
2 इतिहास · IRV-HI
2 इतिहास
32
बाइबल पाठकृत्रिम आवाज़ (AI)
इन बातों और ऐसे प्रबन्ध के बाद अश्शूर के राजा सन्हेरीब ने आकर यहूदा में प्रवेश कर और गढ़वाले नगरों के विरुद्ध डेरे डालकर उनको अपने लाभ के लिये लेना चाहा। यह भी देखें: 2 राजाओं 18:13-37यशायाह 7:17-18यशायाह 10:5-11यह देखकर कि सन्हेरीब निकट आया है और यरूशलेम से लड़ने की इच्छा करता है, यह भी देखें: 2 राजाओं 12:17लूकस 9:53लूकस 9:51हिजकिय्याह ने अपने हाकिमों और वीरों के साथ यह सम्मति की, कि नगर के बाहर के सोतों को पटवा दें; और उन्होंने उसकी सहायता की। यह भी देखें: नीतिवचन 20:18नीतिवचन 15:22नीतिवचन 24:6इस पर बहुत से लोग इकट्ठे हुए, और यह कहकर कि, “अश्शूर के राजा क्यों यहाँ आएँ, और आकर बहुत पानी पाएँ,” उन्होंने सब सोतों को रोक दिया और उस नदी को सुखा दिया जो देश के मध्य से होकर बहती थी। यह भी देखें: 2 इतिहास 32:302 इतिहास 32:11 राजाओं 19:21फिर हिजकिय्याह ने हियाव बाँधकर शहरपनाह जहाँ कहीं टूटी थी, वहाँ-वहाँ उसको बनवाया, और उसे गुम्मटों के बराबर ऊँचा किया और बाहर एक और शहरपनाह बनवाई, और दाऊदपुर में मिल्लो को दृढ़ किया। और बहुत से हथियार और ढालें भी बनवाईं। यह भी देखें: 2 इतिहास 25:231 राजाओं 9:242 शमूएल 5:9तब उसने प्रजा के ऊपर सेनापति नियुक्त किए और उनको नगर के फाटक के चौक में इकट्ठा किया, और यह कहकर उनको धीरज दिया, यह भी देखें: 2 इतिहास 30:22यशायाह 40:2नहेम्याह 8:16“हियाव बाँधो और दृढ़ हो तुम न तो अश्शूर के राजा से डरो और न उसके संग की सारी भीड़ से, और न तुम्हारा मन कच्चा हो; क्योंकि जो हमारे साथ है, वह उसके संगियों से बड़ा है। यह भी देखें: 2 राजाओं 6:16रोमियों 8:31इफिसियों 6:10अर्थात् उसका सहारा तो मनुष्य ही है परन्तु हमारे साथ, हमारी सहायता और हमारी ओर से युद्ध करने को हमारा परमेश्वर यहोवा है।” इसलिए प्रजा के लोग यहूदा के राजा हिजकिय्याह की बातों पर भरोसा किए रहे। यह भी देखें: यिर्मयाह 17:52 इतिहास 20:172 तीमुथियुस 4:17इसके बाद अश्शूर का राजा सन्हेरीब जो सारी सेना समेत लाकीश के सामने पड़ा था, उसने अपने कर्मचारियों को यरूशलेम में यहूदा के राजा हिजकिय्याह और उन सब यहूदियों से जो यरूशलेम में थे यह कहने के लिये भेजा, यह भी देखें: 2 राजाओं 18:17यहोशू 10:31यहोशू 12:11“अश्शूर का राजा सन्हेरीब कहता है, कि तुम्हें किसका भरोसा है जिससे कि तुम घिरे हुए यरूशलेम में बैठे हो? यह भी देखें: यशायाह 36:42 राजाओं 18:19क्या हिजकिय्याह तुम से यह कहकर कि हमारा परमेश्वर यहोवा हमको अश्शूर के राजा के पंजे से बचाएगा तुम्हें नहीं भरमाता है कि तुम को भूखा प्यासा मारे? यह भी देखें: 2 इतिहास 32:15स्तोत्र ग्रन्थ 3:2स्तोत्र ग्रन्थ 42:10क्या उसी हिजकिय्याह ने उसके ऊँचे स्थान और वेदियों को दूर करके यहूदा और यरूशलेम को आज्ञा नहीं दी, कि तुम एक ही वेदी के सामने दण्डवत् करना और उसी पर धूप जलाना? यह भी देखें: 2 इतिहास 31:1व्यवस्थाविवरण 12:13-142 इतिहास 4:1क्या तुम को मालूम नहीं, कि मैंने और मेरे पुरखाओं ने देश-देश के सब लोगों से क्या-क्या किया है? क्या उन देशों की जातियों के देवता किसी भी उपाय से अपने देश को मेरे हाथ से बचा सके? यह भी देखें: 2 राजाओं 18:33-351 कुरिन्थियों 8:42 राजाओं 15:29जितनी जातियों का मेरे पुरखाओं ने सत्यानाश किया है उनके सब देवताओं में से ऐसा कौन था जो अपनी प्रजा को मेरे हाथ से बचा सका हो? फिर तुम्हारा देवता तुम को मेरे हाथ से कैसे बचा सकेगा? यह भी देखें: यशायाह 42:8निर्गमन 15:9-11निर्गमन 14:3अब हिजकिय्याह तुम को इस रीति से भरमाने अथवा बहकाने न पाए, और तुम उस पर विश्वास न करो, क्योंकि किसी जाति या राज्य का कोई देवता अपनी प्रजा को न तो मेरे हाथ से और न मेरे पुरखाओं के हाथ से बचा सका। यह निश्चय है कि तुम्हारा देवता तुम को मेरे हाथ से नहीं बचा सकेगा।” यह भी देखें: दानिय्येल 3:15निर्गमन 5:2यशायाह 36:18इससे भी अधिक उसके कर्मचारियों ने यहोवा परमेश्वर की, और उसके दास हिजकिय्याह की निन्दा की। यह भी देखें: स्तोत्र ग्रन्थ 73:9योहन 15:21अय्यूब 15:25-26फिर उसने ऐसा एक पत्र भेजा, जिसमें इस्राएल के परमेश्वर यहोवा की निन्दा की ये बातें लिखी थीं: “जैसे देश-देश की जातियों के देवताओं ने अपनी-अपनी प्रजा को मेरे हाथ से नहीं बचाया वैसे ही हिजकिय्याह का देवता भी अपनी प्रजा को मेरे हाथ से नहीं बचा सकेगा।” यह भी देखें: यशायाह 37:28-29यशायाह 37:142 राजाओं 19:12और उन्होंने ऊँचे शब्द से उन यरूशलेमियों को जो शहरपनाह पर बैठे थे, यहूदी बोली में पुकारा, कि उनको डराकर घबराहट में डाल दें जिससे नगर को ले लें। यह भी देखें: यशायाह 36:132 राजाओं 18:26-281 शमूएल 17:10उन्होंने यरूशलेम के परमेश्वर की ऐसी चर्चा की, कि मानो पृथ्वी के देश-देश के लोगों के देवताओं के बराबर हो, जो मनुष्यों के बनाए हुए हैं। यह भी देखें: 2 राजाओं 19:18यशायाह 2:8स्तोत्र ग्रन्थ 10:13-14तब इन घटनाओं के कारण राजा हिजकिय्याह और आमोस के पुत्र यशायाह नबी दोनों ने प्रार्थना की और स्वर्ग की ओर दुहाई दी। यह भी देखें: स्तोत्र ग्रन्थ 91:14-152 राजाओं 19:2-42 इतिहास 14:11तब यहोवा ने एक दूत भेज दिया, जिसने अश्शूर के राजा की छावनी में सब शूरवीरों, प्रधानों और सेनापतियों को नष्ट किया। अतः वह लज्जित होकर, अपने देश को लौट गया। और जब वह अपने देवता के भवन में था, तब उसके निज पुत्रों ने वहीं उसे तलवार से मार डाला। यह भी देखें: यशायाह 37:36-38स्तोत्र ग्रन्थ 76:5स्तोत्र ग्रन्थ 76:7अतः यहोवा ने हिजकिय्याह और यरूशलेम के निवासियों को अश्शूर के राजा सन्हेरीब और अपने सब शत्रुओं के हाथ से बचाया, और चारों ओर उनकी अगुआई की। यह भी देखें: यशायाह 31:4-5स्तोत्र ग्रन्थ 18:48-50योहन 16:13तब बहुत लोग यरूशलेम को यहोवा के लिये भेंट और यहूदा के राजा हिजकिय्याह के लिये अनमोल वस्तुएँ ले आने लगे, और उस समय से वह सब जातियों की दृष्टि में महान ठहरा। यह भी देखें: 2 इतिहास 17:52 इतिहास 1:1मत्ती 2:11उन दिनों हिजकिय्याह ऐसा रोगी हुआ, कि वह मरने पर था, तब उसने यहोवा से प्रार्थना की; और उसने उससे बातें करके उसके लिये एक चिन्ह दिया। यह भी देखें: यशायाह 38:1-82 राजाओं 20:1-11यशायाह 38:21-22परन्तु हिजकिय्याह ने उस उपकार का बदला न दिया, क्योंकि उसका मन फूल उठा था। इस कारण उसका कोप उस पर और यहूदा और यरूशलेम पर भड़का। यह भी देखें: 2 इतिहास 24:182 इतिहास 26:162 इतिहास 32:31तब हिजकिय्याह यरूशलेम के निवासियों समेत अपने मन के फूलने के कारण दीन हो गया, इसलिए यहोवा का क्रोध उन पर हिजकिय्याह के दिनों में न भड़का। यह भी देखें: यिर्मयाह 26:18-192 इतिहास 33:122 इतिहास 34:27-28हिजकिय्याह को बहुत ही धन और वैभव मिला; और उसने चाँदी, सोने, मणियों, सुगन्ध-द्रव्य, ढालों और सब प्रकार के मनभावने पात्रों के लिये भण्डार बनवाए। यह भी देखें: 2 इतिहास 9:271 इतिहास 27:25-312 इतिहास 17:5फिर उसने अन्न, नया दाखमधु, और टटका तेल के लिये भण्डार, और सब भाँति के पशुओं के लिये थान, और भेड़-बकरियों के लिये भेड़शालाएँ बनवाईं। यह भी देखें: 1 राजाओं 4:262 शमूएल 7:82 इतिहास 26:10उसने नगर बसाए, और बहुत ही भेड़-बकरियों और गाय-बैलों की सम्पत्ति इकट्ठा कर ली, क्योंकि परमेश्वर ने उसे बहुत सा धन दिया था। यह भी देखें: 1 इतिहास 29:122 इतिहास 26:10व्यवस्थाविवरण 8:18उसी हिजकिय्याह ने गीहोन नामक नदी के ऊपर के सोते को पाटकर उस नदी को नीचे की ओर दाऊदपुर के पश्चिम की ओर सीधा पहुँचाया, और हिजकिय्याह अपने सब कामों में सफल होता था। यह भी देखें: 1 राजाओं 1:33यशायाह 22:9-111 राजाओं 1:45तो भी जब बाबेल के हाकिमों ने उसके पास उसके देश में किए हुए अद्भुत कामों के विषय पूछने को दूत भेजे तब परमेश्वर ने उसको इसलिए छोड़ दिया, कि उसको परखकर उसके मन का सारा भेद जान ले। यह भी देखें: व्यवस्थाविवरण 8:2नीतिवचन 17:3योहन 15:5हिजकिय्याह के और काम, और उसके भक्ति के काम आमोस के पुत्र यशायाह नबी के दर्शन नामक पुस्तक में, और यहूदा और इस्राएल के राजाओं के इतिहास की पुस्तक में लिखे हैं। यह भी देखें: 2 राजाओं 18:1-20यशायाह 36:1-222 इतिहास 31:20-21अन्त में हिजकिय्याह मरकर अपने पुरखाओं के संग जा मिला और उसको दाऊद की सन्तान के कब्रिस्तान की चढ़ाई पर मिट्टी दी गई, और सब यहूदियों और यरूशलेम के निवासियों ने उसकी मृत्यु पर उसका आदरमान किया। उसका पुत्र मनश्शे उसके स्थान पर राज्य करने लगा। यह भी देखें: नीतिवचन 10:71 राजाओं 2:101 राजाओं 11:43
यह भी देखें: क्रॉस-संदर्भ OpenBible.info (CC BY) से, आंशिक रूप से Treasury of Scripture Knowledge (सार्वजनिक डोमेन) पर आधारित।
मनन
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टिप्पणियाँ · हेडॉक (1859, सार्वजनिक डोमेन)18 टिप्पणियाँ
टिप्पणियाँ अंग्रेज़ी में फ़ा. जॉर्ज लियो हेडॉक की 19वीं सदी की काथलिक टीका, जैसी प्रकाशित हुई।
ये टिप्पणियाँ अपने समय के विवादों को बनाए रखती हैं: कुछ यहूदी लोगों या अन्य ख्रीस्तीयों के बारे में कठोरता से बोलती हैं। आज कलीसिया कुछ और सिखाती है: ख्रीस्त की मृत्यु के लिए यहूदी लोगों को दोषी नहीं ठहराया जा सकता (नोस्त्रा एताते 4; धर्मशिक्षा 597–598), और अन्य समुदायों के ख्रीस्तीय प्रभु में हमारे भाई-बहन हैं (उनितातिस रेदिन्तेग्रात्सियो 3)। ख्रीस्तीय एकता
2 इतिहास 32:1
Ver. 1. Truth, and sincere piety of the king, God was pleased to put him to trial; (T. M. D.) or,
"after these things were established." Jun. --- Sennacherib attacked Juda when Ezechias had been fifteen years on the throne, and till that time had paid the stipulated tribute. 4 K. xviii. 13. C. ---
He now probably refused to pay it any longer. Salien, A. 3319. M.
↑ 12 इतिहास 32:2
Ver. 2. Jerusalem; as many cities had fallen. The king entered into an agreement with the Assyrians, who soon broke it.
↑ 22 इतिहास 32:3
Ver. 3. City. The torrent Cedron afforded the only good supply of water. It was often dry, and was only three steps across, when full of melted snow or rain.
The waters of Siloe and Gihon were collected in it. Yet it was no difficult enterprise for the king to turn the stream, and introduce the waters through the rock into a large reservoir, in the city, by the canal, which is mentioned 2
Esdras ii. 14. Eccli. xlviii. 19. The besieged were more frequently deprived of water. Judith vii. 6. Babylon was taken by Semiramis, Cyrus, and Alexander, after they turned aside the waters of the Euphrates; and Cæsar obliged the town of Cahors to surrender, by intercepting the springs. Frontin. iii. 7. C.
↑ 32 इतिहास 32:4
Ver. 4. Land, Cedron, on the east; (C. M.) or it may be the Gihon, which supplies Siloe, v. 30. T.
↑ 42 इतिहास 32:5
Ver. 5. Without, of less strength. --- Mello, the palace, which was strongly situated, and Ezechias added fresh fortifications. 2 K. v. 9. --- Arms. Heb.
"darts."
↑ 52 इतिहास 32:6
Ver. 6. Gate, where there was a room for assemblies. 2 K. xviii. 24. C. --- Heart, in the most affectionate and pathetic manner. H.
↑ 62 इतिहास 32:7
Ver. 7. More: God and his angels, from whom he expected relief, and was not disappointed. 4 K.
vi. 16. and xix. 35. C.
↑ 72 इतिहास 32:9
Ver. 9. Lachis, whence he sent Rabsaces. Other blasphemous letters were dispatched from Lobna, (v. 17) when Sennacherib was forced to go to meet Tharaca. 4 K. xix. 9.
↑ 92 इतिहास 32:12
Ver. 12. His altars. Rabsaces was ignorant of the law, and upbraids the king for a commendable action. C. --- Thus our adversaries foolishly blame us for keeping holy days and abstinence. H.
↑ 122 इतिहास 32:17
Ver. 17. He (Sennacherib) wrote, when he was going towards Egypt. Both master and servant employed the same fallacious argument; as if the true God and idols were all upon a level, and as if past success were a sure proof of future victories, v. 19. H.
↑ 172 इतिहास 32:21
Ver. 21. Army. Heb. "camp." --- Disgrace. The Jews pretend that he was deprived of his beard and hair, (S. Jer. Trad.) misapplying the text of Isai. vii.
20. C. --- Sword, to prevent their being offered as victims, to appease the idol and the people. R. Solomon. Lyran. --- This happened some months after the king's return to Ninive, when he had cruelly oppressed the captive Jews and Tobias, i. 24. T.
↑ 212 इतिहास 32:23
Ver. 23. Many; probably strangers. 3 K. viii. 41.
↑ 232 इतिहास 32:24
Ver. 24. Sign. See 4 K. xx.
↑ 242 इतिहास 32:25
Ver. 25. Up, by riches, and the splendid embassy from Babylon. C. ---
Prosperity is more dangerous than adversity. W. --- Few are able to bear good fortune with moderation. H.
↑ 252 इतिहास 32:27
Ver. 27. Arms. Heb. "shields." Sept. "arsenals."
↑ 272 इतिहास 32:30
Ver. 30. Underneath the walls of the city, making them run westward. C. xxxiii.
14.
↑ 302 इतिहास 32:31
Ver. 31. Wonder, at the defeat of Sennacherib; (Grot. D.) or rather the retrogradation of the sun, as the Chaldees studied astronomy with diligence.
M. T. C. --- Left him, in punishment of his vanity. H. --- Heart. How feeble is man when destitute of the divine assistance! M. --- God permitted, therefore, the king to be tempted, (C.) that he might know himself, and that others might have a true idea of him. D.
↑ 312 इतिहास 32:33
Ver. 33. Above, for distinction's sake: (C.) meriti prærogativâ. S. Jer. Trad. M. ---
The cell was either higher than the rest, or a sort of pyramid was erected over the tomb of Ezechias. C.
↑ 33लाइसेंस: Notes by Fr. George Leo Haydock (1774–1849), from the Douay-Rheims Bible with Haydock's commentary (first ed. Thomas Haydock, Manchester/Dublin, 1811–1814; New York: Edward Dunigan & Brother, 1859); New Testament notes compiled with Fr. Benedict Rayment. Public domain. Digital text: "The Haydock Bible", Internet Archive (archive.org/details/TheHaydockBible), uploaded 2011 under the Public Domain Mark. · आभार और लाइसेंस