
यशायाह · IRV-HI
यशायाह
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बाइबल पाठकृत्रिम आवाज़ (AI)
सुनो, यहोवा का हाथ ऐसा छोटा नहीं हो गया कि उद्धार न कर सके, न वह ऐसा बहरा हो गया है कि सुन न सके; यह भी देखें: यिर्मयाह 32:17यशायाह 50:2गिनती 11:23परन्तु तुम्हारे अधर्म के कामों ने तुम को तुम्हारे परमेश्वर से अलग कर दिया है, और तुम्हारे पापों के कारण उसका मुँह तुम से ऐसा छिपा है कि वह नहीं सुनता। यह भी देखें: नीतिवचन 15:29यिर्मयाह 5:25मीका 3:4क्योंकि तुम्हारे हाथ हत्या से और तुम्हारी अंगुलियाँ अधर्म के कर्मों से अपवित्र हो गईं हैं, तुम्हारे मुँह से तो झूठ और तुम्हारी जीभ से कुटिल बातें निकलती हैं। यह भी देखें: यशायाह 1:15यहेजकेल 13:8यिर्मयाह 2:34कोई धर्म के साथ नालिश नहीं करता, न कोई सच्चाई से मुकद्दमा लड़ता है; वे मिथ्या पर भरोसा रखते हैं और झूठी बातें बकते हैं; उसको मानो उत्पात का गर्भ रहता, और वे अनर्थ को जन्म देते हैं। यह भी देखें: अय्यूब 15:35मीका 7:2-5याकूब 1:15वे साँपिन के अण्डे सेते और मकड़ी के जाले बनाते हैं; जो कोई उनके अण्डे खाता वह मर जाता है, और जब कोई एक को फोड़ता तब उसमें से सपोला निकलता है। यह भी देखें: मत्ती 3:7यशायाह 14:29मत्ती 12:34उनके जाले कपड़े का काम न देंगे, न वे अपने कामों से अपने को ढाँप सकेंगे। क्योंकि उनके काम अनर्थ ही के होते हैं, और उनके हाथों से उपद्रव का काम होता है। यह भी देखें: यशायाह 57:12यिर्मयाह 6:7प्रकाशितवाक्य 3:17-18वे बुराई करने को दौड़ते हैं, और निर्दोष की हत्या करने को तत्पर रहते हैं; उनकी युक्तियाँ व्यर्थ हैं, उजाड़ और विनाश ही उनके मार्गों में हैं। यह भी देखें: नीतिवचन 6:17रोमियों 3:15-17नीतिवचन 1:16शान्ति का मार्ग वे जानते ही नहीं; और न उनके व्यवहार में न्याय है; उनके पथ टेढ़े हैं, जो कोई उन पर चले वह शान्ति न पाएगा। (रोम. 3:15-17) यह भी देखें: यशायाह 57:20-21रोमियों 3:17लूकस 1:79इस कारण न्याय हम से दूर है, और धर्म हमारे समीप ही नहीं आता; हम उजियाले की बाट तो जोहते हैं, परन्तु, देखो अंधियारा ही बना रहता है, हम प्रकाश की आशा तो लगाए हैं, परन्तु, घोर अंधकार ही में चलते हैं। यह भी देखें: यशायाह 5:30अय्यूब 30:261 थिस्सलुनीकियों 5:3हम अंधों के समान दीवार टटोलते हैं, हाँ, हम बिना आँख के लोगों के समान टटोलते हैं; हम दिन दोपहर रात के समान ठोकर खाते हैं, हष्टपुष्टों के बीच हम मुर्दों के समान हैं। यह भी देखें: व्यवस्थाविवरण 28:29अय्यूब 5:14विलापगीत 3:6हम सब के सब रीछों के समान चिल्लाते हैं और पिण्डुकों के समान च्यूं-च्यूं करते हैं; हम न्याय की बाट तो जोहते हैं, पर वह कहीं नहीं; और उद्धार की बाट जोहते हैं पर वह हम से दूर ही रहता है। यह भी देखें: यशायाह 38:14यहेजकेल 7:16यिर्मयाह 8:15क्योंकि हमारे अपराध तेरे सामने बहुत हुए हैं, हमारे पाप हमारे विरुद्ध साक्षी दे रहे हैं; हमारे अपराध हमारे संग हैं और हम अपने अधर्म के काम जानते हैं: यह भी देखें: एज्रा 9:6यिर्मयाह 14:7होशे 5:5हमने यहोवा का अपराध किया है, हम उससे मुकर गए और अपने परमेश्वर के पीछे चलना छोड़ दिया, हम अंधेर करने लगे और उलट-फेर की बातें कहीं, हमने झूठी बातें मन में गढ़ीं और कही भी हैं। यह भी देखें: मारकुस 7:21-22याकूब 3:6इब्रानियों 3:12न्याय तो पीछे हटाया गया और धर्म दूर खड़ा रह गया; सच्चाई बाजार में गिर पड़ी, और सिधाई प्रवेश नहीं करने पाती। यह भी देखें: सभोपदेशक 3:16हबक्कूक 1:4यशायाह 1:21हाँ, सच्चाई खो गई, और जो बुराई से भागता है वह शिकार हो जाता है। यह देखकर यहोवा ने बुरा माना, क्योंकि न्याय जाता रहा। यह भी देखें: मीका 7:2यिर्मयाह 7:28इब्रानियों 11:36-38उसने देखा कि कोई भी पुरुष नहीं, और इससे अचम्भा किया कि कोई विनती करनेवाला नहीं; तब उसने अपने ही भुजबल से उद्धार किया, और अपने धर्मी होने के कारण वह सम्भल गया। (यहे. 22:30, इब्रा. 7:25, प्रका. 5:1-5, भज. 98:1) यह भी देखें: यहेजकेल 22:30स्तोत्र ग्रन्थ 98:1स्तोत्र ग्रन्थ 106:23उसने धार्मिकता को झिलम के समान पहन लिया, और उसके सिर पर उद्धार का टोप रखा गया; उसने बदला लेने का वस्त्र धारण किया, और जलजलाहट को बागे के समान पहन लिया है। (इफि. 6:14, इफि. 6:17,1 थिस्स. 5:8) यह भी देखें: इफिसियों 6:17इफिसियों 6:141 थिस्सलुनीकियों 5:8उनके कर्मों के अनुसार वह उनको फल देगा, अपने द्रोहियों पर वह अपना क्रोध भड़काएगा और अपने शत्रुओं को उनकी कमाई देगा; वह द्वीपवासियों को भी उनकी कमाई भर देगा। (जक. 17:10, प्रका. 20:12,13, नहू. 1:2, प्रका. 22:12) यह भी देखें: यिर्मयाह 17:10यशायाह 63:6मत्ती 16:27तब पश्चिम की ओर लोग यहोवा के नाम का, और पूर्व की ओर उसकी महिमा का भय मानेंगे; क्योंकि जब शत्रु महानद के समान चढ़ाई करेंगे तब यहोवा का आत्मा उसके विरुद्ध झण्डा खड़ा करेगा। (मत्ती 8:11, लूका 13:29, भज. 102:15-16, 113:3) यह भी देखें: दानिय्येल 7:27स्तोत्र ग्रन्थ 113:3जकर्याह 4:6“याकूब में जो अपराध से मन फिराते हैं उनके लिये सिय्योन में एक छुड़ानेवाला आएगा,” यहोवा की यही वाणी है। (रोम. 11:26) यह भी देखें: रोमियों 11:26-27तीतुस 2:11-14यहेजकेल 18:30-31यहोवा यह कहता है, “जो वाचा मैंने उनसे बाँधी है वह यह है, कि मेरा आत्मा तुझ पर ठहरा है, और अपने वचन जो मैंने तेरे मुँह में डाले हैं अब से लेकर सर्वदा तक वे तेरे मुँह से, और तेरे पुत्रों और पोतों के मुँह से भी कभी न हटेंगे।” (इब्रा. 10:16, रोम. 11:27) यह भी देखें: यिर्मयाह 31:31-34इब्रानियों 10:16यहेजकेल 36:25-27
यह भी देखें: क्रॉस-संदर्भ OpenBible.info (CC BY) से, आंशिक रूप से Treasury of Scripture Knowledge (सार्वजनिक डोमेन) पर आधारित।
मनन
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टिप्पणियाँ · हेडॉक (1859, सार्वजनिक डोमेन)13 टिप्पणियाँ
टिप्पणियाँ अंग्रेज़ी में फ़ा. जॉर्ज लियो हेडॉक की 19वीं सदी की काथलिक टीका, जैसी प्रकाशित हुई।
ये टिप्पणियाँ अपने समय के विवादों को बनाए रखती हैं: कुछ यहूदी लोगों या अन्य ख्रीस्तीयों के बारे में कठोरता से बोलती हैं। आज कलीसिया कुछ और सिखाती है: ख्रीस्त की मृत्यु के लिए यहूदी लोगों को दोषी नहीं ठहराया जा सकता (नोस्त्रा एताते 4; धर्मशिक्षा 597–598), और अन्य समुदायों के ख्रीस्तीय प्रभु में हमारे भाई-बहन हैं (उनितातिस रेदिन्तेग्रात्सियो 3)। ख्रीस्तीय एकता
यशायाह 59:2
Ver. 2. Iniquities. The history of Susanna shews that the captives were not all free from sin, which alone prevented their liberation. Lam. iii. 44. C. --- God is willing and able to save. He punishes for sin, to cause us to repent. v. 20. W.
↑ 2यशायाह 59:4
Ver. 4. Justice. They arraign unjustly. None call upon the just God, but trust in idols. ---
Iniquity. They kill themselves, while they strive to injure others. Ps. vii. 15. Mic.
ii. 1.
↑ 4यशायाह 59:5
Ver. 5. Basilisk, or viper. C. --- The young ones "burst through the viper's sides." Pliny x. 62. ---
So the works of the wicked are useless or destructive.
↑ 5यशायाह 59:8
Ver. 8. Peace, or prosperity. They quarrel with all, and ruin themselves. Ps. xiii.
↑ 8यशायाह 59:9
Ver. 9. Therefore. The wicked Jews nevertheless confess that their sins prove their destruction.
↑ 9यशायाह 59:10
Ver. 10. Dead. The Jews will not recognize Christ, notwithstanding the prophecies and miracles.
↑ 10यशायाह 59:11
Ver. 11. Judgment, that God would avenge us, (v. 9.) and regard our fasts. C.
lviii. 3.
↑ 11यशायाह 59:14
Ver. 14. In. Where truth is disregarded, there can be no justice.
↑ 14यशायाह 59:16
Ver. 16. Himself, to arrest his arm, stretched out to chastise his son; or to second him. There is nothing in man to stop God's vengeance. He therefore pardons out of his own goodness. C. lix.
2. and lxiii. 4. C. --- He became man to redeem us, as no pure mortal could do it. W.
↑ 16यशायाह 59:17
Ver. 17. Justice. None can blame his conduct.
↑ 17यशायाह 59:19
Ver. 19. On. Heb. "is standard-bearer." Aq. S. Jer. --- Cyrus, the figurative redeemer, proceeds rapidly.
↑ 19यशायाह 59:20
Ver. 20. To Sion. Sept. "from Sion, and will turn away iniquity from Jacob. (21) And this," &c.
H. --- S. Paul hence proves that the Jews will at last be converted. Rom. xi. 26.
The return of the captives prefigured this event. C.
↑ 20यशायाह 59:21
Ver. 21. Covenant. Note here a clear promise of perpetual orthodoxy to the Church of Christ.
Ch. --- She hath still the spirit of truth. W. Mat. xxviii. 20. --- None will apply this to the synagogue, which is visibly in the dark, and abandoned. C.
↑ 21लाइसेंस: Notes by Fr. George Leo Haydock (1774–1849), from the Douay-Rheims Bible with Haydock's commentary (first ed. Thomas Haydock, Manchester/Dublin, 1811–1814; New York: Edward Dunigan & Brother, 1859); New Testament notes compiled with Fr. Benedict Rayment. Public domain. Digital text: "The Haydock Bible", Internet Archive (archive.org/details/TheHaydockBible), uploaded 2011 under the Public Domain Mark. · आभार और लाइसेंस