AI-generated illustration: a snow-dusted mountain peak glowing orange at first light under a deep blue sky.
AI द्वारा निर्मित

लैव्यव्यवस्था

13
बाइबल पाठ

कृत्रिम आवाज़ (AI)

चित्र स्टूडियो में खोलें
फिर यहोवा ने मूसा और हारून से कहा, “जब किसी मनुष्य के शरीर के चर्म में सूजन या पपड़ी या दाग हो, और इससे उसके चर्म में कोढ़ की व्याधि के समान कुछ दिखाई पड़े, तो उसे हारून याजक के पास या उसके पुत्र जो याजक हैं, उनमें से किसी के पास ले जाएँ। यह भी देखें: व्यवस्थाविवरण 24:8लैव्यव्यवस्था 14:56लैव्यव्यवस्था 14:3जब याजक उसके चर्म की व्याधि को देखे, और यदि उस व्याधि के स्थान के रोएँ उजले हो गए हों और व्याधि चर्म से गहरी दिखाई पड़े, तो वह जान ले कि कोढ़ की व्याधि है; और याजक उस मनुष्य को देखकर उसको अशुद्ध ठहराए। यह भी देखें: रोमियों 3:19-20हाग्गै 2:11योहन 20:23पर यदि वह दाग उसके चर्म में उजला तो हो, परन्तु चर्म से गहरा न देख पड़े, और न वहाँ के रोएँ उजले हो गए हों, तो याजक उसको सात दिन तक बन्द करके रखे; यह भी देखें: गिनती 12:15यहेजकेल 44:101 कुरिन्थियों 4:5और सातवें दिन याजक उसको देखे, और यदि वह व्याधि जैसी की तैसी बनी रहे और उसके चर्म में न फैली हो, तो याजक उसको और भी सात दिन तक बन्द करके रखे; और सातवें दिन याजक उसको फिर देखे, और यदि देख पड़े कि व्याधि की चमक कम है और व्याधि चर्म पर फैली न हो, तो याजक उसको शुद्ध ठहराए; क्योंकि उसके तो चर्म में पपड़ी है; और वह अपने वस्त्र धोकर शुद्ध हो जाए। यह भी देखें: लैव्यव्यवस्था 11:25लैव्यव्यवस्था 14:81 राजाओं 8:38पर यदि याजक की उस जाँच के पश्चात् जिसमें वह शुद्ध ठहराया गया था, वह पपड़ी उसके चर्म पर बहुत फैल जाए, तो वह फिर याजक को दिखाया जाए; यह भी देखें: लैव्यव्यवस्था 13:35-36रोमियों 6:12-14स्तोत्र ग्रन्थ 38:3और यदि याजक को देख पड़े कि पपड़ी चर्म में फैल गई है, तो वह उसको अशुद्ध ठहराए; क्योंकि वह कोढ़ ही है। यह भी देखें: फिलिप्पियों 3:18-19प्रेरित-चरित 8:212 पतरस 2:19“यदि कोढ़ की सी व्याधि किसी मनुष्य के हो, तो वह याजक के पास पहुँचाया जाए; और याजक उसको देखे, और यदि वह सूजन उसके चर्म में उजली हो, और उसके कारण रोएँ भी उजले हो गए हों, और उस सूजन में बिना चर्म का माँस हो, यह भी देखें: 2 राजाओं 5:272 इतिहास 26:19-20योहन 7:7तो याजक जाने कि उसके चर्म में पुराना कोढ़ है, इसलिए वह उसको अशुद्ध ठहराए; और बन्द न रखे, क्योंकि वह तो अशुद्ध है। और यदि कोढ़ किसी के चर्म में फूटकर यहाँ तक फैल जाए, कि जहाँ कहीं याजक देखे रोगी के सिर से पैर के तलवे तक कोढ़ ने सारे चर्म को छा लिया हो, यह भी देखें: 1 योहन 1:8-10रोमियों 7:14अय्यूब 42:6तो याजक ध्यान से देखे, और यदि कोढ़ ने उसके सारे शरीर को छा लिया हो, तो वह उस व्यक्ति को शुद्ध ठहराए; और उसका शरीर जो बिलकुल उजला हो गया है वह शुद्ध ही ठहरे। यह भी देखें: योहन 9:41यशायाह 64:6पर जब उसमें चर्महीन माँस देख पड़े, तब तो वह अशुद्ध ठहरे। और याजक चर्महीन माँस को देखकर उसको अशुद्ध ठहराए; क्योंकि वैसा चर्महीन माँस अशुद्ध ही होता है; वह कोढ़ है। पर यदि वह चर्महीन माँस फिर उजला हो जाए, तो वह मनुष्य याजक के पास जाए, यह भी देखें: फिलिप्पियों 3:6-8गलातियों 1:14-16रोमियों 7:14-24और याजक उसको देखे, और यदि वह व्याधि फिर से उजली हो गई हो, तो याजक रोगी को शुद्ध जाने; वह शुद्ध है। “फिर यदि किसी के चर्म में फोड़ा होकर चंगा हो गया हो, यह भी देखें: निर्गमन 9:9यशायाह 38:21अय्यूब 2:7और फोड़े के स्थान में उजली सी सूजन या लाली लिये हुए उजला दाग हो, तो वह याजक को दिखाया जाए; यह भी देखें: लैव्यव्यवस्था 13:24और याजक उस सूजन को देखे, और यदि वह चर्म से गहरा दिखाई पड़े, और उसके रोएँ भी उजले हो गए हों, तो याजक यह जानकर उस मनुष्य को अशुद्ध ठहराए; क्योंकि वह कोढ़ की व्याधि है जो फोड़े में से फूटकर निकली है। यह भी देखें: योहन 5:14मत्ती 12:452 पतरस 2:20परन्तु यदि याजक देखे कि उसमें उजले रोएँ नहीं हैं, और वह चर्म से गहरी नहीं, और उसकी चमक कम हुई है, तो याजक उस मनुष्य को सात दिन तक बन्द करके रखे। यह भी देखें: 1 कुरिन्थियों 5:5और यदि वह व्याधि उस समय तक चर्म में सचमुच फैल जाए, तो याजक उस मनुष्य को अशुद्ध ठहराए; क्योंकि वह कोढ़ की व्याधि है। परन्तु यदि वह दाग न फैले और अपने स्थान ही पर बना रहे, तो वह फोड़े का दाग है; याजक उस मनुष्य को शुद्ध ठहराए। यह भी देखें: गलातियों 6:1अय्यूब 34:31-32उत्पत्ति 38:26“फिर यदि किसी के चर्म में जलने का घाव हो, और उस जलने के घाव में चर्महीन दाग लाली लिये हुए उजला या उजला ही हो जाए, यह भी देखें: यशायाह 3:24तो याजक उसको देखे, और यदि उस दाग में के रोएँ उजले हो गए हों और वह चर्म से गहरा दिखाई पड़े, तो वह कोढ़ है; जो उस जलने के दाग में से फूट निकला है; याजक उस मनुष्य को अशुद्ध ठहराए; क्योंकि उसमें कोढ़ की व्याधि है। यह भी देखें: लैव्यव्यवस्था 13:18-20लैव्यव्यवस्था 13:4पर यदि याजक देखे, कि दाग में उजले रोएँ नहीं और न वह चर्म से कुछ गहरा है, और उसकी चमक कम हुई है, तो वह उसको सात दिन तक बन्द करके रखे, यह भी देखें: लैव्यव्यवस्था 13:4-5लैव्यव्यवस्था 13:23और सातवें दिन याजक उसको देखे, और यदि वह चर्म में फैल गई हो, तो वह उस मनुष्य को अशुद्ध ठहराए; क्योंकि उसको कोढ़ की व्याधि है। परन्तु यदि वह दाग चर्म में नहीं फैला और अपने स्थान ही पर जहाँ का तहाँ बना हो, और उसकी चमक कम हुई हो, तो वह जल जाने के कारण सूजा हुआ है, याजक उस मनुष्य को शुद्ध ठहराए; क्योंकि वह दाग जल जाने के कारण से है। “फिर यदि किसी पुरुष या स्त्री के सिर पर, या पुरुष की दाढ़ी में व्याधि हो, यह भी देखें: 1 राजाओं 8:381 राजाओं 12:282 थिस्सलुनीकियों 2:11-12तो याजक व्याधि को देखे, और यदि वह चर्म से गहरी देख पड़े, और उसमें भूरे-भूरे पतले बाल हों, तो याजक उस मनुष्य को अशुद्ध ठहराए; वह व्याधि सेंहुआ, अर्थात् सिर या दाढ़ी का कोढ़ है। यह भी देखें: लैव्यव्यवस्था 14:54लैव्यव्यवस्था 13:34-37और यदि याजक सेंहुएँ की व्याधि को देखे, कि वह चर्म से गहरी नहीं है और उसमें काले-काले बाल नहीं हैं, तो वह सेंहुएँ के रोगी को सात दिन तक बन्द करके रखे, और सातवें दिन याजक व्याधि को देखे, तब यदि वह सेंहुआ फैला न हो, और उसमें भूरे-भूरे बाल न हों, और सेंहुआ चर्म से गहरा न देख पड़े, यह भी देखें: रोमियों 2:23लूकस 18:9-12लैव्यव्यवस्था 13:30तो यह मनुष्य मुँड़ा जाए, परन्तु जहाँ सेंहुआ हो वहाँ न मुँड़ा जाए; और याजक उस सेंहुएँ वाले को और भी सात दिन तक बन्द करे; और सातवें दिन याजक सेंहुएँ को देखे, और यदि वह सेंहुआ चर्म में फैला न हो और चर्म से गहरा न देख पड़े, तो याजक उस मनुष्य को शुद्ध ठहराए; और वह अपने वस्त्र धोकर शुद्ध ठहरे। यह भी देखें: यहूदा 1:221 योहन 4:1प्रकाशितवाक्य 2:2पर यदि उसके शुद्ध ठहरने के पश्चात् सेंहुआ चर्म में कुछ भी फैले, यह भी देखें: 2 तीमुथियुस 3:13लैव्यव्यवस्था 13:272 तीमुथियुस 2:16-17तो याजक उसको देखे, और यदि वह चर्म में फैला हो, तो याजक भूरे बाल न ढूँढ़े, क्योंकि वह मनुष्य अशुद्ध है। परन्तु यदि उसकी दृष्टि में वह सेंहुआ जैसे का तैसा बना हो, और उसमें काले-काले बाल जमे हों, तो वह जाने की सेंहुआ चंगा हो गया है, और वह मनुष्य शुद्ध है; याजक उसको शुद्ध ही ठहराए। “फिर यदि किसी पुरुष या स्त्री के चर्म में उजले दाग हों, तो याजक देखे, और यदि उसके चर्म में वे दाग कम उजले हों, तो वह जाने कि उसको चर्म में निकली हुई दाद ही है; वह मनुष्य शुद्ध ठहरे। यह भी देखें: याकूब 3:2सभोपदेशक 7:20रोमियों 7:22-25“फिर जिसके सिर के बाल झड़ गए हों, तो जानना कि वह चन्दुला तो है परन्तु शुद्ध है। यह भी देखें: गलातियों 4:13रोमियों 6:12रोमियों 8:10और जिसके सिर के आगे के बाल झड़ गए हों, तो वह माथे का चन्दुला तो है परन्तु शुद्ध है। परन्तु यदि चन्दुले सिर पर या चन्दुले माथे पर लाली लिये हुए उजली व्याधि हो, तो जानना कि वह उसके चन्दुले सिर पर या चन्दुले माथे पर निकला हुआ कोढ़ है। इसलिए याजक उसको देखे, और यदि व्याधि की सूजन उसके चन्दुले सिर या चन्दुले माथे पर ऐसी लाली लिये हुए उजली हो जैसा चर्म के कोढ़ में होता है, तो वह मनुष्य कोढ़ी है और अशुद्ध है; और याजक उसको अवश्य अशुद्ध ठहराए; क्योंकि वह व्याधि उसके सिर पर है। यह भी देखें: अय्यूब 36:14यशायाह 1:52 पतरस 2:1-2“जिसमें वह व्याधि हो उस कोढ़ी के वस्त्र फटे और सिर के बाल बिखरे रहें, और वह अपने ऊपरवाले होंठ को ढाँपे हुए अशुद्ध, अशुद्ध पुकारा करे। यह भी देखें: मीका 3:7लैव्यव्यवस्था 10:6यहेजकेल 24:17जितने दिन तक वह व्याधि उसमें रहे उतने दिन तक वह तो अशुद्ध रहेगा; और वह अशुद्ध ठहरा रहे; इसलिए वह अकेला रहा करे, उसका निवास-स्थान छावनी के बाहर हो। (लूका 17:12) यह भी देखें: 2 राजाओं 7:32 राजाओं 15:5गिनती 12:14-15“फिर जिस वस्त्र में कोढ़ की व्याधि हो, चाहे वह वस्त्र ऊन का हो चाहे सनी का, यह भी देखें: यहूदा 1:23यशायाह 59:6इफिसियों 4:22वह व्याधि चाहे उस सनी या ऊन के वस्त्र के ताने में हो चाहे बाने में, या वह व्याधि चमड़े में या चमड़े की बनी हुई किसी वस्तु में हो, यह भी देखें: लैव्यव्यवस्था 13:51प्रकाशितवाक्य 3:4व्यवस्थाविवरण 8:11यदि वह व्याधि किसी वस्त्र के चाहे ताने में चाहे बाने में, या चमड़े में या चमड़े की किसी वस्तु में हरी हो या लाल सी हो, तो जानना कि वह कोढ़ की व्याधि है और वह याजक को दिखाई जाए। (मत्ती 8:4, मर. 1:44, लूका 5:14, लूका 17:14) और याजक व्याधि को देखे, और व्याधिवाली वस्तु को सात दिन के लिये बन्द करे; यह भी देखें: यहेजकेल 44:23और सातवें दिन वह उस व्याधि को देखे, और यदि वह वस्त्र के चाहे ताने में चाहे बाने में, या चमड़े में या चमड़े की बनी हुई किसी वस्तु में फैल गई हो, तो जानना कि व्याधि गलित कोढ़ है, इसलिए वह वस्तु, चाहे कैसे ही काम में क्यों न आती हो, तो भी अशुद्ध ठहरेगी। यह भी देखें: लैव्यव्यवस्था 14:44वह उस वस्त्र को जिसके ताने या बाने में वह व्याधि हो, चाहे वह ऊन का हो चाहे सनी का, या चमड़े की वस्तु हो, उसको जला दे, वह व्याधि गलित कोढ़ की है; वह वस्तु आग में जलाई जाए। यह भी देखें: लैव्यव्यवस्था 11:35यशायाह 30:22लैव्यव्यवस्था 11:33“यदि याजक देखे कि वह व्याधि उस वस्त्र के ताने या बाने में, या चमड़े की उस वस्तु में नहीं फैली, तो जिस वस्तु में व्याधि हो उसके धोने की आज्ञा दे, तब उसे और भी सात दिन तक बन्द करके रखे; और उसके धोने के बाद याजक उसको देखे, और यदि व्याधि का न तो रंग बदला हो, और न व्याधि फैली हो, तो जानना कि वह अशुद्ध है; उसे आग में जलाना, क्योंकि चाहे वह व्याधि भीतर चाहे ऊपरी हो तो भी वह खा जानेवाली व्याधि है। यह भी देखें: इब्रानियों 6:4-82 पतरस 1:9यहेजकेल 24:13पर यदि याजक देखे, कि उसके धोने के पश्चात् व्याधि की चमक कम हो गई, तो वह उसको वस्त्र के चाहे ताने चाहे बाने में से, या चमड़े में से फाड़कर निकाले; और यदि वह व्याधि तब भी उस वस्त्र के ताने या बाने में, या चमड़े की उस वस्तु में दिखाई पड़े, तो जानना कि वह फूटकर निकली हुई व्याधि है; और जिसमें वह व्याधि हो उसे आग में जलाना। यह भी देखें: मत्ती 3:12प्रकाशितवाक्य 21:27मत्ती 25:41यदि उस वस्त्र से जिसके ताने या बाने में व्याधि हो, या चमड़े की जो वस्तु हो उससे जब धोई जाए और व्याधि जाती रही, तो वह दूसरी बार धुलकर शुद्ध ठहरे।” यह भी देखें: 2 कुरिन्थियों 7:12 कुरिन्थियों 12:82 राजाओं 5:10ऊन या सनी के वस्त्र में के ताने या बाने में, या चमड़े की किसी वस्तु में जो कोढ़ की व्याधि हो उसके शुद्ध और अशुद्ध ठहराने की यही व्यवस्था है।

यह भी देखें: क्रॉस-संदर्भ OpenBible.info (CC BY) से, आंशिक रूप से Treasury of Scripture Knowledge (सार्वजनिक डोमेन) पर आधारित।

टिप्पणियाँ · हेडॉक (1859, सार्वजनिक डोमेन)27 टिप्पणियाँ

टिप्पणियाँ अंग्रेज़ी में फ़ा. जॉर्ज लियो हेडॉक की 19वीं सदी की काथलिक टीका, जैसी प्रकाशित हुई।

ये टिप्पणियाँ अपने समय के विवादों को बनाए रखती हैं: कुछ यहूदी लोगों या अन्य ख्रीस्तीयों के बारे में कठोरता से बोलती हैं। आज कलीसिया कुछ और सिखाती है: ख्रीस्त की मृत्यु के लिए यहूदी लोगों को दोषी नहीं ठहराया जा सकता (नोस्त्रा एताते 4; धर्मशिक्षा 597–598), और अन्य समुदायों के ख्रीस्तीय प्रभु में हमारे भाई-बहन हैं (उनितातिस रेदिन्तेग्रात्सियो 3)। ख्रीस्तीय एकता

लैव्यव्यवस्था 13:2

Ver. 2. Colour, &c. Heb. "a tumour, abscess, or white spot," which are the three marks of leprosy. C. --- Leprosy. The leprosy was a figure of sin: and the observances prescribed in this and the following chapter, intimate what ought spiritually to be done, in order to be delivered from so great an evil, or preserved from it. Ch. --- The authority of the priests in the new law to bind or loose sins, was hereby prefigured. S. Chrys. de Sacerd. 3. W.

↑ 2

लैव्यव्यवस्था 13:3

Ver. 3. Flesh. These two signs indicated the species of leprosy called volatile, or impetigo, (M.) resembling a scab, which did not penetrate the flesh or bones, as our leprosy or elephantiasis does. Vales. C. xix. --- Separated from society. Heb. he shall contaminate him. See v. 11. H. ---

Some assert, that the physician was first to be consulted. But none but the priests could declare them unclean, or set them at liberty. After they had pronounced sentence, the lepers might apply for medicines to others.

↑ 3

लैव्यव्यवस्था 13:6

Ver. 6. Obscure. Some translate the Heb. "retired," with the Syr. and Arab.

versions. --- Scab,

"an ebullition," or pustule. Theod. S. Jer. in Nah. ii. --- Clothes, and himself.

See C. xi. 40.

↑ 6

लैव्यव्यवस्था 13:8

Ver. 8. Uncleanness, or permanent leprosy.

↑ 8

लैव्यव्यवस्था 13:10

यह 19वीं सदी की टिप्पणी विवादात्मक भाषा का उपयोग करती है; इसे इस पैनल के शीर्ष पर दी गई टिप्पणी के प्रकाश में पढ़ें।

Ver. 10. Living flesh. The leprosy is caused by immense numbers of worms, which crawl between the skin and the flesh, and sometimes infect the latter, and they very bones, garments,

&c. Hence the flesh seems all in motion, and living. H. --- The different spots in the skin represent heretical opinions obscuring the true faith, of which priests are the judges. Deut. xvii.

S. Aug. q. Evang. ii. 40. W.

↑ 10

लैव्यव्यवस्था 13:11

Ver. 11. Inveterate. Celsus says, this sort of leprosy is hardly ever cured. --- Up.

But, as the Rom. Sept. reads, "shall separate him," from the people.

↑ 11

लैव्यव्यवस्था 13:13

यह 19वीं सदी की टिप्पणी विवादात्मक भाषा का उपयोग करती है; इसे इस पैनल के शीर्ष पर दी गई टिप्पणी के प्रकाश में पढ़ें।

Ver. 13. Clean. The white leprosy causeth no itching. Gorrheus. Cels. v. 28.

Theodoret (q. 16,) says, it is incurable; and therefore, the person infected is not shut up, out of pity. So S. Paul (1

Cor. v. 11,) forbids us to eat with a dissolute Christian, while he allows us to have commerce with infidels, though they be wholly corrupt. But others assert, it is not so difficult to cure as that which is partial, v. 14. The hand of Moses was stricken with this white leprosy. Ex. iv. 6. C. ---

This species is not so contagious. M.

↑ 13

लैव्यव्यवस्था 13:14

Ver. 14. Live flesh, raw, the skin being consumed in various parts.

↑ 14

लैव्यव्यवस्था 13:16

Ver. 16. Whiteness, after the red flesh is covered with skin as usual.

↑ 16

लैव्यव्यवस्था 13:20

Ver. 20. Ulcer, as before, v. 3.

↑ 20

लैव्यव्यवस्था 13:23

Ver. 23. Place, which is contrary to the nature of leprosy.

↑ 23

लैव्यव्यवस्था 13:24

Ver. 24. Scar. If it had proceeded from burning it would have been black. M.

↑ 24

लैव्यव्यवस्था 13:26

Ver. 26. Obscure. Heb. may be, "stopped," as it is opposed to v. 22, if it spread.

See v. 55-6.

↑ 26

लैव्यव्यवस्था 13:27

Ver. 27. Unclean. Heb. adds, "it is the stroke of leprosy," and the Sept. "it has spread in the ulcer."

↑ 27

लैव्यव्यवस्था 13:30

Ver. 30. Leprosy, or scurf. C. --- This species causes the hair to be yellow, and not white. M.

↑ 30

लैव्यव्यवस्था 13:31

Ver. 31. Black. The Heb. Sam. &c. prefix "not," which ought probably to be away, as the natural colour of the hair, in that country, is black; while yellow, or white hair, give reason to suspect leprosy; and (v. 32,) the Heb. says, "if there be no yellow hair in it," which insinuates that it was black before. The Sept.

have explained both verses in the same sense, as they found the negation also. If we admit it, we may distinguish black hair from that which approaches to brown, or light-coloured hair. When therefore a person, who had before black hair, has experienced some change, he must be shut up seven days; after which, if his hair be not become yellow or reddish, he must be shaved,

&c. C.

↑ 31

लैव्यव्यवस्था 13:39

Ver. 39. Blemish, or scab, of which Celsus speaks, B. 5.

↑ 39

लैव्यव्यवस्था 13:42

Ver. 42. Colour, indicating some bad humours, which had caused the hair to fall off.

↑ 42

लैव्यव्यवस्था 13:45

Ver. 45. Loose, both for the benefit of the leper, and that others may beware of him. M. --- Bare, letting the hair grow, (C. xxi. 5. 10,) in testimony of mourning.

The leper behaved like one in mourning, tearing his garments, neglecting his hair and beard, or cutting them, and, through shame, covering his face. Ezec.

xxiv. 22. The Persians would not allow any lepers to enter their cities. Herod. ii.

138. C.

↑ 45

लैव्यव्यवस्था 13:46

Ver. 46. Camp, or city, unless some great man, like king Ozias, might be permitted to dwell there in a house, secluded from all society. 4 K. xv. 5. --- 2

Par. xxvi. 21.

↑ 46

लैव्यव्यवस्था 13:47

Ver. 47. Garment that shall have the leprosy. These prescriptions, with relation to garments and houses infected with the leprosy, are to teach us to fly all such company and places as are apt to be the occasion of sin.

↑ 47

लैव्यव्यवस्था 13:49

Ver. 49. White. Heb. and Sept. "greenish."

↑ 49

लैव्यव्यवस्था 13:51

Ver. 51. Grown. Heb. adds here, (and v. 53-6-7-9,) "in the garment, either in the warp, or in the woof, or in a skin, or in any work that is made of a skin."

↑ 51

लैव्यव्यवस्था 13:55

Ver. 55. Returned, which it had before it was infected, and, consequently, as the Heb. reads,

"behold the plague has not changed its colour." H.

↑ 55

लैव्यव्यवस्था 13:56

Ver. 56. Dark, or "at a stand." See v. 6. Heb. keha, means to sink, like the eyes of an old man,

&c.

↑ 56

लैव्यव्यवस्था 13:57

Ver. 57. Flying, as that in man, v. 12. Heb. it is a leprosy, which returns and is rooted. Chal. "it spreads." C. See Calmet's Diss. on the Leprosy. --- This dreadful disorder is very common in Arabia and Palestine. During the holy wars many of the Europeans were infected with it. The Jews believe, that the leprosy of garments and of houses was restrained to Judea, and attacked them only when the people rebelled against God. Oleaster. --- The providence of God often visited those, who would not obey his ministers, with this disorder. Deut. xxiv. 8. Num. xii.

Theod. q. 18. T.

↑ 57

लैव्यव्यवस्था 13:59

Ver. 59. Pronounced. This word should refer to both; mundari vel contaminari, how it ought to be pronounced clean or unclean; as the law regards the declaration of the priests, and not the medicines to be used for the leprosy. H.

↑ 59

लाइसेंस: Notes by Fr. George Leo Haydock (1774–1849), from the Douay-Rheims Bible with Haydock's commentary (first ed. Thomas Haydock, Manchester/Dublin, 1811–1814; New York: Edward Dunigan & Brother, 1859); New Testament notes compiled with Fr. Benedict Rayment. Public domain. Digital text: "The Haydock Bible", Internet Archive (archive.org/details/TheHaydockBible), uploaded 2011 under the Public Domain Mark. · आभार और लाइसेंस

मनन

इस अंश के लिए अभी कोई समीक्षित मनन नहीं।

संस्करण: Hindi Indian Revised Version · लाइसेंस: CC BY-SA 4.0
Hindi Indian Revised Version (IRV) © 2017, 2018, 2019 Bridge Connectivity Solutions Pvt. Ltd. Licensed under CC BY-SA 4.0 (https://creativecommons.org/licenses/by-sa/4.0/). Source: eBible.org (https://ebible.org/find/details.php?id=hin2017). Changes: none to the wording; formatting only (verse-per-line import). No endorsement by the licensor is implied.
आभार और लाइसेंस