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लैव्यव्यवस्था

7
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“फिर दोषबलि की व्यवस्था यह है। वह परमपवित्र है; यह भी देखें: लैव्यव्यवस्था 6:25लैव्यव्यवस्था 6:17लैव्यव्यवस्था 5:14जिस स्थान पर होमबलि पशु का वध करते हैं उसी स्थान पर दोषबलि पशु भी बलि करें, और उसके लहू को याजक वेदी पर चारों ओर छिड़के। यह भी देखें: लैव्यव्यवस्था 1:5लैव्यव्यवस्था 1:11लैव्यव्यवस्था 4:29और वह उसमें की सब चर्बी को चढ़ाए, अर्थात् उसकी मोटी पूँछ को, और जिस चर्बी से अंतड़ियाँ ढपी रहती हैं वह भी, यह भी देखें: निर्गमन 29:13लैव्यव्यवस्था 3:15-16लैव्यव्यवस्था 4:8-10और दोनों गुर्दे और जो चर्बी उनके ऊपर और कमर के पास रहती है, और गुर्दों समेत कलेजे के ऊपर की झिल्ली; इन सभी को वह अलग करे; यह भी देखें: लैव्यव्यवस्था 3:4और याजक इन्हें वेदी पर यहोवा के लिये हवन करे; तब वह दोषबलि होगा। यह भी देखें: लैव्यव्यवस्था 2:9गलातियों 5:24गलातियों 2:20याजकों में के सब पुरुष उसमें से खा सकते हैं; वह किसी पवित्रस्थान में खाया जाए; क्योंकि वह परमपवित्र है। (1 कुरि. 10:18) यह भी देखें: लैव्यव्यवस्था 6:29लैव्यव्यवस्था 2:3गिनती 18:9-10जैसा पापबलि है वैसा ही दोषबलि भी है, उन दोनों की एक ही व्यवस्था है; जो याजक उन बलियों को चढ़ा के प्रायश्चित करे वही उन वस्तुओं को ले ले। यह भी देखें: लैव्यव्यवस्था 6:25-26लैव्यव्यवस्था 14:131 कुरिन्थियों 9:13और जो याजक किसी के लिये होमबलि को चढ़ाए उस होमबलि पशु की खाल को वही याजक ले ले। यह भी देखें: लैव्यव्यवस्था 1:6उत्पत्ति 3:21रोमियों 13:14और तंदूर में, या कढ़ाही में, या तवे पर पके हुए सब अन्नबलि उसी याजक की होंगी जो उन्हें चढ़ाता है। (लैव्य. 2:3,10, गिन. 18:9, यहे. 44:29) यह भी देखें: गलातियों 6:6लैव्यव्यवस्था 2:10लैव्यव्यवस्था 2:3-7और सब अन्नबलि, जो चाहे तेल से सने हुए हों चाहे रूखे हों, वे हारून के सब पुत्रों को एक समान मिले। यह भी देखें: 2 कुरिन्थियों 8:14निर्गमन 16:18“मेलबलि की जिसे कोई यहोवा के लिये चढ़ाए व्यवस्था यह है: यह भी देखें: यहेजकेल 45:15लैव्यव्यवस्था 3:1-17लैव्यव्यवस्था 22:18-21यदि वह उसे धन्यवाद के लिये चढ़ाए, तो धन्यवाद-बलि के साथ तेल से सने हुए अख़मीरी फुलके, और तेल से चुपड़ी हुई अख़मीरी रोटियाँ, और तेल से सने हुए मैदे के फुलके तेल से तर चढ़ाए। (इब्रा. 13:15) यह भी देखें: लैव्यव्यवस्था 2:4गिनती 6:151 पतरस 2:5और वह अपने धन्यवादवाले मेलबलि के साथ अख़मीरी रोटियाँ, भी चढ़ाए। यह भी देखें: आमोस 4:5लैव्यव्यवस्था 23:17मत्ती 13:33और ऐसे एक-एक चढ़ावे में से वह एक-एक रोटी यहोवा को उठाने की भेंट करके चढ़ाए; वह मेलबलि के लहू के छिड़कनेवाले याजक की होगी। यह भी देखें: गिनती 18:19निर्गमन 29:27-28गिनती 31:41और उस धन्यवादवाले मेलबलि का माँस बलिदान चढ़ाने के दिन ही खाया जाए; उसमें से कुछ भी भोर तक शेष न रह जाए। (1 कुरि. 10:18) यह भी देखें: लैव्यव्यवस्था 22:29-30पर यदि उसके बलिदान का चढ़ावा मन्नत का या स्वेच्छा का हो, तो उस बलिदान को जिस दिन वह चढ़ाया जाए उसी दिन वह खाया जाए, और उसमें से जो शेष रह जाए वह दूसरे दिन भी खाया जाए। यह भी देखें: व्यवस्थाविवरण 12:6लैव्यव्यवस्था 19:5-8लैव्यव्यवस्था 22:29परन्तु जो कुछ बलिदान के माँस में से तीसरे दिन तक रह जाए वह आग में जला दिया जाए। यह भी देखें: निर्गमन 12:10होशे 6:21 कुरिन्थियों 15:4और उसके मेलबलि के माँस में से यदि कुछ भी तीसरे दिन खाया जाए, तो वह ग्रहण न किया जाएगा, और न उसके हित में गिना जाएगा; वह घृणित कर्म समझा जाएगा, और जो कोई उसमें से खाए उसका अधर्म उसी के सिर पर पड़ेगा। यह भी देखें: लैव्यव्यवस्था 19:7-8लैव्यव्यवस्था 11:41लैव्यव्यवस्था 22:25“फिर जो माँस किसी अशुद्ध वस्तु से छू जाए वह न खाया जाए; वह आग में जला दिया जाए। फिर मेलबलि का माँस जितने शुद्ध हों वे ही खाएँ, यह भी देखें: रोमियों 14:20तीतुस 1:15प्रेरित-चरित 10:15-16परन्तु जो अशुद्ध होकर यहोवा के मेलबलि के माँस में से कुछ खाए वह अपने लोगों में से नाश किया जाए। यह भी देखें: लैव्यव्यवस्था 15:2-331 कुरिन्थियों 11:28लैव्यव्यवस्था 22:3-7और यदि कोई किसी अशुद्ध वस्तु को छूकर यहोवा के मेलबलि पशु के माँस में से खाए, तो वह भी अपने लोगों में से नाश किया जाए, चाहे वह मनुष्य की कोई अशुद्ध वस्तु या अशुद्ध पशु या कोई भी अशुद्ध और घृणित वस्तु हो।” यह भी देखें: लैव्यव्यवस्था 5:2-3लैव्यव्यवस्था 11:20लैव्यव्यवस्था 12:1फिर यहोवा ने मूसा से कहा, “इस्राएलियों से इस प्रकार कह: तुम लोग न तो बैल की कुछ चर्बी खाना और न भेड़ या बकरी की। यह भी देखें: लैव्यव्यवस्था 3:16-17रोमियों 8:13व्यवस्थाविवरण 32:38और जो पशु स्वयं मर जाए, और जो दूसरे पशु से फाड़ा जाए, उसकी चर्बी और अन्य काम में लाना, परन्तु उसे किसी प्रकार से खाना नहीं। यह भी देखें: निर्गमन 22:31लैव्यव्यवस्था 22:8लैव्यव्यवस्था 17:15जो कोई ऐसे पशु की चर्बी खाएगा जिसमें से लोग कुछ यहोवा के लिये हवन करके चढ़ाया करते हैं वह खानेवाला अपने लोगों में से नाश किया जाएगा। और तुम अपने घर में किसी भाँति का लहू, चाहे पक्षी का चाहे पशु का हो, न खाना। यह भी देखें: उत्पत्ति 9:4लैव्यव्यवस्था 17:10-14लैव्यव्यवस्था 3:17हर एक प्राणी जो किसी भाँति का लहू खाएगा वह अपने लोगों में से नाश किया जाएगा।” यह भी देखें: इब्रानियों 10:29लैव्यव्यवस्था 7:20-21लैव्यव्यवस्था 7:25फिर यहोवा ने मूसा से कहा, “इस्राएलियों से इस प्रकार कह: जो यहोवा के लिये मेलबलि चढ़ाए वह उसी मेलबलि में से यहोवा के पास भेंट ले आए; यह भी देखें: लैव्यव्यवस्था 3:1-17कुलुस्सियों 1:201 योहन 1:7वह अपने ही हाथों से यहोवा के हव्य को, अर्थात् छाती समेत चर्बी को ले आए कि छाती हिलाने की भेंट करके यहोवा के सामने हिलाई जाए। यह भी देखें: गिनती 6:20लैव्यव्यवस्था 3:14लैव्यव्यवस्था 3:3-4और याजक चर्बी को तो वेदी पर जलाए, परन्तु छाती हारून और उसके पुत्रों की होगी। यह भी देखें: लैव्यव्यवस्था 3:11लैव्यव्यवस्था 7:34लैव्यव्यवस्था 3:16फिर तुम अपने मेलबलियों में से दाहिनी जाँघ को भी उठाने की भेंट करके याजक को देना; यह भी देखें: लैव्यव्यवस्था 9:21गिनती 6:20लैव्यव्यवस्था 7:34हारून के पुत्रों में से जो मेलबलि के लहू और चर्बी को चढ़ाए दाहिनी जाँघ उसी का भाग होगा। यह भी देखें: लैव्यव्यवस्था 6:1-30लैव्यव्यवस्था 26:1-46लैव्यव्यवस्था 7:3क्योंकि इस्राएलियों के मेलबलियों में से हिलाने की भेंट की छाती और उठाने की भेंट की जाँघ को लेकर मैंने याजक हारून और उसके पुत्रों को दिया है, कि यह सर्वदा इस्राएलियों की ओर से उनका हक़ बना रहे। यह भी देखें: गिनती 18:18-19लैव्यव्यवस्था 10:14-15निर्गमन 29:9“जिस दिन हारून और उसके पुत्र यहोवा के समीप याजकपद के लिये लाए गए, उसी दिन यहोवा के हव्यों में से उनका यही अभिषिक्त भाग ठहराया गया; यह भी देखें: 1 योहन 2:20लैव्यव्यवस्था 8:10-12निर्गमन 28:1अर्थात् जिस दिन यहोवा ने उनका अभिषेक किया उसी दिन उसने आज्ञा दी कि उनको इस्राएलियों की ओर से ये भाग नित्य मिला करें; उनकी पीढ़ी-पीढ़ी के लिये उनका यही हक़ ठहराया गया।” (निर्ग. 40:13-15) यह भी देखें: लैव्यव्यवस्था 8:12लैव्यव्यवस्था 8:30निर्गमन 40:13-15होमबलि, अन्नबलि, पापबलि, दोषबलि, याजकों के संस्कार बलि, और मेलबलि की व्यवस्था यही है; (लैव्य. 6:9,14) यह भी देखें: निर्गमन 29:1लैव्यव्यवस्था 6:20लैव्यव्यवस्था 6:9-18जब यहोवा ने सीनै पर्वत के पास के जंगल में मूसा को आज्ञा दी कि इस्राएली मेरे लिये क्या-क्या चढ़ावा चढ़ाएँ, तब उसने उनको यही व्यवस्था दी थी। यह भी देखें: लैव्यव्यवस्था 1:1-2

यह भी देखें: क्रॉस-संदर्भ OpenBible.info (CC BY) से, आंशिक रूप से Treasury of Scripture Knowledge (सार्वजनिक डोमेन) पर आधारित।

टिप्पणियाँ · हेडॉक (1859, सार्वजनिक डोमेन)25 टिप्पणियाँ

टिप्पणियाँ अंग्रेज़ी में फ़ा. जॉर्ज लियो हेडॉक की 19वीं सदी की काथलिक टीका, जैसी प्रकाशित हुई।

ये टिप्पणियाँ अपने समय के विवादों को बनाए रखती हैं: कुछ यहूदी लोगों या अन्य ख्रीस्तीयों के बारे में कठोरता से बोलती हैं। आज कलीसिया कुछ और सिखाती है: ख्रीस्त की मृत्यु के लिए यहूदी लोगों को दोषी नहीं ठहराया जा सकता (नोस्त्रा एताते 4; धर्मशिक्षा 597–598), और अन्य समुदायों के ख्रीस्तीय प्रभु में हमारे भाई-बहन हैं (उनितातिस रेदिन्तेग्रात्सियो 3)। ख्रीस्तीय एकता

लैव्यव्यवस्था 7:1

Ver. 1. Trespass. Trespasses, for which these offerings were to be made, were less offences, than those for which the sin-offerings were appointed. Ch. ---

Delictum, trespass, answers to the Heb.

asham, and the Gr. plemmeleia; (H.) being of a more extensive signification that the Hebrew chete, sin, as it comprises even sins against knowledge.

Parkhurst. See C. iv. 2. --- No particular ceremonies are enjoined, (v. 7,) only a he-goat or a ram was to be offered; if the former, the rump,

&c. were to be given (v. 3); if the latter, the fat of the intestines and the reins were to be offered, and the blood poured out at the foot of the altar. --- Victim.

Sept. "ram." --- Holy. To be eaten by priests, and in the court of the tabernacle, v. 6. C. --- Sins of commission, peccata, and of omission, delicta, are equally offensive to God. S. Aug. q. 20. W.

↑ 1

लैव्यव्यवस्था 7:8

Ver. 8. Skin. Of these skins a great profit was made. Philo de præm. sacerd.

↑ 8

लैव्यव्यवस्था 7:9

Ver. 9. Priest's; to be divided among his brethren, v. 10. They officiated a week by turns. C. ---

Each, therefore, claimed the parts allotted by God to the priest on duty. But it is not certain what part they could retain for their own use. Some think that the unbaked flour alone was to be distributed equally, v. 10. Bonfrere.

↑ 9

लैव्यव्यवस्था 7:11

Ver. 11. This. Here the Roman, Sept., Junius, &c. commence the 7th chapter.

↑ 11

लैव्यव्यवस्था 7:12

Ver. 12. Oil. Any of these sorts of bread would suffice. Jacob and Jethro had formerly offered sacrifices of praise, and the Greeks had some which they termed Soteria. C.

↑ 12

लैव्यव्यवस्था 7:13

Ver. 13. Bread, for the use of the priests. C. ii. 11.

↑ 13

लैव्यव्यवस्था 7:14

Ver. 14. Of which leavened bread, one, representing all the rest, shall be offered for first-fruits.

Heb. "a heave-offering," not as a sacrifice. M. --- Others maintain that a loaf, without leaven, was laid upon the altar; and all the rest given to the priest. C.

↑ 14

लैव्यव्यवस्था 7:15

Ver. 15. Morning. Thus were they admonished to let the poor share of the bounty which God had bestowed upon them. Theod. and Philo.

↑ 15

लैव्यव्यवस्था 7:16

Ver. 16. It. The victim of thanksgiving was more worthy, as it proceeded from a more disinterested motive. M. --- Such victims as were perfectly voluntary might be received, though they had some defect C. xxii. 23.

↑ 16

लैव्यव्यवस्था 7:17

Ver. 17. Fire. No part must be reserved so long, as to become offensive and putrid. C.

↑ 17

लैव्यव्यवस्था 7:18

Ver. 18. Yea rather. Heb. "it is an abomination to be thrown away," and the soul,

&c. Thus by neglecting to comply exactly with God's commands, we lose the fruits of our former piety. H. ---

The flesh of these victims might be eaten in any clean place, by all those who were not defiled.

C. x. 14. Joseph. T.

↑ 18

लैव्यव्यवस्था 7:19

Ver. 19. Shall eat of it. That is, of the flesh of the thanks-offering. Ch. --- People might eat the flesh of animals which had been touched by something unclean.

Deut. xii. 15. 22. But victims, defiled by any accident, were to be burnt. The others were to be eaten only by such as were clean. M.

↑ 19

लैव्यव्यवस्था 7:20

Ver. 20. People excommunicated, or even slain, either by God, or by the judge.

C.

↑ 20

लैव्यव्यवस्था 7:21

Ver. 21. Uncleanness of man, means a person defiled, or his excrements. A Lapide.

↑ 21

लैव्यव्यवस्था 7:23

Ver. 23. Eat, when they have been once immolated. See C. iii. 17.

↑ 23

लैव्यव्यवस्था 7:24

Ver. 24. Uses. Heb. "for any other use: but you shall not eat it." Origen (hom.

5,) seems to reject this fat entirely.

↑ 24

लैव्यव्यवस्था 7:26

Ver. 26. Beasts. Hence the Rabbins except the blood of fishes, as it is not specified. C.

↑ 26

लैव्यव्यवस्था 7:29

Ver. 29. Sacrifice...Libations, flour, wine, and oil. Lyran.

↑ 29

लैव्यव्यवस्था 7:30

Ver. 30. Hands, upon a silver dish. The priest shall direct his hands to form a triple cross. Cajet.

T.

↑ 30

लैव्यव्यवस्था 7:31

Ver. 31. The breast, and other parts mentioned, Deut. xviii. 3.

↑ 31

लैव्यव्यवस्था 7:34

Ver. 34. Separated from the breast for the Lord, and waved before Him, as the Heb. intimates.

↑ 34

लैव्यव्यवस्था 7:35

Ver. 35. Anointing. Le Clerc translates the food. On this Aaron shall be maintained. This shall be his salary or portion, in quality of God's anointed.

↑ 35

लैव्यव्यवस्था 7:36

Ver. 36. Israel. Heb. adds, "in the day of his anointing," or consecration. C.

↑ 36

लैव्यव्यवस्था 7:37

Ver. 37. Law. Six sorts of sacrifices are here specified, holocausts, flour-offerings, sin and trespass-offerings, those for the consecration of priests, and the peace-offerings.

↑ 37

लैव्यव्यवस्था 7:38

Ver. 38. In, or at the foot of Mount Sinai. H.

↑ 38

लाइसेंस: Notes by Fr. George Leo Haydock (1774–1849), from the Douay-Rheims Bible with Haydock's commentary (first ed. Thomas Haydock, Manchester/Dublin, 1811–1814; New York: Edward Dunigan & Brother, 1859); New Testament notes compiled with Fr. Benedict Rayment. Public domain. Digital text: "The Haydock Bible", Internet Archive (archive.org/details/TheHaydockBible), uploaded 2011 under the Public Domain Mark. · आभार और लाइसेंस

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