AI-generated illustration: a rocky stream flowing among wildflowers in a valley at sunset.
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यशायाह

29
बाइबल पाठ

कृत्रिम आवाज़ (AI)

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हाय, अरीएल, अरीएल, हाय उस नगर पर जिसमें दाऊद छावनी किए हुए रहा! वर्ष पर वर्ष जोड़ते जाओ, उत्सव के पर्व अपने-अपने समय पर मनाते जाओ। यह भी देखें: आमोस 4:4-52 शमूएल 5:9मीका 6:6-7तो भी मैं तो अरीएल को सकेती में डालूँगा, वहाँ रोना पीटना रहेगा, और वह मेरी दृष्टि में सचमुच अरीएल सा ठहरेगा। यह भी देखें: यशायाह 5:25-30यशायाह 10:32यशायाह 3:26मैं चारों ओर तेरे विरुद्ध छावनी करके तुझे कोटों से घेर लूँगा, और तेरे विरुद्ध गढ़ भी बनाऊँगा। यह भी देखें: लूकस 19:43-44यहेजकेल 21:222 राजाओं 25:1-4तब तू गिराकर भूमि में डाला जाएगा, और धूल पर से बोलेगा, और तेरी बात भूमि से धीमी-धीमी सुनाई देगी; तेरा बोल भूमि पर से प्रेत का सा होगा, और तू धूल से गुनगुनाकर बोलेगा। यह भी देखें: यशायाह 8:19स्तोत्र ग्रन्थ 44:25यशायाह 3:8तब तेरे परदेशी बैरियों की भीड़ सूक्ष्म धूल के समान, और उन भयानक लोगों की भीड़ भूसे के समान उड़ाई जाएगी। यह भी देखें: 1 थिस्सलुनीकियों 5:3यशायाह 37:36यशायाह 30:13सेनाओं का यहोवा अचानक बादल गरजाता, भूमि को कँपाता, और महाध्वनि करता, बवण्डर और आँधी चलाता, और नाश करनेवाली अग्नि भड़काता हुआ उसके पास आएगा। यह भी देखें: मारकुस 13:81 शमूएल 2:10मत्ती 24:7और जातियों की सारी भीड़ जो अरीएल से युद्ध करेगी, और जितने लोग उसके और उसके गढ़ के विरुद्ध लड़ेंगे और उसको सकेती में डालेंगे, वे सब रात के देखे हुए स्वप्न के समान ठहरेंगे। यह भी देखें: अय्यूब 20:8मीका 4:11-12जकर्याह 12:9और जैसा कोई भूखा स्वप्न में तो देखता है कि वह खा रहा है, परन्तु जागकर देखता है कि उसका पेट भूखा ही है, या कोई प्यासा स्वप्न में देखें की वह पी रहा है, परन्तु जागकर देखता है कि उसका गला सूखा जाता है और वह प्यासा मर रहा है; वैसी ही उन सब जातियों की भीड़ की दशा होगी जो सिय्योन पर्वत से युद्ध करेंगी। यह भी देखें: यशायाह 44:12स्तोत्र ग्रन्थ 73:20यशायाह 10:7-16ठहर जाओ और चकित हो! भोग-विलास करो और अंधे हो जाओ! वे मतवाले तो हैं, परन्तु दाखमधु से नहीं, वे डगमगाते तो हैं, परन्तु मदिरा पीने से नहीं! यह भी देखें: यशायाह 51:21-22यशायाह 19:14यशायाह 33:13-14यहोवा ने तुम को भारी नींद में डाल दिया है और उसने तुम्हारी नबीरूपी आँखों को बन्द कर दिया है और तुम्हारे दर्शीरूपी सिरों पर परदा डाला है। (रोम. 11:8) यह भी देखें: रोमियों 11:8यशायाह 44:182 थिस्सलुनीकियों 2:9-12इसलिए सारे दर्शन तुम्हारे लिये एक लपेटी और मुहरबन्द की हुई पुस्तक की बातों के समान हैं, जिसे कोई पढ़े-लिखे मनुष्य को यह कहकर दे, “इसे पढ़”, और वह कहे, “मैं नहीं पढ़ सकता क्योंकि इस पर मुहरबन्द की हुई है।” (प्रका. 5:1-3) यह भी देखें: मत्ती 13:11दानिय्येल 12:4यशायाह 8:16तब वही पुस्तक अनपढ़ को यह कहकर दी जाए, “इसे पढ़,” और वह कहे, “मैं तो अनपढ़ हूँ।” यह भी देखें: योहन 7:15-16यशायाह 29:18यिर्मयाह 5:4प्रभु ने कहा, “ये लोग जो मुँह से मेरा आदर करते हुए समीप आते परन्तु अपना मन मुझसे दूर रखते हैं, और जो केवल मनुष्यों की आज्ञा सुन सुनकर मेरा भय मानते हैं, (मत्ती 15:8,9, मर. 7:6,7) यह भी देखें: यिर्मयाह 12:2यहेजकेल 33:31-33मारकुस 7:2-13इस कारण सुन, मैं इनके साथ अद्भुत काम वरन् अति अद्भुत और अचम्भे का काम करूँगा; तब इनके बुद्धिमानों की बुद्धि नष्ट होगी, और इनके प्रवीणों की प्रवीणता जाती रहेगी।” (1 कुरि. 1:19) यह भी देखें: हबक्कूक 1:51 कुरिन्थियों 1:19-24यशायाह 28:21हाय उन पर जो अपनी युक्ति को यहोवा से छिपाने का बड़ा यत्न करते, और अपने काम अंधेरे में करके कहते हैं, “हमको कौन देखता है? हमको कौन जानता है?” यह भी देखें: यहेजकेल 8:12यशायाह 47:10यशायाह 30:1तुम्हारी कैसी उलटी समझ है! क्या कुम्हार मिट्टी के तुल्य गिना जाएगा? क्या बनाई हुई वस्तु अपने कर्ता के विषय कहे “उसने मुझे नहीं बनाया,” या रची हुई वस्तु अपने रचनेवाले के विषय कहे, “वह कुछ समझ नहीं रखता?” (रोम. 9:20,21) यह भी देखें: रोमियों 9:19-21यशायाह 64:8यशायाह 45:9-11क्या अब थोड़े ही दिनों के बीतने पर लबानोन फिर फलदाई बारी न बन जाएगा, और फलदाई बारी जंगल न गिनी जाएगी? यह भी देखें: यशायाह 32:15मत्ती 19:30इब्रानियों 10:37उस समय बहरे पुस्तक की बातें सुनने लगेंगे, और अंधे जिन्हें अभी कुछ नहीं सूझता, वे देखने लगेंगे। (मत्ती 11:5, प्रेरि. 26:18) यह भी देखें: यशायाह 35:5मत्ती 11:5नीतिवचन 20:12नम्र लोग यहोवा के कारण फिर आनन्दित होंगे, और दरिद्र मनुष्य इस्राएल के पवित्र के कारण मगन होंगे। यह भी देखें: याकूब 2:5यशायाह 61:1मत्ती 11:29क्योंकि उपद्रवी फिर न रहेंगे और ठट्ठा करनेवालों का अन्त होगा, और जो अनर्थ करने के लिये जागते रहते हैं, यह भी देखें: मीका 2:1यशायाह 28:14-22यशायाह 13:3जो मनुष्यों को बातों में फँसाते हैं, और जो सभा में उलाहना देते उनके लिये फंदा लगाते, और धर्म को व्यर्थ बात के द्वारा बिगाड़ देते हैं, वे सब मिट जाएँगे। यह भी देखें: आमोस 5:10-12याकूब 5:6प्रेरित-चरित 3:14इस कारण अब्राहम का छुड़ानेवाला यहोवा, याकूब के घराने के विषय यह कहता है, “याकूब को फिर लज्जित होना न पड़ेगा, उसका मुख फिर नीचा न होगा। यह भी देखें: यशायाह 51:2यिर्मयाह 30:10यशायाह 45:17क्योंकि जब उसके सन्तान मेरा काम देखेंगे, जो मैं उनके बीच में करूँगा, तब वे मेरे नाम को पवित्र ठहराएँगे, वे याकूब के पवित्र को पवित्र मानेंगे, और इस्राएल के परमेश्वर का अति भय मानेंगे। यह भी देखें: यशायाह 19:25इफिसियों 2:10यशायाह 8:13उस समय जिनका मन भटका हो वे बुद्धि प्राप्त करेंगे, और जो कुड़कुड़ाते हैं वह शिक्षा ग्रहण करेंगे।” यह भी देखें: इब्रानियों 5:2यशायाह 28:7लूकस 15:17-19

यह भी देखें: क्रॉस-संदर्भ OpenBible.info (CC BY) से, आंशिक रूप से Treasury of Scripture Knowledge (सार्वजनिक डोमेन) पर आधारित।

टिप्पणियाँ · हेडॉक (1859, सार्वजनिक डोमेन)18 टिप्पणियाँ

टिप्पणियाँ अंग्रेज़ी में फ़ा. जॉर्ज लियो हेडॉक की 19वीं सदी की काथलिक टीका, जैसी प्रकाशित हुई।

ये टिप्पणियाँ अपने समय के विवादों को बनाए रखती हैं: कुछ यहूदी लोगों या अन्य ख्रीस्तीयों के बारे में कठोरता से बोलती हैं। आज कलीसिया कुछ और सिखाती है: ख्रीस्त की मृत्यु के लिए यहूदी लोगों को दोषी नहीं ठहराया जा सकता (नोस्त्रा एताते 4; धर्मशिक्षा 597–598), और अन्य समुदायों के ख्रीस्तीय प्रभु में हमारे भाई-बहन हैं (उनितातिस रेदिन्तेग्रात्सियो 3)। ख्रीस्तीय एकता

यशायाह 29:1

Ver. 1. Ariel. This word signifies the lion of God, and here is taken for the strong city of Jerusalem. Ch. --- It was destroyed by the Chaldees, (4 K. xxv.) and still more by the Romans, 40

years after. C. W. --- Ezechiel (xliii. 15.) styles the altar of holocausts Ariel. ---

Took. Sept. The Heb. means also "inhabited." H. --- Sion was called the city of David. C. --- The invasion (H.) of Sennacherib is here foretold (Forcr.) two years before. C. xxxi. 10.

↑ 1

यशायाह 29:2

Ver. 2. Trench. Sennacherib did not besiege the city. C. xxxvii. 33. But he made preparations for it, and his sentiments are expressed, (C.) together with the fatal consequences which he felt, when his army was offered up (H.) as a victim on the altar of holocausts. v. 1.

↑ 2

यशायाह 29:3

Ver. 3. Circle. Thus provisions were cut off. C.

↑ 3

यशायाह 29:4

Ver. 4. The Python. The diviner by a spirit. Ch. --- Jerusalem shall hardly dare to make a noise.

C.

↑ 4

यशायाह 29:5

Ver. 5. Away. The numbers, and speedy downfall of the Assyrians, are described. H.

↑ 5

यशायाह 29:6

Ver. 6. Thunder. Ps. lxxv. 7. Tharaca was coming to assist Ezechias. C. xxxvii.

36. C.

↑ 6

यशायाह 29:7

Ver. 7. It, in their dreams.

↑ 7

यशायाह 29:9

Ver. 9. Be, &c. Though God spared the city, for the sake of the good, He will not fail to punish scoffers, in due time, as He now declares. H. --- Drunkenness.

You shall suffer for your crimes, (C. xxviii. 7.) or be affrighted.

↑ 9

यशायाह 29:10

Ver. 10. Sleep, or compunction, (Rom. xi. 8. C.) denoting their obstinacy. S.

Chrys. --- Visions.

Prot. "the seers." H. --- The Jews perceived but very imperfectly the meaning of the prophets, when they spoke of a future Redeemer, God and man. They are now more infatuated, (C.) having a veil on their hearts. 1 Cor. iv. 3. Both learned and ignorant refuse to believe, excusing themselves. v. 12. H. --- The more they read the Scriptures, the less do they understand. C.

↑ 10

यशायाह 29:13

Ver. 13. Men. Our Saviour applies this to the Jews. The evangelists follow the Sept. Mat. xv. 8.

Mark vii. 6. C. --- "This people approacheth to me, (Grabe adds, with its mouth and with) their lips they honour me, but their heart is far from me. Yet in vain do they honour me, teaching the commands of men and doctrines." H. --- They still continue to corrupt God's word by their false interpretations.

↑ 13

यशायाह 29:14

Ver. 14. Hid. At the approach of Sennacherib, the politicians were confounded.

But the obstinate blindness of the Jews in the midst of such a blaze of predictions, which are evidently accomplished in Jesus Christ, excites admiration. That their ancestors should have found them obscure, is not so wonderful. The prophets foretold this event; and the reprobation of the synagogue, which had been so highly favoured, is a proof of the truth of the Christian religion. 1

Cor. i. 18. C.

↑ 14

यशायाह 29:16

Ver. 16. Not. So it is in vain to think that your hypocrisy or excuses will deceive God. C. xxviii.

15. H.

↑ 16

यशायाह 29:17

Ver. 17. Charmel. This word signifies a fruitful field. Ch. --- Shall Carmel be presently a forest or barren mountain? No. But I will work a greater miracle. v.

18. Jerusalem shall rejoice, and Sennacherib shall be filled with dismay.

↑ 17

यशायाह 29:19

Ver. 19. Rejoice. Our Saviour alludes to this text, (Lu. vii. 22.) which, under the figure of the deliverance from captivity, points out the vocation of the Gentiles.

C. xxxv. 5. and xlii. 7. 19.

↑ 19

यशायाह 29:20

Ver. 20. Prevail. Wicked princes, scoffers, &c. (v. 10. C. xxviii. 7.) shall be exterminated.

Ezechias promoted piety with greater zeal after his deliverance.

↑ 20

यशायाह 29:21

Ver. 21. Gate. False prophets rose up against those who spoke the truth, and condemned them unjustly. C. --- The just, Christ. M.

↑ 21

यशायाह 29:23

Ver. 23. Israel. They shall serve God with fidelity and gratitude. C. xxx. 22. C.

↑ 23

यशायाह 29:24

Ver. 24. Murmured. Magicians, (Grot.) or false sages. C. xxviii. 9. C.

↑ 24

लाइसेंस: Notes by Fr. George Leo Haydock (1774–1849), from the Douay-Rheims Bible with Haydock's commentary (first ed. Thomas Haydock, Manchester/Dublin, 1811–1814; New York: Edward Dunigan & Brother, 1859); New Testament notes compiled with Fr. Benedict Rayment. Public domain. Digital text: "The Haydock Bible", Internet Archive (archive.org/details/TheHaydockBible), uploaded 2011 under the Public Domain Mark. · आभार और लाइसेंस

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