AI-generated illustration: the prophet Daniel prays calmly among resting lions as an angel descends in a shaft of light. Classical sacred-art style.
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दानिय्येल

6
बाइबल पाठ

कृत्रिम आवाज़ (AI)

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दारा को यह अच्छा लगा कि अपने राज्य के ऊपर एक सौ बीस ऐसे अधिपति ठहराए, जो पूरे राज्य में अधिकार रखें। यह भी देखें: निर्गमन 18:21-22दानिय्येल 5:31एस्तेर 1:1और उनके ऊपर उसने तीन अध्यक्ष, जिनमें से दानिय्येल एक था, इसलिए ठहराए, कि वे उन अधिपतियों से लेखा लिया करें, और इस रीति राजा की कुछ हानि न होने पाए। यह भी देखें: एस्तेर 7:4दानिय्येल 5:29एज्रा 4:22जब यह देखा गया कि दानिय्येल में उत्तम आत्मा रहती है, तब उसको उन अध्यक्षों और अधिपतियों से अधिक प्रतिष्ठा मिली; वरन् राजा यह भी सोचता था कि उसको सारे राज्य के ऊपर ठहराए। यह भी देखें: दानिय्येल 5:14उत्पत्ति 41:38-41नीतिवचन 22:29तब अध्यक्ष और अधिपति राजकार्य के विषय में दानिय्येल के विरुद्ध दोष ढूँढ़ने लगे; परन्तु वह विश्वासयोग्य था, और उसके काम में कोई भूल या दोष न निकला, और वे ऐसा कोई अपराध या दोष न पा सके। यह भी देखें: 1 पतरस 3:16फिलिप्पियों 2:151 पतरस 2:12तब वे लोग कहने लगे, “हम उस दानिय्येल के परमेश्वर की व्यवस्था को छोड़ और किसी विषय में उसके विरुद्ध कोई दोष न पा सकेंगे।” यह भी देखें: प्रेरित-चरित 24:13-16प्रेरित-चरित 24:20-21एस्तेर 3:8तब वे अध्यक्ष और अधिपति राजा के पास उतावली से आए, और उससे कहा, “हे राजा दारा, तू युग-युग जीवित रहे। यह भी देखें: दानिय्येल 2:4नहेम्याह 2:3दानिय्येल 6:21राज्य के सारे अध्यक्षों ने, और हाकिमों, अधिपतियों, न्यायियों, और राज्यपालों ने आपस में सम्मति की है, कि राजा ऐसी आज्ञा दे और ऐसी कड़ी आज्ञा निकाले, कि तीस दिन तक जो कोई, हे राजा, तुझे छोड़ किसी और मनुष्य या देवता से विनती करे, वह सिंहों की माँद में डाल दिया जाए। यह भी देखें: स्तोत्र ग्रन्थ 59:3स्तोत्र ग्रन्थ 83:1-3दानिय्येल 3:2इसलिए अब हे राजा, ऐसी आज्ञा दे, और इस पत्र पर हस्ताक्षर कर, जिससे यह बात मादियों और फारसियों की अटल व्यवस्था के अनुसार अदल-बदल न हो सके।” यह भी देखें: दानिय्येल 6:15एस्तेर 1:19दानिय्येल 6:12तब दारा राजा ने उस आज्ञापत्र पर हस्ताक्षर कर दिया। यह भी देखें: स्तोत्र ग्रन्थ 118:9स्तोत्र ग्रन्थ 146:3स्तोत्र ग्रन्थ 62:9-10जब दानिय्येल को मालूम हुआ कि उस पत्र पर हस्ताक्षर किया गया है, तब वह अपने घर में गया जिसकी ऊपरी कोठरी की खिड़कियाँ यरूशलेम की ओर खुली रहती थीं, और अपनी रीति के अनुसार जैसा वह दिन में तीन बार अपने परमेश्वर के सामने घुटने टेककर प्रार्थना और धन्यवाद करता था, वैसा ही तब भी करता रहा। यह भी देखें: प्रेरित-चरित 5:29स्तोत्र ग्रन्थ 55:171 थिस्सलुनीकियों 5:17-18तब उन पुरुषों ने उतावली से आकर दानिय्येल को अपने परमेश्वर के सामने विनती करते और गिड़गिड़ाते हुए पाया। यह भी देखें: स्तोत्र ग्रन्थ 37:32-33स्तोत्र ग्रन्थ 10:9दानिय्येल 6:6तब वे राजा के पास जाकर, उसकी राजआज्ञा के विषय में उससे कहने लगे, “हे राजा, क्या तूने ऐसे आज्ञापत्र पर हस्ताक्षर नहीं किया कि तीस दिन तक जो कोई तुझे छोड़ किसी मनुष्य या देवता से विनती करेगा, वह सिंहों की माँद में डाल दिया जाएगा?” राजा ने उत्तर दिया, “हाँ, मादियों और फारसियों की अटल व्यवस्था के अनुसार यह बात स्थिर है।” यह भी देखें: दानिय्येल 6:8दानिय्येल 3:8-12एस्तेर 1:19तब उन्होंने राजा से कहा, “यहूदी बंधुओं में से जो दानिय्येल है, उसने, हे राजा, न तो तेरी ओर कुछ ध्यान दिया, और न तेरे हस्ताक्षर किए हुए आज्ञापत्र की ओर; वह दिन में तीन बार विनती किया करता है।” यह भी देखें: दानिय्येल 3:12प्रेरित-चरित 5:29दानिय्येल 2:25यह वचन सुनकर, राजा बहुत उदास हुआ, और दानिय्येल को बचाने के उपाय सोचने लगा; और सूर्य के अस्त होने तक उसके बचाने का यत्न करता रहा। यह भी देखें: मारकुस 6:26मत्ती 27:17-24लूकस 23:13-21तब वे पुरुष राजा के पास उतावली से आकर कहने लगे, “हे राजा, यह जान रख, कि मादियों और फारसियों में यह व्यवस्था है कि जो-जो मनाही या आज्ञा राजा ठहराए, वह नहीं बदल सकती।” यह भी देखें: दानिय्येल 6:12एस्तेर 8:8दानिय्येल 6:8तब राजा ने आज्ञा दी, और दानिय्येल लाकर सिंहों की माँद में डाल दिया गया। उस समय राजा ने दानिय्येल से कहा, “तेरा परमेश्वर जिसकी तू नित्य उपासना करता है, वही तुझे बचाए!” यह भी देखें: स्तोत्र ग्रन्थ 37:39-40अय्यूब 5:19स्तोत्र ग्रन्थ 91:14-16तब एक पत्थर लाकर उस माँद के मुँह पर रखा गया, और राजा ने उस पर अपनी अंगूठी से, और अपने प्रधानों की अँगूठियों से मुहर लगा दी कि दानिय्येल के विषय में कुछ बदलने न पाए। यह भी देखें: विलापगीत 3:53प्रेरित-चरित 12:4मत्ती 27:60-66तब राजा अपने महल में चला गया, और उस रात को बिना भोजन पड़ा रहा; और उसके पास सुख-विलास की कोई वस्तु नहीं पहुँचाई गई, और उसे नींद भी नहीं आई। यह भी देखें: एस्तेर 6:1दानिय्येल 2:12 शमूएल 12:16-17भोर को पौ फटते ही राजा उठा, और सिंहों के माँद की ओर फुर्ती से चला गया। यह भी देखें: 1 थिस्सलुनीकियों 3:5मत्ती 28:12 कुरिन्थियों 2:13जब राजा माँद के निकट आया, तब शोकभरी वाणी से चिल्लाने लगा और दानिय्येल से कहा, “हे दानिय्येल, हे जीविते परमेश्वर के दास, क्या तेरा परमेश्वर जिसकी तू नित्य उपासना करता है, तुझे सिंहों से बचा सका है?” यह भी देखें: इब्रानियों 7:251 इतिहास 16:11दानिय्येल 6:27तब दानिय्येल ने राजा से कहा, “हे राजा, तू युग-युग जीवित रहे! यह भी देखें: दानिय्येल 2:4दानिय्येल 6:6नहेम्याह 2:3मेरे परमेश्वर ने अपना दूत भेजकर सिंहों के मुँह को ऐसा बन्द कर रखा कि उन्होंने मेरी कुछ भी हानि नहीं की; इसका कारण यह है, कि मैं उसके सामने निर्दोष पाया गया; और हे राजा, तेरे सम्मुख भी मैंने कोई भूल नहीं की।” (यशा. 63:9, भज. 34:7) यह भी देखें: 2 तीमुथियुस 4:17इब्रानियों 11:33स्तोत्र ग्रन्थ 91:11-13तब राजा ने बहुत आनन्दित होकर, दानिय्येल को माँद में से निकालने की आज्ञा दी। अतः दानिय्येल माँद में से निकाला गया, और उस पर हानि का कोई चिन्ह न पाया गया, क्योंकि वह अपने परमेश्वर पर विश्वास रखता था। यह भी देखें: 1 इतिहास 5:20दानिय्येल 3:27-28दानिय्येल 3:25तब राजा ने आज्ञा दी कि जिन पुरुषों ने दानिय्येल की चुगली की थी, वे अपने-अपने बाल-बच्चों और स्त्रियों समेत लाकर सिंहों की माँद में डाल दिए जाएँ; और वे माँद की पेंदी तक भी न पहुँचे कि सिंहों ने उन पर झपटकर सब हड्डियों समेत उनको चबा डाला। यह भी देखें: यशायाह 38:13एस्तेर 7:10स्तोत्र ग्रन्थ 54:5तब दारा राजा ने सारी पृथ्वी के रहनेवाले देश-देश और जाति-जाति के सब लोगों, और भिन्न-भिन्न भाषा बोलनेवालों के पास यह लिखा, “तुम्हारा बहुत कुशल हो! यह भी देखें: दानिय्येल 4:1एज्रा 1:1-2एस्तेर 3:12मैं यह आज्ञा देता हूँ कि जहाँ-जहाँ मेरे राज्य का अधिकार है, वहाँ के लोग दानिय्येल के परमेश्वर के सम्मुख काँपते और थरथराते रहें, क्योंकि जीविता और युगानुयुग तक रहनेवाला परमेश्वर वही है; उसका राज्य अविनाशी और उसकी प्रभुता सदा स्थिर रहेगी। (दानि. 7:27, भज. 99:1-3) यह भी देखें: दानिय्येल 4:34लूकस 1:33दानिय्येल 7:14जिसने दानिय्येल को सिंहों से बचाया है, वही बचाने और छुड़ानेवाला है; और स्वर्ग में और पृथ्वी पर चिन्हों और चमत्कारों का प्रगट करनेवाला है।” यह भी देखें: दानिय्येल 4:2-3स्तोत्र ग्रन्थ 97:10स्तोत्र ग्रन्थ 18:50और दानिय्येल, दारा और कुस्रू फारसी, दोनों के राज्य के दिनों में सुख-चैन से रहा। यह भी देखें: दानिय्येल 1:212 इतिहास 36:22यशायाह 44:28

यह भी देखें: क्रॉस-संदर्भ OpenBible.info (CC BY) से, आंशिक रूप से Treasury of Scripture Knowledge (सार्वजनिक डोमेन) पर आधारित।

टिप्पणियाँ · हेडॉक (1859, सार्वजनिक डोमेन)14 टिप्पणियाँ

टिप्पणियाँ अंग्रेज़ी में फ़ा. जॉर्ज लियो हेडॉक की 19वीं सदी की काथलिक टीका, जैसी प्रकाशित हुई।

ये टिप्पणियाँ अपने समय के विवादों को बनाए रखती हैं: कुछ यहूदी लोगों या अन्य ख्रीस्तीयों के बारे में कठोरता से बोलती हैं। आज कलीसिया कुछ और सिखाती है: ख्रीस्त की मृत्यु के लिए यहूदी लोगों को दोषी नहीं ठहराया जा सकता (नोस्त्रा एताते 4; धर्मशिक्षा 597–598), और अन्य समुदायों के ख्रीस्तीय प्रभु में हमारे भाई-बहन हैं (उनितातिस रेदिन्तेग्रात्सियो 3)। ख्रीस्तीय एकता

दानिय्येल 6:1

Ver. 1. Kingdom. Josephus, &c. say Darius had returned into Media, where he made these regulations. But if this did not take place at Babylon, it would be rather at Susa. C. viii.

Josephus counts 300 or 360 governments, though when the monarchy was increased there were only 127. Est. i. C. --- He may therefore speak here of large towns, which had each a magistrate.

Such regulations easily vary. H. --- Darius acts as master of the whole empire.

↑ 1

दानिय्येल 6:3

Ver. 3. Princes. Th. "regulators." Chal. sacecin, (H.) may be put for (C.) scranim, (H.) the usual title (C.) of the highest officers, the surenas of Persia.

Ammian 30.

↑ 3

दानिय्येल 6:4

Ver. 4. Kingdom, as prime minister, to whom the three princes should be accountable, as the inferior governors where to them. H. ---The king was now advanced in years, and wished to ease himself of part of the burden, (C.) as he could entirely confide in Daniel. H. --- He reigned only one year. C. xiii. 65. W.

--- King. Chal. "kingdom," (H.) to accuse him of treason, (Grot.) or to get him removed. C. --- This is an old and malignant trick, to call religion treason, and to get laws made for that purpose. W. --- In him a great proof of integrity! M.

↑ 4

दानिय्येल 6:6

Ver. 6. Craftily. Chal. "came tumultuously to," &c. C. --- They hoped thus to convince the king, as they were so unanimous. He would not perceive the drift of their petition, and was flattered with the idea of being like a god. Daniel was not consulted, though on other occasions the king reposed such confidence in him, as the deputies so impudently asserted that the wish was universal! So easily are princes deceived! H.

↑ 6

दानिय्येल 6:8

Ver. 8. It, when it is confirmed both by the king and his nobility. Est. viii. 8.

↑ 8

दानिय्येल 6:9

Ver. 9. It. Nabuchodonosor of Babylon, and of Ninive, had both pretended to be gods; (C. iii. 15.

Judith vi. 29. C.) and Curtius (8.) remarks, "that the Persians follow the dictates of prudence as well as of piety, in worshipping their kings among the gods, the majesty of empire being its best protection." H.

↑ 9

दानिय्येल 6:10

Ver. 10. Before. He did not open the windows that he might be seen, as that would have been rashness; nor did many perceive what he was doing, (v. 11.

W.) as it was in an upper room, but only those who rushed in. H. --- It was the usual practice of the Jews, (C.) to pray turning towards the temple, as Solomon had directed, (3 K. viii. 48. S. Jer. in Ezec. viii. 16.) though it was now in ashes. H. --- Daniel observed the third, sixth, and ninth hours, as the Church still does. Acts ii. 15. and x. 9. S. Jer.

↑ 10

दानिय्येल 6:11

Ver. 11. Carefully. Chal. "came in a tumultuous manner." as v. 6. & 15. C.

↑ 11

दानिय्येल 6:15

Ver. 15. Perceiving. Chal. "assembled," (Prot. H.) or "came quickly in a body."

C.

↑ 15

दानिय्येल 6:17

Ver. 17. Own ring, that none of his enemies might injure Daniel. The nobles also affixed their seal, (H.) that the king might not liberate him. M. --- All this shews that aristocracy was mixed with the monarchical form of government.

Nothing of importance is done without the nobles.

↑ 17

दानिय्येल 6:18

Ver. 18. Meat. Chal. "music," (C.) or "incense." De Dieu. --- He was tired of his godship, to which he had unguardedly opened his heart. v. 6. H.

↑ 18

दानिय्येल 6:22

Ver. 22. Offence, as I neglected thy decree to obey a higher Master. C. --- The king had sense enough to approve of this distinction. H.

↑ 22

दानिय्येल 6:23

Ver. 23. Believed, or trusted. C. --- S. Paul alludes to this miracle. Heb. xi. 33. W.

↑ 23

दानिय्येल 6:24

Ver. 24. Accused. They were punished as false witnesses; (C.) and the king justly made them suffer what they would have inflicted on the innocent, being convinced that Daniel had only acted according to his devotion. W. --- These wretches deserved to perish, though they had spoken nothing but the truth. H.

--- Wives. Many examples of such punishments occur, (C.) as it was presumed that children and wives were infected by the bad example, and would imitiate it, (Jun.) if they had not concurred already. M. --- This must have been the case, to make it just. H. See Jos. vii. --- Abominandœ leges, says Ammianus, (23) speaking of the customs of Persia, per quas ob noxam unius omnis propinquitas perit. C.

↑ 24

लाइसेंस: Notes by Fr. George Leo Haydock (1774–1849), from the Douay-Rheims Bible with Haydock's commentary (first ed. Thomas Haydock, Manchester/Dublin, 1811–1814; New York: Edward Dunigan & Brother, 1859); New Testament notes compiled with Fr. Benedict Rayment. Public domain. Digital text: "The Haydock Bible", Internet Archive (archive.org/details/TheHaydockBible), uploaded 2011 under the Public Domain Mark. · आभार और लाइसेंस

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