
यशायाह · IRV-HI
यशायाह
30
बाइबल पाठकृत्रिम आवाज़ (AI)
यहोवा की यह वाणी है, “हाय उन बलवा करनेवाले लड़कों पर जो युक्ति तो करते परन्तु मेरी ओर से नहीं; वाचा तो बाँधते परन्तु मेरी आत्मा के सिखाए नहीं; और इस प्रकार पाप पर पाप बढ़ाते हैं। यह भी देखें: यशायाह 65:2यशायाह 1:2होशे 7:13वे मुझसे बिन पूछे मिस्र को जाते हैं कि फ़िरौन की रक्षा में रहे और मिस्र की छाया में शरण लें। यह भी देखें: यशायाह 36:6गिनती 27:21व्यवस्थाविवरण 28:68इसलिए फ़िरौन का शरणस्थान तुम्हारी लज्जा का, और मिस्र की छाया में शरण लेना तुम्हारी निन्दा का कारण होगा। यह भी देखें: यशायाह 20:5यिर्मयाह 17:5-6रोमियों 10:11उसके हाकिम सोअन में आए तो हैं और उसके दूत अब हानेस में पहुँचे हैं। यह भी देखें: यशायाह 19:11यशायाह 57:9यिर्मयाह 43:7वे सब एक ऐसी जाति के कारण लज्जित होंगे जिससे उनका कुछ लाभ न होगा, जो सहायता और लाभ के बदले लज्जा और नामधराई का कारण होगी।” यह भी देखें: यिर्मयाह 2:36यशायाह 30:7यशायाह 30:16दक्षिण देश के पशुओं के विषय भारी वचन। वे अपनी धन-सम्पत्ति को जवान गदहों की पीठ पर, और अपने खजानों को ऊँटों के कूबड़ों पर लादे हुए, संकट और सकेती के देश में होकर, जहाँ सिंह और सिंहनी, नाग और उड़नेवाले तेज विषधर सर्प रहते हैं, उन लोगों के पास जा रहे हैं जिनसे उनको लाभ न होगा। यह भी देखें: व्यवस्थाविवरण 8:15यशायाह 46:1-2यिर्मयाह 11:4क्योंकि मिस्र की सहायता व्यर्थ और निकम्मी है, इस कारण मैंने उसको ‘बैठी रहनेवाली रहब’ कहा है। यह भी देखें: यशायाह 2:22होशे 5:13यशायाह 31:1-5अब जाकर इसको उनके सामने पटिया पर खोद, और पुस्तक में लिख, कि वह भविष्य के लिये वरन् सदा के लिये साक्षी बनी रहे। यह भी देखें: व्यवस्थाविवरण 31:22हबक्कूक 2:2यशायाह 8:1क्योंकि वे बलवा करनेवाले लोग और झूठ बोलनेवाले लड़के हैं जो यहोवा की शिक्षा को सुनना नहीं चाहते। यह भी देखें: यशायाह 30:1प्रेरित-चरित 7:51जकर्याह 7:11-12वे दर्शियों से कहते हैं, “दर्शी मत बनो; और नबियों से कहते हैं, हमारे लिये ठीक नबूवत मत करो; हम से चिकनी-चुपड़ी बातें बोलो, धोखा देनेवाली नबूवत करो। यह भी देखें: रोमियों 16:18यहेजकेल 13:7-10यिर्मयाह 11:21मार्ग से मुड़ो, पथ से हटो, और इस्राएल के पवित्र को हमारे सामने से दूर करो।” यह भी देखें: रोमियों 8:7योहन 15:23-24अय्यूब 21:14इस कारण इस्राएल का पवित्र यह कहता है, “तुम लोग जो मेरे इस वचन को निकम्मा जानते और अंधेर और कुटिलता पर भरोसा करके उन्हीं पर टेक लगाते हो; यह भी देखें: यशायाह 31:1-3यशायाह 5:24आमोस 2:4इस कारण यह अधर्म तुम्हारे लिये ऊँची दीवार का टूटा हुआ भाग होगा जो फटकर गिरने पर हो, और वह अचानक पल भर में टूटकर गिर पड़ेगा, यह भी देखें: यहेजकेल 13:10-15यशायाह 29:51 राजाओं 20:30और कुम्हार के बर्तन के समान फूटकर ऐसा चकनाचूर होगा कि उसके टुकड़ों का एक ठीकरा भी न मिलेगा जिससे अँगीठी में से आग ली जाए या हौद में से जल निकाला जाए।” यह भी देखें: स्तोत्र ग्रन्थ 2:9यिर्मयाह 19:10-11प्रकाशितवाक्य 2:27प्रभु यहोवा, इस्राएल का पवित्र यह कहता है, “लौट आने और शान्त रहने में तुम्हारा उद्धार है; शान्त रहने और भरोसा रखने में तुम्हारी वीरता है।” परन्तु तुम ने ऐसा नहीं किया, यह भी देखें: यशायाह 26:3-4यशायाह 32:17स्तोत्र ग्रन्थ 125:1-2तुम ने कहा, “नहीं, हम तो घोड़ों पर चढ़कर भागेंगे,” इसलिए तुम भागोगे; और यह भी कहा, “हम तेज सवारी पर चलेंगे,” इसलिए तुम्हारा पीछा करनेवाले उससे भी तेज होंगे। यह भी देखें: यशायाह 31:1यिर्मयाह 4:13व्यवस्थाविवरण 28:25एक ही की धमकी से एक हजार भागेंगे, और पाँच की धमकी से तुम ऐसा भागोगे कि अन्त में तुम पहाड़ की चोटी के डंडे या टीले के ऊपर की ध्वजा के समान रह जाओगे जो चिन्ह के लिये गाड़े जाते हैं। यह भी देखें: व्यवस्थाविवरण 28:25यहोशू 23:10लैव्यव्यवस्था 26:36तो भी यहोवा इसलिए विलम्ब करता है कि तुम पर अनुग्रह करे, और इसलिए ऊँचे उठेगा कि तुम पर दया करे। क्योंकि यहोवा न्यायी परमेश्वर है; क्या ही धन्य हैं वे जो उस पर आशा लगाए रहते हैं। यह भी देखें: 2 पतरस 3:9विलापगीत 3:25-26नीतिवचन 16:20हे सिय्योन के लोगों तुम यरूशलेम में बसे रहो; तुम फिर कभी न रोओगे, वह तुम्हारी दुहाई सुनते ही तुम पर निश्चय अनुग्रह करेगा: वह सुनते ही तुम्हारी मानेगा। यह भी देखें: यशायाह 60:20स्तोत्र ग्रन्थ 50:15यशायाह 65:24और चाहे प्रभु तुम्हें विपत्ति की रोटी और दुःख का जल भी दे, तो भी तुम्हारे उपदेशक फिर न छिपें, और तुम अपनी आँखों से अपने उपदेशकों को देखते रहोगे। यह भी देखें: 1 राजाओं 22:27स्तोत्र ग्रन्थ 80:5आमोस 8:11-12और जब कभी तुम दाहिनी या बायीं ओर मुड़ने लगो, तब तुम्हारे पीछे से यह वचन तुम्हारे कानों में पड़ेगा, “मार्ग यही है, इसी पर चलो।” यह भी देखें: स्तोत्र ग्रन्थ 32:8नीतिवचन 3:5-6यशायाह 58:11तब तुम वह चाँदी जिससे तुम्हारी खुदी हुई मूर्तियाँ मढ़ी हैं, और वह सोना जिससे तुम्हारी ढली हुई मूर्तियाँ आभूषित हैं, अशुद्ध करोगे। तुम उनको मैले कुचैले वस्त्र के समान फेंक दोगे और कहोगे, दूर हो। यह भी देखें: न्यायियों 17:3-4यशायाह 31:7यशायाह 46:6वह तुम्हारे लिये जल बरसाएगा कि तुम खेत में बीज बो सको, और भूमि की उपज भी उत्तम और बहुतायत से होगी। उस समय तुम्हारे जानवरों को लम्बी-चौड़ी चराई मिलेगी। यह भी देखें: जकर्याह 8:11-12स्तोत्र ग्रन्थ 65:9-13यशायाह 32:20और बैल और गदहे जो तुम्हारी खेती के काम में आएँगे, वे सूप और डलिया से फटका हुआ स्वादिष्ट चारा खाएँगे। यह भी देखें: उत्पत्ति 45:6व्यवस्थाविवरण 25:4मत्ती 3:12उस महासंहार के समय जब गुम्मट गिर पड़ेंगे, सब ऊँचे-ऊँचे पहाड़ों और पहाड़ियों पर नालियाँ और सोते पाए जाएँगे। यह भी देखें: यशायाह 35:6-7यशायाह 2:14-15यशायाह 43:19-20उस समय यहोवा अपनी प्रजा के लोगों का घाव बाँधेगा और उनकी चोट चंगा करेगा; तब चन्द्रमा का प्रकाश सूर्य का सा, और सूर्य का प्रकाश सात गुणा होगा, अर्थात् सप्ताह भर का प्रकाश एक दिन में होगा। यह भी देखें: यशायाह 60:19-20व्यवस्थाविवरण 32:39प्रकाशितवाक्य 22:5देखो, यहोवा दूर से चला आता है, उसका प्रकोप भड़क उठा है, और धुएँ का बादल उठ रहा है; उसके होंठ क्रोध से भरे हुए और उसकी जीभ भस्म करनेवाली आग के समान है। यह भी देखें: 2 थिस्सलुनीकियों 2:8सपन्याह 3:8स्तोत्र ग्रन्थ 18:7-9उसकी साँस ऐसी उमड़नेवाली नदी के समान है जो गले तक पहुँचती है; वह सब जातियों को नाश के सूप से फटकेगा, और देश-देश के लोगों को भटकाने के लिये उनके जबड़ों में लगाम लगाएगा यह भी देखें: यशायाह 37:292 थिस्सलुनीकियों 2:8यशायाह 11:4तब तुम पवित्र पर्व की रात का सा गीत गाओगे, और जैसा लोग यहोवा के पर्वत की ओर उससे मिलने को, जो इस्राएल की चट्टान है, बाँसुरी बजाते हुए जाते हैं, वैसे ही तुम्हारे मन में भी आनन्द होगा। यह भी देखें: स्तोत्र ग्रन्थ 42:4निर्गमन 15:1-21स्तोत्र ग्रन्थ 95:1-2और यहोवा अपनी प्रतापीवाणी सुनाएगा, और अपना क्रोध भड़काता और आग की लौ से भस्म करता हुआ, और प्रचण्ड आँधी और अति वर्षा और ओलों के साथ अपना भुजबल दिखाएगा। (भज. 18:13,14) यह भी देखें: यशायाह 29:6स्तोत्र ग्रन्थ 18:13-14यहोशू 10:11अश्शूर यहोवा के शब्द की शक्ति से नाश हो जाएगा, वह उसे सोंटे से मारेगा। यह भी देखें: यशायाह 9:4यशायाह 11:4यशायाह 10:5जब जब यहोवा उसको दण्ड देगा, तब-तब साथ ही डफ और वीणा बजेंगी; और वह हाथ बढ़ाकर उसको लगातार मारता रहेगा। यह भी देखें: यशायाह 11:15यशायाह 19:16यशायाह 2:19बहुत काल से तोपेत तैयार किया गया है, वह राजा ही के लिये ठहराया गया है, वह लम्बा-चौड़ा और गहरा भी बनाया गया है, वहाँ की चिता में आग और बहुत सी लकड़ी हैं; यहोवा की साँस जलती हुई गन्धक की धारा के समान उसको सुलगाएगी। यह भी देखें: 2 राजाओं 23:10यिर्मयाह 19:6उत्पत्ति 19:24
यह भी देखें: क्रॉस-संदर्भ OpenBible.info (CC BY) से, आंशिक रूप से Treasury of Scripture Knowledge (सार्वजनिक डोमेन) पर आधारित।
मनन
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टिप्पणियाँ · हेडॉक (1859, सार्वजनिक डोमेन)28 टिप्पणियाँ
टिप्पणियाँ अंग्रेज़ी में फ़ा. जॉर्ज लियो हेडॉक की 19वीं सदी की काथलिक टीका, जैसी प्रकाशित हुई।
ये टिप्पणियाँ अपने समय के विवादों को बनाए रखती हैं: कुछ यहूदी लोगों या अन्य ख्रीस्तीयों के बारे में कठोरता से बोलती हैं। आज कलीसिया कुछ और सिखाती है: ख्रीस्त की मृत्यु के लिए यहूदी लोगों को दोषी नहीं ठहराया जा सकता (नोस्त्रा एताते 4; धर्मशिक्षा 597–598), और अन्य समुदायों के ख्रीस्तीय प्रभु में हमारे भाई-बहन हैं (उनितातिस रेदिन्तेग्रात्सियो 3)। ख्रीस्तीय एकता
यशायाह 30:1
Ver. 1. Of me. Ezechias was guided by human prudence, in making an alliance with Egypt, though he might have just reasons for refusing to pay tribute to the Assyrians. 4 K. xviii. 20. C.
--- And. Sept. "alliances not by," &c. H.
↑ 1यशायाह 30:2
Ver. 2. Down, with presents. v. 6. 4 K. xviii. 20.
↑ 2यशायाह 30:3
Ver. 3. Shame. Egypt had been defeated before Sennacherib's approach.
↑ 3यशायाह 30:4
Ver. 4. Hanes. Chal. "Taphanes," (Jer. ii. 16.) or Daphnæ Pelusiæ. Herod. ii. 30.
--- In the Arabic, Nome, which formed part of (H.) the dominions of Tharaca. C.
↑ 4यशायाह 30:6
Ver. 6. Burden. This title seems unnecessary, and may be added by some Jew, (C. xxi. 13.) though the Chal. and others explain it, "They carry on their beasts, presents to the south," to the nations of Arabia and Egypt, infested with lions,
&c. The rest of the prophecy is against the Jews, who cannot well be styled beasts of the south. C. --- Basilisk. The ibis devours many serpents on their flight from Arabia and Egypt. Herod. ii. 5. Solin. xxxii.
↑ 6यशायाह 30:7
Ver. 7. Cried. Heb. "called it Rahab, (or pride) it is rest." The people are indolent, though they will make great promises. C.
↑ 7यशायाह 30:8
Ver. 8. Box. This word was covered with wax. Propert. iii. 3. --- Write, that none may pretend that they were not admonished. Some think that this was addressed to Jeremias: but Isaias spoke to his incredulous countrymen.
↑ 8यशायाह 30:10
Ver. 10. See not. Such were the dispositions of their heart. C. xxviii. 15.
↑ 10यशायाह 30:11
Ver. 11. Us. Mention God no more, or let him not meddle with our affairs. Seek not to reclaim us, we are pleased with our delusion. C.
↑ 11यशायाह 30:12
Ver. 12. Oppression. Lit. "calumny," (H.) or rebellion against the Assyrians.
This was contrary to the respect due to God's name, used in the ratification of treaties, how wicked soever those princes might be.
↑ 12यशायाह 30:13
Ver. 13. For. Ps. lxi. 3. If God had not miraculously cut off the army of Sennacherib, what would have become of the kingdom of Juda?
↑ 13यशायाह 30:15
Ver. 15. Be. Sept. "groan," as Origen, &c. read. If you be seriously converted, and trust not in Egypt, you need not fear.
↑ 15यशायाह 30:16
Ver. 16. Ones, or chariots. C. --- Egypt was famous for horses. Deut. xvii. 16.
Forcr. ---
Rebsaces ridicules the Jews for the want of them. 4 K. xviii. 23. H.
↑ 16यशायाह 30:17
Ver. 17. Five. A small number shall put you to flight. M. --- Mast, set up after a shipwreck, to warn others, or as a signal. C. xxxiii. 23.
↑ 17यशायाह 30:18
Ver. 18. Wait for him. Having convinced Ezechias that he ought to trust in on other, the Lord rescues him from the hand of Sennacherib. C.
↑ 18यशायाह 30:19
Ver. 19. Weep. The citizens expected certain death, (H.) or slavery. C.
↑ 19यशायाह 30:20
Ver. 20. Water. The land will be reduced to a miserable condition by the ravages of Sennacherib.
H. --- The following was a sabbatical year. v. 23. C. xxxvii. 30. --- Teacher. It seems that Isaias,
&c. had been silent. He spoke after Ezechias had sent for him, and God promises that the people shall not be left without guides. C. --- Christ will not abandon his Church. M.
↑ 20यशायाह 30:22
Ver. 22. Garment. Heb. "ephod," belonging to the idol, or its priest. Ezechias had prohibited idolatry at first. After his deliverance he was still more zealous, and even those who had formerly retained an affection for idols, saw their vanity, and became sincere.
↑ 22यशायाह 30:24
Ver. 24. Floor. They shall not have straw only, but wheat, &c. to denote abundance.
↑ 24यशायाह 30:25
Ver. 25. Towers, or chief officers of Sennacherib. All shall be luxuriant.
↑ 25यशायाह 30:26
Ver. 26. Sevenfold. Exceedingly great, equal to the light of 49 days. C. --- The fame of Ezechias spread widely. His kingdom was a figure of that of Christ, when this was more perfectly realized, the preaching of the gospel having dispelled the darkness of error. C. --- He alludes to the day of judgment. S. Jer.
M.
↑ 26यशायाह 30:27
Ver. 27. Name. Majesty of God, (C.) in the future ages. H.
↑ 27यशायाह 30:28
Ver. 28. Error. The unjust government of Sennacherib, who endeavoured to engage all in idolatry.
↑ 28यशायाह 30:29
Ver. 29. Night. When the festivals commenced. C. --- He may particularly mean that night, when the destroying angel slew the Egyptians. Vatab. --- Pipe.
Music. H. --- This was not prescribed.
↑ 29यशायाह 30:30
Ver. 30. Stones. The Angel raised the storm, which destroyed many, while the rest in a panic fell upon one another. C. ix. 5. and xxvii. 36.
↑ 30यशायाह 30:31
Ver. 31. Rod. Sennacherib is terrified, who a few days before insulted the living God.
↑ 31यशायाह 30:32
Ver. 32. Harps. The sound of thunder will fill the people of Ezechias with joy, while the enemy shall perish irrecoverably. C.
↑ 32यशायाह 30:33
Ver. 33. Topheth. 'Tis the same as Gehenna, and is taken for hell. Ch. --- The Assyrians perish amid horrid cries (H.) and thunders, which resembled the noise made by drums, and by children who were burning in the arms of Moloc.
4 K. xviii. 4. and xxiii. 10. and 2 Par. xxix. 16. Some think that the carcasses of the Assyrians were to be burnt in this common sewer of Jerusalem.
But they were too far distant. C. xxxvii. 33. C.
↑ 33लाइसेंस: Notes by Fr. George Leo Haydock (1774–1849), from the Douay-Rheims Bible with Haydock's commentary (first ed. Thomas Haydock, Manchester/Dublin, 1811–1814; New York: Edward Dunigan & Brother, 1859); New Testament notes compiled with Fr. Benedict Rayment. Public domain. Digital text: "The Haydock Bible", Internet Archive (archive.org/details/TheHaydockBible), uploaded 2011 under the Public Domain Mark. · आभार और लाइसेंस