AI-generated illustration: a stony desert path leading toward mountains under clouds pierced by sunbeams.
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यिर्मयाह

11
बाइबल पाठ

कृत्रिम आवाज़ (AI)

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यहोवा का यह वचन यिर्मयाह के पास पहुँचा “इस वाचा के वचन सुनो, और यहूदा के पुरुषों और यरूशलेम के रहनेवालों से कहो। यह भी देखें: यिर्मयाह 11:6निर्गमन 19:52 राजाओं 23:2-3उनसे कहो, इस्राएल का परमेश्वर यहोवा यह कहता है, श्रापित है वह मनुष्य, जो इस वाचा के वचन न माने यह भी देखें: व्यवस्थाविवरण 27:26व्यवस्थाविवरण 28:15-68व्यवस्थाविवरण 29:19-20जिसे मैंने तुम्हारे पुरखाओं के साथ लोहे की भट्ठी अर्थात् मिस्र देश में से निकालने के समय, यह कहकर बाँधी थी, मेरी सुनो, और जितनी आज्ञाएँ मैं तुम्हें देता हूँ उन सभी का पालन करो। इससे तुम मेरी प्रजा ठहरोगे, और मैं तुम्हारा परमेश्वर ठहरूँगा; यह भी देखें: लैव्यव्यवस्था 26:12व्यवस्थाविवरण 4:20यिर्मयाह 7:22-23और जो शपथ मैंने तुम्हारे पितरों से खाई थी कि जिस देश में दूध और मधु की धाराएँ बहती हैं, उसे मैं तुम को दूँगा, उसे पूरी करूँगा; और देखो, वह पूरी हुई है।” यह सुनकर मैंने कहा, “हे यहोवा, आमीन।” यह भी देखें: व्यवस्थाविवरण 7:12-13स्तोत्र ग्रन्थ 105:9-11यिर्मयाह 28:6तब यहोवा ने मुझसे कहा, “ये सब वचन यहूदा के नगरों और यरूशलेम की सड़कों में प्रचार करके कह, इस वाचा के वचन सुनो और उसके अनुसार चलो। यह भी देखें: रोमियों 2:13याकूब 1:22योहन 13:17क्योंकि जिस समय से मैं तुम्हारे पुरखाओं को मिस्र देश से छुड़ा ले आया तब से आज के दिन तक उनको दृढ़ता से चिताता आया हूँ, मेरी बात सुनों। यह भी देखें: 2 इतिहास 36:15निर्गमन 23:21-221 शमूएल 8:9परन्तु उन्होंने न सुनी और न मेरी बातों पर कान लगाया, किन्तु अपने-अपने बुरे मन के हठ पर चलते रहे। इसलिए मैंने उनके विषय इस वाचा की सब बातों को पूर्ण किया है जिसके मानने की मैंने उन्हें आज्ञा दी थी और उन्होंने न मानी।” यह भी देखें: यिर्मयाह 7:24यिर्मयाह 7:26यिर्मयाह 35:15फिर यहोवा ने मुझसे कहा, “यहूदियों और यरूशलेम के निवासियों में विद्रोह पाया गया है। यह भी देखें: होशे 6:9मत्ती 26:15यिर्मयाह 5:31जैसे इनके पुरखा मेरे वचन सुनने से इन्कार करते थे, वैसे ही ये भी उनके अधर्मों का अनुसरण करके दूसरे देवताओं के पीछे चलते और उनकी उपासना करते हैं; इस्राएल और यहूदा के घरानों ने उस वाचा को जो मैंने उनके पूर्वजों से बाँधी थी, तोड़ दिया है। यह भी देखें: व्यवस्थाविवरण 31:16यहेजकेल 16:59न्यायियों 2:12-13इसलिए यहोवा यह कहता है, देख, मैं इन पर ऐसी विपत्ति डालने पर हूँ जिससे ये बच न सकेंगे; और चाहे ये मेरी दुहाई दें तो भी मैं इनकी न सुनूँगा। यह भी देखें: यशायाह 1:15यहेजकेल 8:18नीतिवचन 1:28उस समय यरूशलेम और यहूदा के नगरों के निवासी उन देवताओं की दुहाई देंगे जिनके लिये वे धूप जलाते हैं, परन्तु वे उनकी विपत्ति के समय उनको कभी न बचा सकेंगे। यह भी देखें: यिर्मयाह 2:28व्यवस्थाविवरण 32:372 इतिहास 28:22हे यहूदा, जितने तेरे नगर हैं उतने ही तेरे देवता भी हैं; और यरूशलेम के निवासियों ने हर एक सड़क में उस लज्जापूर्ण बाल की वेदियाँ बना-बनाकर उसके लिये धूप जलाया है। यह भी देखें: यिर्मयाह 2:282 राजाओं 23:13यिर्मयाह 7:9“इसलिए तू मेरी इस प्रजा के लिये प्रार्थना न करना, न कोई इन लोगों के लिये ऊँचे स्वर से विनती करे, क्योंकि जिस समय ये अपनी विपत्ति के मारे मेरी दुहाई देंगे, तब मैं उनकी न सुनूँगा। यह भी देखें: यिर्मयाह 7:16यिर्मयाह 11:11यिर्मयाह 14:11मेरी प्रिया को मेरे घर में क्या काम है? उसने तो बहुतों के साथ कुकर्म किया, और तेरी पवित्रता पूरी रीति से जाती रही है। जब तू बुराई करती है, तब प्रसन्न होती है। (भज. 50:16) यह भी देखें: नीतिवचन 2:14तीतुस 1:15यिर्मयाह 2:2यहोवा ने तुझको हरा, मनोहर, सुन्दर फलवाला जैतून तो कहा था, परन्तु उसने बड़े हुल्लड़ के शब्द होते ही उसमें आग लगाई, और उसकी डालियाँ तोड़ डाली गईं। यह भी देखें: रोमियों 11:17-24यशायाह 27:11स्तोत्र ग्रन्थ 52:8सेनाओं का यहोवा, जिसने तुझे लगाया, उसने तुझ पर विपत्ति डालने के लिये कहा है; इसका कारण इस्राएल और यहूदा के घरानों की यह बुराई है कि उन्होंने मुझे रिस दिलाने के लिये बाल के निमित्त धूप जलाया।” यह भी देखें: यशायाह 5:2यिर्मयाह 2:21यिर्मयाह 12:2यहोवा ने मुझे बताया और यह बात मुझे मालूम हो गई; क्योंकि यहोवा ही ने उनकी युक्तियाँ मुझ पर प्रगट की। यह भी देखें: 2 राजाओं 6:9-101 शमूएल 23:11-12यहेजकेल 8:6-18मैं तो वध होनेवाले भेड़ के बच्चे के समान अनजान था। मैं न जानता था कि वे लोग मेरी हानि की युक्तियाँ यह कहकर करते हैं, “आओ, हम फल समेत इस वृक्ष को उखाड़ दें, और जीवितों के बीच में से काट डालें, तब इसका नाम तक फिर स्मरण न रहे।” यह भी देखें: यिर्मयाह 20:10यशायाह 53:7-8स्तोत्र ग्रन्थ 83:4परन्तु, अब हे सेनाओं के यहोवा, हे धर्मी न्यायी, हे अन्तःकरण की बातों के ज्ञाता, तू उनका पलटा ले और मुझे दिखा, क्योंकि मैंने अपना मुकद्दमा तेरे हाथ में छोड़ दिया है। (भज. 7:9, प्रका. 2:23) यह भी देखें: यिर्मयाह 20:12यिर्मयाह 17:101 शमूएल 16:7इसलिए यहोवा ने मुझसे कहा, “अनातोत के लोग जो तेरे प्राण के खोजी हैं और यह कहते हैं कि तू यहोवा का नाम लेकर भविष्यद्वाणी न कर, नहीं तो हमारे हाथों से मरेगा। यह भी देखें: आमोस 2:12लूकस 13:33-34यशायाह 30:10इसलिए सेनाओं का यहोवा उनके विषय यह कहता है, मैं उनको दण्ड दूँगा; उनके जवान तलवार से, और उनके लड़के-लड़कियाँ भूखे मरेंगे; यह भी देखें: यिर्मयाह 18:212 इतिहास 36:171 थिस्सलुनीकियों 2:15-16और उनमें से कोई भी न बचेगा। मैं अनातोत के लोगों पर यह विपत्ति डालूँगा; उनके दण्ड का दिन आनेवाला है।” यह भी देखें: यिर्मयाह 23:12मीका 7:4होशे 9:7

यह भी देखें: क्रॉस-संदर्भ OpenBible.info (CC BY) से, आंशिक रूप से Treasury of Scripture Knowledge (सार्वजनिक डोमेन) पर आधारित।

टिप्पणियाँ · हेडॉक (1859, सार्वजनिक डोमेन)16 टिप्पणियाँ

टिप्पणियाँ अंग्रेज़ी में फ़ा. जॉर्ज लियो हेडॉक की 19वीं सदी की काथलिक टीका, जैसी प्रकाशित हुई।

ये टिप्पणियाँ अपने समय के विवादों को बनाए रखती हैं: कुछ यहूदी लोगों या अन्य ख्रीस्तीयों के बारे में कठोरता से बोलती हैं। आज कलीसिया कुछ और सिखाती है: ख्रीस्त की मृत्यु के लिए यहूदी लोगों को दोषी नहीं ठहराया जा सकता (नोस्त्रा एताते 4; धर्मशिक्षा 597–598), और अन्य समुदायों के ख्रीस्तीय प्रभु में हमारे भाई-बहन हैं (उनितातिस रेदिन्तेग्रात्सियो 3)। ख्रीस्तीय एकता

यिर्मयाह 11:1

Ver. 1. The, &c. He continues his discourse, (v. 15.) or rather addresses the people, when Josias renewed the covenant. 2 Par. xxxiv. 29. Lev. xxvi. Deut.

xxvii. C.

↑ 1

यिर्मयाह 11:4

Ver. 4. Fathers. God chooses his people for obedience, not for kindred, &c. S.

Jer. W.

↑ 4

यिर्मयाह 11:5

Ver. 5. Amen. Sept. "So be it." H. --- Thou hast fulfilled thy engagements.

↑ 5

यिर्मयाह 11:6

Ver. 6. Cities, or to those who come thence to the temple, that all may know.

↑ 6

यिर्मयाह 11:7

Ver. 7. For. This and the next verse have not been read by Sept.; (C.) but only

"and they did not comply." Grabe supplies the rest. H.

↑ 7

यिर्मयाह 11:8

Ver. 8. Brought; or "will bring," seems preferable. What does the history of God's people till the captivity exhibit, but scenes of disorder and of succeeding misery? C.

↑ 8

यिर्मयाह 11:9

Ver. 9. Conspiracy. They are leagued together to do evil, with all earnestness.

S. Jer.

↑ 9

यिर्मयाह 11:10

Ver. 10. To them, for a long time. Yet they must not despair, or have recourse to idols, (v. 12.) or witches. 1 K. xxviii.

↑ 10

यिर्मयाह 11:13

Ver. 13. Confusion. Thus he contemptuously denotes Baalim. C. iii. 24. C. ---

Various idols were objects of adoration, (H.) so that no city or street, perhaps not any house, was pure. C. vii.

18. and xliv. 17. Is. lxv. 11. Ezec. xvi. 25.

↑ 13

यिर्मयाह 11:15

Ver. 15. Beloved, dilectus. Heb. and Sept. have the fem. Chal. "people." They presumptuously thought that they would be freed from all their abominations, by partaking of the sacrifices. C. ---

But the offerings of such are not accepted. M. --- The flesh is holy, but is of no service to the obstinate sinner. W.

↑ 15

यिर्मयाह 11:16

Ver. 16. Burnt, by lightning. The olive was a most useful and beautiful tree.

↑ 16

यिर्मयाह 11:18

Ver. 18. Shewedst me. He insinuates that something more than what appears must be understood.

Theod. --- All Christians explain what follows of Jesus Christ, (S. Jer. W.) whom Jeremias prefigured in his sufferings. C. --- "Let us follow the rule which shews that all the prophets did most things for a type of our Lord and Saviour; and what was now done by Jeremias, foreshewed what would happen to our Lord."

S. Jer.

↑ 18

यिर्मयाह 11:19

Ver. 19. Meek: pet lamb. The Arabs still keep one in their houses. 2 K. xii. 3.

Bochart ii. 46. C.

--- Knew. I acted as if I had been ignorant. M. --- Yet Christ foretold his sufferings. Mat. xx. 18.

&c. W. --- Bread. Christ, the bread of life, was nailed to the disgraceful wood. S.

Jer. S. Greg.

Mor. iii. 12. --- They threaten to beat him, (De Dieu) or to mix a poisonous wood with his food.

C. M. --- Some Jews had corrupted this text in S. Justin's time. D.

↑ 19

यिर्मयाह 11:20

Ver. 20. Sabaoth. That is, of hosts or armies; a name frequently given to God, in the Scriptures.

--- Thy revenge. This was rather a prediction of what was to happen, with an approbation of the divine justice, than an imprecation. Ch. --- He speaks of the impenitent, (S. Jer.) and wishes they may be converted.

↑ 20

यिर्मयाह 11:21

Ver. 21. Life. What precedes, was spoken concerning the prophet, though it regarded Christ also in a proper but more elevated sense. C.

↑ 21

यिर्मयाह 11:23

Ver. 23. Remains. All these priests shall perish. Ps. xxxvi. 28. H. --- He speaks of the wicked, as a remnant was still left. C. iv. Is. x. W.

↑ 23

लाइसेंस: Notes by Fr. George Leo Haydock (1774–1849), from the Douay-Rheims Bible with Haydock's commentary (first ed. Thomas Haydock, Manchester/Dublin, 1811–1814; New York: Edward Dunigan & Brother, 1859); New Testament notes compiled with Fr. Benedict Rayment. Public domain. Digital text: "The Haydock Bible", Internet Archive (archive.org/details/TheHaydockBible), uploaded 2011 under the Public Domain Mark. · आभार और लाइसेंस

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