
2 इतिहास · IRV-HI
2 इतिहास
28
बाइबल पाठकृत्रिम आवाज़ (AI)
जब आहाज राज्य करने लगा तब वह बीस वर्ष का था, और सोलह वर्ष तक यरूशलेम में राज्य करता रहा। और अपने मूलपुरुष दाऊद के समान काम नहीं किया, जो यहोवा की दृष्टि में ठीक था, यह भी देखें: यशायाह 1:11 इतिहास 3:13मत्ती 1:9परन्तु वह इस्राएल के राजाओं की सी चाल चला, और बाल देवताओं की मूर्तियाँ ढलवा कर बनाईं; यह भी देखें: निर्गमन 34:17न्यायियों 2:11होशे 2:17और हिन्नोम के बेटे की तराई में धूप जलाया, और उन जातियों के घिनौने कामों के अनुसार जिन्हें यहोवा ने इस्राएलियों के सामने देश से निकाल दिया था, अपने बच्चों को आग में होम कर दिया। यह भी देखें: 2 इतिहास 33:22 इतिहास 33:6लैव्यव्यवस्था 18:21ऊँचे स्थानों पर, और पहाड़ियों पर, और सब हरे वृक्षों के तले वह बलि चढ़ाया और धूप जलाया करता था। यह भी देखें: लैव्यव्यवस्था 26:30व्यवस्थाविवरण 12:2-32 राजाओं 16:4इसलिए उसके परमेश्वर यहोवा ने उसको अरामियों के राजा के हाथ कर दिया, और वे उसको जीतकर, उसके बहुत से लोगों को बन्दी बनाकर दमिश्क को ले गए। और वह इस्राएल के राजा के वश में कर दिया गया, जिसने उसे बड़ी मार से मारा। यह भी देखें: यशायाह 7:12 राजाओं 16:5-62 इतिहास 24:24रमल्याह के पुत्र पेकह ने, यहूदा में एक ही दिन में एक लाख बीस हजार लोगों को जो सब के सब वीर थे, घात किया, क्योंकि उन्होंने अपने पितरों के परमेश्वर यहोवा को त्याग दिया था। यह भी देखें: यिर्मयाह 15:6यिर्मयाह 2:19यशायाह 1:28जिक्री नामक एक एप्रैमी वीर ने मासेयाह नामक एक राजपुत्र को, और राजभवन के प्रधान अज्रीकाम को, और एल्काना को, जो राजा का मंत्री था, मार डाला। यह भी देखें: उत्पत्ति 41:43एस्तेर 10:3उत्पत्ति 43:15इस्राएली अपने भाइयों में से स्त्रियों, बेटों और बेटियों को मिलाकर दो लाख लोगों को बन्दी बनाकर, और उनकी बहुत लूट भी छीनकर सामरिया की ओर ले चले। यह भी देखें: 2 इतिहास 11:4व्यवस्थाविवरण 28:25व्यवस्थाविवरण 28:41परन्तु वहाँ ओदेद नामक यहोवा का एक नबी था; वह सामरिया को आनेवाली सेना से मिलकर उनसे कहने लगा, “सुनो, तुम्हारे पितरों के परमेश्वर यहोवा ने यहूदियों पर झुँझलाकर उनको तुम्हारे हाथ कर दिया है, और तुम ने उनको ऐसा क्रोध करके घात किया जिसकी चिल्लाहट स्वर्ग को पहुँच गई है। यह भी देखें: एज्रा 9:6प्रकाशितवाक्य 18:5यशायाह 47:6अब तुम ने ठाना है कि यहूदियों और यरूशलेमियों को अपने दास-दासी बनाकर दबाए रखो। क्या तुम भी अपने परमेश्वर यहोवा के यहाँ दोषी नहीं हो? यह भी देखें: लैव्यव्यवस्था 25:39-461 पतरस 4:17-18रोमियों 12:20-21इसलिए अब मेरी सुनो और इन बन्दियों को जिन्हें तुम अपने भाइयों में से बन्दी बनाकर ले आए हो, लौटा दो, यहोवा का क्रोध तो तुम पर भड़का है।” यह भी देखें: याकूब 2:13मत्ती 5:72 इतिहास 28:8तब एप्रैमियों के कुछ मुख्य पुरुष अर्थात् योहानान का पुत्र अजर्याह, मशिल्लेमोत का पुत्र बेरेक्याह, शल्लूम का पुत्र यहिजकिय्याह, और हदलै का पुत्र अमासा, लड़ाई से आनेवालों का सामना करके, उनसे कहने लगे। यह भी देखें: 1 इतिहास 28:1यिर्मयाह 26:6“तुम इन बन्दियों को यहाँ मत लाओ; क्योंकि तुम ने वह बात ठानी है जिसके कारण हम यहोवा के यहाँ दोषी हो जाएँगे, और उससे हमारा पाप और दोष बढ़ जाएगा, हमारा दोष तो बड़ा है और इस्राएल पर बहुत क्रोध भड़का है।” यह भी देखें: मत्ती 23:32मत्ती 23:35गिनती 32:14तब उन हथियार-बन्दों ने बन्दियों और लूट को हाकिमों और सारी सभा के सामने छोड़ दिया। तब जिन पुरुषों के नाम ऊपर लिखे हैं, उन्होंने उठकर बन्दियों को ले लिया, और लूट में से सब नंगे लोगों को कपड़े, और जूतियाँ पहनाईं; और खाना खिलाया, और पानी पिलाया, और तेल मला; और तब निर्बल लोगों को गदहों पर चढ़ाकर, यरीहो को जो खजूर का नगर कहलाता है, उनके भाइयों के पास पहुँचा दिया। तब वे सामरिया को लौट आए। यह भी देखें: नीतिवचन 25:21-22व्यवस्थाविवरण 34:3न्यायियों 1:16उस समय राजा आहाज ने अश्शूर के राजाओं के पास दूत भेजकर सहायता माँगी। यह भी देखें: यशायाह 7:172 राजाओं 16:5-7यशायाह 7:1-9क्योंकि एदोमियों ने यहूदा में आकर उसको मारा, और बन्दियों को ले गए थे। यह भी देखें: ओबद्याह 1:102 इतिहास 25:11-12लैव्यव्यवस्था 26:18पलिश्तियों ने नीचे के देश और यहूदा के दक्षिण के नगरों पर चढ़ाई करके, बेतशेमेश, अय्यालोन और गदेरोत को, और अपने-अपने गाँवों समेत सोको, तिम्नाह, और गिमजो को ले लिया; और उनमें रहने लगे थे। यह भी देखें: यहेजकेल 16:57यहेजकेल 16:27यहोशू 15:48अतः यहोवा ने इस्राएल के राजा आहाज के कारण यहूदा को दबा दिया, क्योंकि वह निरंकुश होकर चला, और यहोवा से बड़ा विश्वासघात किया। यह भी देखें: 2 इतिहास 21:2अय्यूब 40:12होशे 5:11तब अश्शूर का राजा तिग्लत्पिलेसेर उसके विरुद्ध आया, और उसको कष्ट दिया; दृढ़ नहीं किया। यह भी देखें: 2 राजाओं 15:29यशायाह 30:161 इतिहास 5:26आहाज ने तो यहोवा के भवन और राजभवन और हाकिमों के घरों में से धन निकालकर अश्शूर के राजा को दिया, परन्तु इससे उसको कुछ सहायता न हुई। यह भी देखें: 2 इतिहास 12:92 राजाओं 16:8-92 राजाओं 18:15-16क्लेश के समय राजा आहाज ने यहोवा से और भी विश्वासघात किया। यह भी देखें: यिर्मयाह 5:3यशायाह 1:5यहेजकेल 21:13उसने दमिश्क के देवताओं के लिये जिन्होंने उसको मारा था, बलि चढ़ाया; क्योंकि उसने यह सोचा, कि अरामी राजाओं के देवताओं ने उनकी सहायता की, तो मैं उनके लिये बलि चढ़ाऊँगा कि वे मेरी सहायता करें। परन्तु वे उसके और सारे इस्राएल के पतन का कारण हुए। यह भी देखें: 2 इतिहास 25:14हबक्कूक 1:11होशे 13:9फिर आहाज ने परमेश्वर के भवन के पात्र बटोरकर तुड़वा डाले, और यहोवा के भवन के द्वारों को बन्द कर दिया; और यरूशलेम के सब कोनों में वेदियाँ बनाईं। यह भी देखें: 2 इतिहास 29:72 इतिहास 33:3-52 राजाओं 16:17-18यहूदा के एक-एक नगर में उसने पराए देवताओं को धूप जलाने के लिये ऊँचे स्थान बनाए, और अपने पितरों के परमेश्वर यहोवा को रिस दिलाई। यह भी देखें: 2 इतिहास 28:3उसके और कामों, और आदि से अन्त तक उसकी पूरी चाल चलन का वर्णन यहूदा और इस्राएल के राजाओं के इतिहास की पुस्तक में लिखा है। यह भी देखें: 2 राजाओं 16:19-202 इतिहास 20:342 इतिहास 27:7-9अन्त में आहाज मरकर अपने पुरखाओं के संग जा मिला और उसको यरूशलेम नगर में मिट्टी दी गई, परन्तु वह इस्राएल के राजाओं के कब्रिस्तान में पहुँचाया न गया। और उसका पुत्र हिजकिय्याह उसके स्थान पर राज्य करने लगा। यह भी देखें: 2 इतिहास 21:202 इतिहास 24:25नीतिवचन 10:7
यह भी देखें: क्रॉस-संदर्भ OpenBible.info (CC BY) से, आंशिक रूप से Treasury of Scripture Knowledge (सार्वजनिक डोमेन) पर आधारित।
मनन
इस अंश के लिए अभी कोई समीक्षित मनन नहीं।
टिप्पणियाँ · हेडॉक (1859, सार्वजनिक डोमेन)17 टिप्पणियाँ
टिप्पणियाँ अंग्रेज़ी में फ़ा. जॉर्ज लियो हेडॉक की 19वीं सदी की काथलिक टीका, जैसी प्रकाशित हुई।
ये टिप्पणियाँ अपने समय के विवादों को बनाए रखती हैं: कुछ यहूदी लोगों या अन्य ख्रीस्तीयों के बारे में कठोरता से बोलती हैं। आज कलीसिया कुछ और सिखाती है: ख्रीस्त की मृत्यु के लिए यहूदी लोगों को दोषी नहीं ठहराया जा सकता (नोस्त्रा एताते 4; धर्मशिक्षा 597–598), और अन्य समुदायों के ख्रीस्तीय प्रभु में हमारे भाई-बहन हैं (उनितातिस रेदिन्तेग्रात्सियो 3)। ख्रीस्तीय एकता
2 इतिहास 28:3
Ver. 3. Benennon, "the son of Ennom." 4 K. xvi. --- Consecrated. Heb. "burnt."
H.
↑ 32 इतिहास 28:4
Ver. 4. Tree. Remarkable for its size and beauty; as the heathens supposed that some deity lay there concealed. Mariana. T.
↑ 42 इतिहास 28:5
Ver. 5. Booty. Heb. "number of captives." H. --- The two kings had besieged Jerusalem without success: (4 K.) but now their forces were divided. M. --- The motives of this war were unjust. Mic. ii. 8.
↑ 52 इतिहास 28:7
Ver. 7. At the same time, is not in Heb. (C.) or Sept. H. --- Zechri, one of the generals of Phacee, slew the king's son, &c. after the engagement. --- Next.
Joseph and Aman enjoyed the like dignity. Gen. xli. 42. Est. xiii. 3. The high priests had also seconds. 4 K. xxv. 18. Sept. "vicar of the king." C.
↑ 72 इतिहास 28:9
Ver. 9. Heaven, and cries for vengeance against you. Though God designed to punish his people, your cruelty will not be excused. H. --- The effect of this remonstrance, shews that all the kingdom of Israel was not devoid (C.) of feeling and religion. H. --- They set a noble example for Christian princes to follow after a victory. D.
↑ 92 इतिहास 28:10
Ver. 10. God, who forbids this. Lev. xxv. 43. Mic. ii. 8. 9. Heb. "are there not with you, yea, with you, sins against?" &c. If Juda have deserved punishment, reflect if you also be not guilty, v. 13. Sept. "Behold, am I not here with you to bear witness to the Lord?"
↑ 102 इतिहास 28:13
Ver. 13. Our, is expressed in Heb. and Sept. These people justly confess that they stand in need of pardon, without adding fresh crimes. H. --- The cruel treatment of the people of Juda, and the design to make them slaves, were grievous sins. C.
↑ 132 इतिहास 28:15
Ver. 15. Above. Heb. "by name." They deserved to be immortalized. H. ---
Anointed. This was very common, (M.) and refreshing. Celsus i. 3.
↑ 152 इतिहास 28:16
Ver. 16. Kings. Heb. "kings." But Sept. have the singular. 4 K. xvi. 7.
↑ 162 इतिहास 28:17
Ver. 17. And. Sept. "Because the Edomites had come,...and taken many prisoners." Prot. "for again," &c. H.
↑ 172 इतिहास 28:18
Ver. 18. Gamzo. Syr. "Garam," perhaps Gaza, (C.) or a city south of Juda. M.
↑ 182 इतिहास 28:19
Ver. 19. Of Juda. Heb. "Israel." But the Sept. have "Juda." H. --- The names are often used promiscuously. C. --- For he. Sept. "because he or it had apostatised from the Lord." --- Script.
Prot. "he made Judah naked, and transgressed sore," &c. Thus were the idolatrous Israelites exposed to shame and misery, after they had adored the golden calf. Ex. xxxii. 25. H. --- In the Bacchanalian riots, the pagans threw off their garments, to shew that they trusted entirely in their false gods. T. ---
Achaz had plunged his country in distress, (C.) both of soul and body, (H.) by his scandalous deportment. C. --- Of all help, is added by way of explanation; (T.) as God would no longer rescue his rebellious people from the hands of the enemy. H.
↑ 192 इतिहास 28:20
Ver. 20. And. Heb. and Sept. "And....the king....came against him, and smote him." Heb.
continues, "but strengthened him not" in the end; though he had been invited, (v. 16. H.) and had actually made a diversion in favour of Achaz. But not being satisfied, he afterwards returned, and made cruel havoc in the country, imposing tribute upon the king, v. 21. 4 K. xvi. 7. and xviii. 7.
It is therefore unnecessary to correct the Heb. with Grotius, to make it agree with 4 K. xvi. 7.
Thus---he "came to his aid, and relieved him from his distress, (v. 21,) and granted him assistance."
↑ 202 इतिहास 28:21
Ver. 21. Gifts. Tribute. C. --- Heb. "and gave it to, &c.: but he did not help him."
H.
↑ 212 इतिहास 28:22
Ver. 22. Moreover. Sept. "but to distress him." --- Wicked policy availeth nothing, but entails much evil. W. --- King. Heb. "that king Achaz." The sacred writer thus stigmatizes the impious king, who grew worse the more he was scourged. H. --- This was the monster, which could not be tamed. Amama. ---
Eva. "ille," is five times used as a reproach, and often to signify applause.
Kimchi. --- By himself, is an addition. Amama. --- It gives us to understand (H.) that Achaz acted thus of his own accord. C. --- Sept. "And king Achaz said, (23) I will studiously seek the gods of Damascus, who have buffetted me," &c. H. ---
This resolution he took while the arms of Rasin were formidable to him: but he put it in execution after the king of Assyria had delivered him, when he went to Damascus to return him thanks. 4 K. xvi. 10. This stupid blindness and impiety irritated God so much, that he abandoned Juda to the arms of the king, who had been called in as a protector. How could he expect aid from gods who had suffered their own country and people of Damascus to fall a prey to the invader! C.
↑ 222 इतिहास 28:24
Ver. 24. God: first through fear of the Assyrian, (4 K.) but afterwards he permitted it to continue in the same state of irreligion. C. --- So easily do people fall into this abyss, who begin to neglect instruction! H. --- Ezechias took care to open the temple again. C. xxix. 3. C. --- None of the former kings had dared (H.) to prohibit the worship of the true God. T.
↑ 242 इतिहास 28:27
Ver. 27. Israel is put as comprising Juda. H. C. xx. 34. and xxiv. 16. &c. C.
↑ 27लाइसेंस: Notes by Fr. George Leo Haydock (1774–1849), from the Douay-Rheims Bible with Haydock's commentary (first ed. Thomas Haydock, Manchester/Dublin, 1811–1814; New York: Edward Dunigan & Brother, 1859); New Testament notes compiled with Fr. Benedict Rayment. Public domain. Digital text: "The Haydock Bible", Internet Archive (archive.org/details/TheHaydockBible), uploaded 2011 under the Public Domain Mark. · आभार और लाइसेंस