
2 इतिहास · IRV-HI
2 इतिहास
20
बाइबल पाठकृत्रिम आवाज़ (AI)
इसके बाद मोआबियों और अम्मोनियों ने और उनके साथ कई मूनियों ने युद्ध करने के लिये यहोशापात पर चढ़ाई की। यह भी देखें: यशायाह 8:9-10स्तोत्र ग्रन्थ 83:5-8यशायाह 16:6तब लोगों ने आकर यहोशापात को बता दिया, “ताल के पार से एदोम देश की ओर से एक बड़ी भीड़ तुझ पर चढ़ाई कर रही है; और देख, वह हसासोन्तामार तक जो एनगदी भी कहलाता है, पहुँच गई है।” यह भी देखें: उत्पत्ति 14:71 शमूएल 23:29यहोशू 15:62तब यहोशापात डर गया और यहोवा की खोज में लग गया, और पूरे यहूदा में उपवास का प्रचार करवाया। यह भी देखें: दानिय्येल 9:32 इतिहास 19:3योना 3:5-9अतः यहूदी यहोवा से सहायता माँगने के लिये इकट्ठा हुए, वरन् वे यहूदा के सब नगरों से यहोवा से भेंट करने को आए। यह भी देखें: स्तोत्र ग्रन्थ 50:15स्तोत्र ग्रन्थ 60:10-12स्तोत्र ग्रन्थ 69:35तब यहोशापात यहोवा के भवन में नये आँगन के सामने यहूदियों और यरूशलेमियों की मण्डली में खड़ा होकर यह भी देखें: 2 इतिहास 6:12-132 राजाओं 19:15-192 इतिहास 34:31यह कहने लगा, “हे हमारे पितरों के परमेश्वर यहोवा! क्या तू स्वर्ग में परमेश्वर नहीं है? और क्या तू जाति-जाति के सब राज्यों के ऊपर प्रभुता नहीं करता? और क्या तेरे हाथ में ऐसा बल और पराक्रम नहीं है कि तेरा सामना कोई नहीं कर सकता? यह भी देखें: 1 इतिहास 29:11-12व्यवस्थाविवरण 4:39दानिय्येल 4:17हे हमारे परमेश्वर! क्या तूने इस देश के निवासियों को अपनी प्रजा इस्राएल के सामने से निकालकर इन्हें अपने मित्र अब्राहम के वंश को सदा के लिये नहीं दे दिया? (याकू. 2:23) यह भी देखें: याकूब 2:23यशायाह 41:8उत्पत्ति 12:7वे इसमें बस गए और इसमें तेरे नाम का एक पवित्रस्थान बनाकर कहा, यह भी देखें: 2 इतिहास 2:42 इतिहास 6:10‘यदि तलवार या मरी अथवा अकाल या और कोई विपत्ति हम पर पड़े, तो भी हम इसी भवन के सामने और तेरे सामने (तेरा नाम तो इस भवन में बसा है) खड़े होकर, अपने क्लेश के कारण तेरी दुहाई देंगे और तू सुनकर बचाएगा।’ यह भी देखें: 2 इतिहास 6:28-301 राजाओं 8:332 इतिहास 6:20और अब अम्मोनी और मोआबी और सेईर के पहाड़ी देश के लोग जिन पर तूने इस्राएल को मिस्र देश से आते समय चढ़ाई करने न दिया, और वे उनकी ओर से मुड़ गए और उनका विनाश न किया, यह भी देखें: व्यवस्थाविवरण 2:4-5व्यवस्थाविवरण 2:19व्यवस्थाविवरण 2:9देख, वे ही लोग तेरे दिए हुए अधिकार के इस देश में से जिसका अधिकार तूने हमें दिया है, हमको निकालकर कैसा बदला हमें दे रहे हैं। यह भी देखें: स्तोत्र ग्रन्थ 83:3-12नीतिवचन 17:13यिर्मयाह 18:20हे हमारे परमेश्वर, क्या तू उनका न्याय न करेगा? यह जो बड़ी भीड़ हम पर चढ़ाई कर रही है, उसके सामने हमारा तो बस नहीं चलता और हमें कुछ सूझता नहीं कि क्या करना चाहिये? परन्तु हमारी आँखें तेरी ओर लगी हैं।” यह भी देखें: स्तोत्र ग्रन्थ 121:1-2स्तोत्र ग्रन्थ 25:15स्तोत्र ग्रन्थ 141:8और सब यहूदी अपने-अपने बाल-बच्चों, स्त्रियों और पुत्रों समेत यहोवा के सम्मुख खड़े रहे। यह भी देखें: एज्रा 10:1योना 3:5प्रेरित-चरित 21:5तब आसाप के वंश में से यहजीएल नामक एक लेवीय जो जकर्याह का पुत्र और बनायाह का पोता और मत्तन्याह के पुत्र यीएल का परपोता था, उसमें मण्डली के बीच यहोवा का आत्मा समाया। यह भी देखें: 2 इतिहास 15:12 इतिहास 24:20दानिय्येल 9:20-21तब वह कहने लगा, “हे सब यहूदियों, हे यरूशलेम के रहनेवालों, हे राजा यहोशापात, तुम सब ध्यान दो; यहोवा तुम से यह कहता है, ‘तुम इस बड़ी भीड़ से मत डरो और तुम्हारा मन कच्चा न हो; क्योंकि युद्ध तुम्हारा नहीं, परमेश्वर का है। यह भी देखें: 2 इतिहास 32:7-8व्यवस्थाविवरण 31:6निर्गमन 14:13-14कल उनका सामना करने को जाना। देखो वे सीस की चढ़ाई पर चढ़े आते हैं और यरूएल नामक जंगल के सामने नाले के सिरे पर तुम्हें मिलेंगे। इस लड़ाई में तुम्हें लड़ना न होगा; हे यहूदा, और हे यरूशलेम, ठहरे रहना, और खड़े रहकर यहोवा की ओर से अपना बचाव देखना;’ मत डरो, और तुम्हारा मन कच्चा न हो; कल उनका सामना करने को चलना और यहोवा तुम्हारे साथ रहेगा।” यह भी देखें: निर्गमन 14:13-142 इतिहास 15:2यशायाह 41:10तब यहोशापात भूमि की ओर मुँह करके झुका और सब यहूदियों और यरूशलेम के निवासियों ने यहोवा के सामने गिरकर यहोवा को दण्डवत् किया। यह भी देखें: निर्गमन 4:312 इतिहास 7:3उत्पत्ति 24:26कहातियों और कोरहियों में से कुछ लेवीय खड़े होकर इस्राएल के परमेश्वर यहोवा की स्तुति अत्यन्त ऊँचे स्वर से करने लगे। यह भी देखें: 1 इतिहास 16:51 इतिहास 15:16-221 इतिहास 16:42वे सवेरे उठकर तकोआ के जंगल की ओर निकल गए; और चलते समय यहोशापात ने खड़े होकर कहा, “हे यहूदियों, हे यरूशलेम के निवासियों, मेरी सुनो, अपने परमेश्वर यहोवा पर विश्वास रखो, तब तुम स्थिर रहोगे; उसके नबियों पर विश्वास करो, तब तुम कृतार्थ हो जाओगे।” यह भी देखें: रोमियों 8:31योहन 11:40योहन 14:1तब उसने प्रजा के साथ सम्मति करके कितनों को ठहराया, जो कि पवित्रता से शोभायमान होकर हथियार-बन्दों के आगे-आगे चलते हुए यहोवा के गीत गाएँ, और यह कहते हुए उसकी स्तुति करें, “यहोवा का धन्यवाद करो, क्योंकि उसकी करुणा सदा की है।” यह भी देखें: स्तोत्र ग्रन्थ 107:1स्तोत्र ग्रन्थ 106:12 इतिहास 5:13जिस समय वे गाकर स्तुति करने लगे, उसी समय यहोवा ने अम्मोनियों, मोआबियों और सेईर के पहाड़ी देश के लोगों पर जो यहूदा के विरुद्ध आ रहे थे, घातकों को बैठा दिया और वे मारे गए। यह भी देखें: 1 शमूएल 14:20यहेजकेल 38:212 राजाओं 6:17क्योंकि अम्मोनियों और मोआबियों ने सेईर के पहाड़ी देश के निवासियों को डराने और सत्यानाश करने के लिये उन पर चढ़ाई की, और जब वे सेईर के पहाड़ी देश के निवासियों का अन्त कर चुके, तब उन सभी ने एक दूसरे का नाश करने में हाथ लगाया। यह भी देखें: न्यायियों 7:221 शमूएल 14:20यहेजकेल 35:2-3जब यहूदियों ने जंगल की चौकी पर पहुँचकर उस भीड़ की ओर दृष्टि की, तब क्या देखा कि वे भूमि पर पड़े हुए शव हैं; और कोई नहीं बचा। यह भी देखें: यशायाह 37:361 इतिहास 5:22निर्गमन 14:30तब यहोशापात और उसकी प्रजा लूट लेने को गए और शवों के बीच बहुत सी सम्पत्ति और मनभावने गहने मिले; उन्होंने इतने गहने उतार लिये कि उनको न ले जा सके, वरन् लूट इतनी मिली, कि बटोरते-बटोरते तीन दिन बीत गए। यह भी देखें: 1 शमूएल 30:19-202 राजाओं 7:9-16गिनती 31:15चौथे दिन वे बराका नामक तराई में इकट्ठे हुए और वहाँ यहोवा का धन्यवाद किया; इस कारण उस स्थान का नाम बराका की तराई पड़ा, जो आज तक है। यह भी देखें: निर्गमन 17:15यशायाह 62:4उत्पत्ति 32:20तब वे, अर्थात् यहूदा और यरूशलेम नगर के सब पुरुष और उनके आगे-आगे यहोशापात, आनन्द के साथ यरूशलेम लौटे क्योंकि यहोवा ने उन्हें शत्रुओं पर आनन्दित किया था। यह भी देखें: नहेम्याह 12:43यशायाह 51:11स्तोत्र ग्रन्थ 30:1अतः वे सारंगियाँ, वीणाएँ और तुरहियां बजाते हुए यरूशलेम में यहोवा के भवन को आए। यह भी देखें: प्रकाशितवाक्य 14:2-3स्तोत्र ग्रन्थ 149:31 इतिहास 23:5और जब देश-देश के सब राज्यों के लोगों ने सुना कि इस्राएल के शत्रुओं से यहोवा लड़ा, तब उनके मन में परमेश्वर का डर समा गया। यह भी देखें: 2 इतिहास 17:102 राजाओं 7:6निर्गमन 23:27इस प्रकार यहोशापात के राज्य को चैन मिला, क्योंकि उसके परमेश्वर ने उसको चारों ओर से विश्राम दिया। यह भी देखें: 2 इतिहास 15:152 इतिहास 14:6-72 शमूएल 7:1अतः यहोशापात ने यहूदा पर राज्य किया। जब वह राज्य करने लगा तब वह पैंतीस वर्ष का था, और पच्चीस वर्ष तक यरूशलेम में राज्य करता रहा। और उसकी माता का नाम अजूबा था, जो शिल्ही की बेटी थी। यह भी देखें: 1 राजाओं 22:41-44वह अपने पिता आसा की लीक पर चला और उससे न मुड़ा, अर्थात् जो यहोवा की दृष्टि में ठीक है वही वह करता रहा। यह भी देखें: 2 इतिहास 16:7-122 इतिहास 14:2-5स्तोत्र ग्रन्थ 36:3तो भी ऊँचे स्थान ढाए न गए, वरन् अब तक प्रजा के लोगों ने अपना मन अपने पितरों के परमेश्वर की ओर न लगाया था। यह भी देखें: 2 इतिहास 17:62 इतिहास 19:32 इतिहास 12:14आदि से अन्त तक यहोशापात के और काम, हनानी के पुत्र येहू के विषय उस वृत्तान्त में लिखे हैं, जो इस्राएल के राजाओं के वृत्तान्त में पाया जाता है। यह भी देखें: 1 राजाओं 16:12 इतिहास 19:21 राजाओं 16:7इसके बाद यहूदा के राजा यहोशापात ने इस्राएल के राजा अहज्याह से जो बड़ी दुष्टता करता था, मेल किया। यह भी देखें: 1 राजाओं 22:48-492 राजाओं 1:2-16अर्थात् उसने उसके साथ इसलिए मेल किया कि तर्शीश जाने को जहाज बनवाए, और उन्होंने ऐसे जहाज एस्योनगेबेर में बनवाए। यह भी देखें: 1 राजाओं 9:262 इतिहास 9:211 राजाओं 10:22तब दोदावाह के पुत्र मारेशावासी एलीएजेर ने यहोशापात के विरुद्ध यह नबूवत की, “तूने जो अहज्याह से मेल किया, इस कारण यहोवा तेरी बनवाई हुई वस्तुओं को तोड़ डालेगा।” अतः जहाज टूट गए और तर्शीश को न जा सके। यह भी देखें: नीतिवचन 13:202 इतिहास 19:2यहोशू 7:11-12
यह भी देखें: क्रॉस-संदर्भ OpenBible.info (CC BY) से, आंशिक रूप से Treasury of Scripture Knowledge (सार्वजनिक डोमेन) पर आधारित।
मनन
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टिप्पणियाँ · हेडॉक (1859, सार्वजनिक डोमेन)23 टिप्पणियाँ
टिप्पणियाँ अंग्रेज़ी में फ़ा. जॉर्ज लियो हेडॉक की 19वीं सदी की काथलिक टीका, जैसी प्रकाशित हुई।
ये टिप्पणियाँ अपने समय के विवादों को बनाए रखती हैं: कुछ यहूदी लोगों या अन्य ख्रीस्तीयों के बारे में कठोरता से बोलती हैं। आज कलीसिया कुछ और सिखाती है: ख्रीस्त की मृत्यु के लिए यहूदी लोगों को दोषी नहीं ठहराया जा सकता (नोस्त्रा एताते 4; धर्मशिक्षा 597–598), और अन्य समुदायों के ख्रीस्तीय प्रभु में हमारे भाई-बहन हैं (उनितातिस रेदिन्तेग्रात्सियो 3)। ख्रीस्तीय एकता
2 इतिहास 20:1
Ver. 1. Of the Ammonites; people sprung from them. Those who explain the Psalm lxxxii. of this war, find many nations mentioned. Some of these, not daring to appear openly, assumed the name of Ammonites. Perhaps we should read (C.) Mannim. H. --- Sept. "the Mineans," who dwelt in Arabia Felix, upon the Red Sea, (Pliny vi. 28.) or rather the Maonians, in the environs of Gaza. C.
--- Some MSS. and Latin editions have "Idumeans," which is conformable to v.
11, 23, and S. Jerom Trad. Lyran, &c. M.
↑ 12 इतिहास 20:2
Ver. 2. Sea of Sodom, (H.) or the Red Sea. D. --- Syria, which comprised the country of Ammon. M. --- Perhaps Edom might rather have been in the text, as we find no Syrians in this war, but many of the Idumeans. C. --- Adom and Arom, (Syria. H.) have often been confounded.
4 K. xvi. 6. C. --- Asasonthamar, "the palm-tree cottage," (Bochart) between Jericho and the Dead Sea.
↑ 22 इतिहास 20:3
Ver. 3. Juda. The whole kingdom was concerned. Sometimes a fast was proclaimed for one city.
3 K. xxi. 9. Jonas iii. 7. C. --- They were accustomed to fast, not only to subdue the flesh, but also for other necessities. W.
↑ 32 इतिहास 20:4
Ver. 4. Prot. "to ask help of." H. --- Cities. Here we have an example of a pilgrimage to a holy place, as God is more willing to hear the virtuous in one place than in another. C. vi. 7. &c. W.
↑ 42 इतिहास 20:5
Ver. 5. New court of the priests. Why it is so called, does not appear. C. ---
Some understand the court for the women; (Salien) others, that for Gentiles.
Le Clerc. --- Probably some of the courts had been found too spacious after the schism, and had been neglected; but now, as many had returned to serve the Lord in the dominions of Josaphat, he had made some repairs. T.
↑ 52 इतिहास 20:7
Ver. 7. All, or the greatest part. Heb. "drive out the inhabitants." H.
↑ 72 इतिहास 20:9
Ver. 9. Sword of. Prot. " as the sword, judgment, or," &c. Sept. "the sword, judgment, death, famine." All these are sent in punishment of sin. H. --- The sword of the enemy is a judgment of God. M.
↑ 92 इतिहास 20:12
Ver. 12. Judge and punish them, as they fight against thee? C. --- Enough. Yet we read that Josaphat had above a million soldiers; and he knew that his father had discomfited a greater army of Zara with half the forces. He thus puts us in mind that no power can stand against God's will; and he endeavours, by humility, to obtain the protection of heaven. The invading army must, however, have been very numerous, to extort these expressions from a potent king, and to have thrown his whole people into such consternation. It could hardly be less than that of Zara; and thus, in the space of a century, above two millions and a half of idolaters perished by the hand of God, without Juda losing a single man, v. 29. C. xiii. 17. H.
↑ 122 इतिहास 20:13
Ver. 13. Children. Even the little infants were deprived of the breasts, on such emergencies, that their cries might be more affecting. H. Joel ii. 16. Judit. iv. 8.
--- The pagans of Ninive even made the cattle also fast. Jonas iii. 7. C. S. Amb.
ser. 40. T.
↑ 132 इतिहास 20:14
Ver. 14. Spirit of prophecy. M. --- Jahaziel is known only by this event. C.
↑ 142 इतिहास 20:16
Ver. 16. Six. Some translate "flowry ascent." C. --- Prot. "the cliff of Ziz." H. --- If it had been Zin, we might understand the desert of stony Arabia, where Ptolemy places the town of Ziza. C.
--- But we may recollect that the army was already advanced as far as Engaddi; (v. 2,) so that it seems to have lain nearer Jerusalem. H. --- Jeruel, "the fear of God," which name was given to the place, in consequence of the panic with which God struck the enemy. S. Jerom. M.
↑ 162 इतिहास 20:19
Ver. 19. High. Rejoicing at the promised deliverance. C.
↑ 192 इतिहास 20:20
Ver. 20. Thecua, two mile east of Bethlehem, on the road to Jeruel. Adric. M. ---
Believe. Faith is the foundation of all good works; (Heb. xi.) but not alone sufficient, as here the people fasted and prayed, and would have fought, if God had not dispensed with them. See Jos. xxiii. W. ---
We may also translate Heb. "trust."
↑ 202 इतिहास 20:21
Ver. 21. Ever. This was usually sung in times of joy. C. v. 13. The army seemed thus to be returning victorious. C.
↑ 212 इतिहास 20:22
Ver. 22. Ambushments, placed by the Moabites, (M.) and Ammonites, (H.) against Juda. Some detachments of Mount Seir, perhaps, coming suddenly on them, were taken for foes, and slaughtered. H.
↑ 222 इतिहास 20:24
Ver. 24. Tower. Maspha, in the tribe of Benjamin, (C.) or some other (H.) eminence. M.
↑ 242 इतिहास 20:25
Ver. 25. Insomuch. Heb. and Sept. "Three days passed, while they gathered the spoils, because it was great," (H.) "without weight," or estimation. C.
↑ 252 इतिहास 20:26
Ver. 26. Blessing. SS. Jerom and Epiphanius place Caphar-barucha, "the field of blessing," near Hebron, on the east. Hither Abraham attended the Lord, when he was going to destroy Sodom.
Epist. Paulæ.
↑ 262 इतिहास 20:29
Ver. 29. Lands, in the vicinity. M. --- Israel, as he had lately treated Zara. C. xiv.
13. H.
↑ 292 इतिहास 20:33
Ver. 33. Places, erected in honour of God, but displeasing to him. C. xvii. 6. H.
--- The good king perhaps attempted to take these also away, but was obliged to desist by the rebellious people.
M. --- Hence we find that they are here blamed. H. --- They would not conform exactly to the law, (Lev. xvii. 3. T.) and the king was not able to bring all to perfection. W. --- "It is better to pass over....vices, than to shew which we cannot subdue." Tacit. An. iii.
↑ 332 इतिहास 20:34
Ver. 34. Which. Sept. "who wrote a book of the kings of Israel." H. --- Jehu rebuked Josaphat, C. xix. C. --- His book is not extant. M.
↑ 342 इतिहास 20:35
Ver. 35. Things: the victory over Ammon, &c. H. --- Wicked. See C. xvi. 3.
↑ 352 इतिहास 20:36
Ver. 36. Tharsis; probably Cilicia, (C.) or some part of the ocean. --- Asiongaber was on the Red Sea; and ships would not have been built there, to trade on the Mediterranean. C. ix. 21. T.
↑ 36लाइसेंस: Notes by Fr. George Leo Haydock (1774–1849), from the Douay-Rheims Bible with Haydock's commentary (first ed. Thomas Haydock, Manchester/Dublin, 1811–1814; New York: Edward Dunigan & Brother, 1859); New Testament notes compiled with Fr. Benedict Rayment. Public domain. Digital text: "The Haydock Bible", Internet Archive (archive.org/details/TheHaydockBible), uploaded 2011 under the Public Domain Mark. · आभार और लाइसेंस