ही होमबलि हुआ करे; यह वह स्थान है जिसमें मैं तुम लोगों से इसलिए मिला करूँगा कि तुझ से बातें करूँ। यह भी देखें: निर्गमन 25:22मैं इस्राएलियों से वहीं मिला करूँगा, और वह तम्बू मेरे तेज से पवित्र किया जाएगा। यह भी देखें: 1 राजाओं 8:112 इतिहास 7:1-3निर्गमन 40:34और मैं मिलापवाले तम्बू और वेदी को पवित्र करूँगा, और हारून और उसके पुत्रों को भी पवित्र करूँगा कि वे मेरे लिये याजक का काम करें। यह भी देखें: लैव्यव्यवस्था 21:15लैव्यव्यवस्था 22:16योहन 10:36और मैं इस्राएलियों के मध्य निवास करूँगा, और उनका परमेश्वर ठहरूँगा। यह भी देखें: लैव्यव्यवस्था 26:122 कुरिन्थियों 6:16निर्गमन 25:8तब वे जान लेंगे कि मैं यहोवा उनका परमेश्वर हूँ, जो उनको मिस्र देश से इसलिए निकाल ले आया, कि उनके मध्य निवास करूँ; मैं ही उनका परमेश्वर यहोवा हूँ। यह भी देखें: निर्गमन 20:2यिर्मयाह 31:33यहेजकेल 20:5
यह भी देखें: क्रॉस-संदर्भ OpenBible.info (CC BY) से, आंशिक रूप से Treasury of Scripture Knowledge (सार्वजनिक डोमेन) पर आधारित।
मनन
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टिप्पणियाँ · हेडॉक (1859, सार्वजनिक डोमेन)24 टिप्पणियाँ
टिप्पणियाँ अंग्रेज़ी में फ़ा. जॉर्ज लियो हेडॉक की 19वीं सदी की काथलिक टीका, जैसी प्रकाशित हुई।
ये टिप्पणियाँ अपने समय के विवादों को बनाए रखती हैं: कुछ यहूदी लोगों या अन्य ख्रीस्तीयों के बारे में कठोरता से बोलती हैं। आज कलीसिया कुछ और सिखाती है: ख्रीस्त की मृत्यु के लिए यहूदी लोगों को दोषी नहीं ठहराया जा सकता (नोस्त्रा एताते 4; धर्मशिक्षा 597–598), और अन्य समुदायों के ख्रीस्तीय प्रभु में हमारे भाई-बहन हैं (उनितातिस रेदिन्तेग्रात्सियो 3)। ख्रीस्तीय एकता
निर्गमन 29:2
Ver. 2. Wafers, ( lagana. ) They knead them with water, and afterwards fry or bake them with oil.
S. Isid. Such wafers are very common in Italy. C.
↑ 2निर्गमन 29:4
Ver. 4. Washed. The pagans never approached their mysteries, without divers purifications and washing. S. Clem. strom. 5. Exterior cleanliness was designed to signify the purity of the heart, with which we must appear before God. C. --- It is for this reason we take holy-water, when we go into our chapels, and we wash our fingers before and during Mass. H.
↑ 4निर्गमन 29:5
Ver. 5. Vestments. No mention is made of breeches, because they had them on, while they were washing. V. Bede. --- Belt. Sept. have read esson, instead of chesheb. "Thou shalt tie the rational to the ephod." C.
↑ 5निर्गमन 29:7
Ver. 7. Pour, in the form of a cross or T, according to many of the Rabbin, &c.
The inferior priests were anointed only on the hands. The Levites were sprinkled with oil, mixed with the blood of the victims. The custom of anointing prophets, priests, and kings, was peculiar to the Jews; as if to foreshow Christ, the great anointed of the Lord. S. Aug. Ps. xliv. Dan. ix. 24.
↑ 7निर्गमन 29:10
Ver. 10. Head. Confessing that they are sinners, and deserve to die. Thus they shall substitute the victim instead of themselves, and obtain pardon. In the holocaust, (v. 15,) and the peace-offering, (v. 19,) they impose their hands, having first washed them) and pronounce some prayer.
C.
↑ 10निर्गमन 29:11
यह 19वीं सदी की टिप्पणी विवादात्मक भाषा का उपयोग करती है; इसे इस पैनल के शीर्ष पर दी गई टिप्पणी के प्रकाश में पढ़ें।
Ver. 11. Beside. All, is now wanting in the printed Heb. and Sam. though expressed by the Protestant translators, (who often help their text) and by all the ancient versions. Kennicott mentions one MS. which retains it very properly. H. --- The victim was offered on the altar of holocausts, before the tabernacle, the seat of God's majesty. C. --- Moses was the priest on this occasion. M. Ps. xcviii. 6.
↑ 11निर्गमन 29:12
Ver. 12. Horns. This was done in all the sacrifices of expiation. After Aaron was ordained, he carried the blood into the sanctuary, for the sins of all. C.
↑ 12निर्गमन 29:13
Ver. 13. Burnt-offering, ( incensum. ) To evaporate like incense. M. --- God requires what is most fat and delicious. C. --- The Persians never reserved any of the victims for their idols, except the caul. Strabo xv.
↑ 13निर्गमन 29:14
Ver. 14. Sin of the high priest and people. In the other sin-offerings, this was not done. M.
↑ 14निर्गमन 29:16
Ver. 16. About, upon the altar, and at the foot of it. So the pagans did. Euseb.
præp. iv. 9.
↑ 16निर्गमन 29:18
Ver. 18. Victim. Heb. ishe, means a whole burnt-offering.
↑ 18निर्गमन 29:20
Ver. 20. Tip, or "softer par.t" Sept. This ceremony insinuated, that the priests ought to be all attentive, and perform their office with diligence. Philo. Vit. Mos.
3.
↑ 20निर्गमन 29:22
Ver. 22. Rump, or tail, for which the sheep of Arabia were famed; some having tails three yards long, others a yard thick. Herodot. iii. 113. They weighed from 12 to 30 pounds, and were almost all fat. C.
↑ 22निर्गमन 29:23
Ver. 23. Roll. ( torta) Heb. kikkar, "a loaf." Sept. "a loaf or cake of oil." H.
↑ 23निर्गमन 29:24
Ver. 24. Elevating, and then letting them descend towards the earth. After which, Moses lifted the victims towards the east and west, and from north to south, to shew that God is the Sovereign of the world. R. Solomon. --- Cato (Rustic. 34,) mentions a similar custom, of agitating or waving bread, in honour of Janus and of Jupiter. C.
↑ 24निर्गमन 29:28
Ver. 28. Israel. As these parts have been offered by Aaron to the Lord, so the Israelites shall present them to him and his sons, when they offer sacrifice. M.
--- All the different kinds of victims were immolated on this occasion, because the priests were consecrated to offer them all.
D.
↑ 28निर्गमन 29:29
Ver. 29. Vesture. A new one was not made for every high priest. C. --- One of the other priests had to perform the ceremony of consecration. M.
↑ 29निर्गमन 29:30
Ver. 30. Days. During which he could not leave the sanctuary. Levit. viii. 33. On each day, the aforesaid ceremonies were to be repeated, v. 35.
↑ 30निर्गमन 29:31
Ver. 31. Holy place. The court of the tabernacle, where a constant fire was kept, to prepare the food of the priests, and sometimes of others, who wished to eat their share of the victims in the presence of the Lord.
↑ 31निर्गमन 29:33
Ver. 33. Stranger. The Levites themselves could not partake of these things.
↑ 33निर्गमन 29:37
Ver. 37. Seven. This number is frequently prescribed in Scripture. Balaam required seven altars, (Num. xxiii.) and the Egyptians never spent less than seven days in their expiations. Porphyr.
Abstin. 4. C. --- Shall be holy, consecrated according to this rite, (M.) or defiled; for sacred things purify those who approach in a proper manner, while they defile or increase the guilt of the unworthy. C. --- By the unleavened bread, (v.
23,) we are reminded of the blessed eucharist; and by oil, of the grace of the spirit. D.
↑ 37निर्गमन 29:39
Ver. 39. Morning. About sun-rise. --- Evening, or between the two vespers. Ex.
xii. 6. The lambs were provided by the people; flour, wine, and oil, by the priests. Philo. --- The wine was poured at the foot of the altar, the flour and oil were burnt upon it, and not placed on the head of the victim, as was customary among the pagans, frontique invergit vina sacerdos. Virg. vi.
Maimon. By these sacrifices, God was to be adored as the author both of day and night; (M.) and we are admonished of our duty of praying to him, particularly at those times. H. --- All the sacrifices prefigured that of Christ, (S.
Aug. c. advers. i. 18,) but none more than these of lambs.
Orig. in Jo. W.
↑ 39निर्गमन 29:40
Ver. 40. Part of an epha, half of which was used in each sacrifice.
↑ 40निर्गमन 29:43
Ver. 43. Glory, or presence, or by the flame which shall come down from heaven to consume the victim. Lev. ix. 24. C.
↑ 43लाइसेंस: Notes by Fr. George Leo Haydock (1774–1849), from the Douay-Rheims Bible with Haydock's commentary (first ed. Thomas Haydock, Manchester/Dublin, 1811–1814; New York: Edward Dunigan & Brother, 1859); New Testament notes compiled with Fr. Benedict Rayment. Public domain. Digital text: "The Haydock Bible", Internet Archive (archive.org/details/TheHaydockBible), uploaded 2011 under the Public Domain Mark. · आभार और लाइसेंस