
यिर्मयाह · IRV-HI
यिर्मयाह
9
बाइबल पाठकृत्रिम आवाज़ (AI)
भला होता, कि मेरा सिर जल ही जल, और मेरी आँखें आँसुओं का सोता होतीं, कि मैं रात दिन अपने मारे गए लोगों के लिये रोता रहता। यह भी देखें: यिर्मयाह 13:17यशायाह 22:4यिर्मयाह 8:21-22भला होता कि मुझे जंगल में बटोहियों का कोई टिकाव मिलता कि मैं अपने लोगों को छोड़कर वहीं चला जाता! क्योंकि वे सब व्यभिचारी हैं, वे विश्वासघातियों का समाज हैं। यह भी देखें: यिर्मयाह 5:7-8यिर्मयाह 23:10होशे 4:2अपनी-अपनी जीभ को वे धनुष के समान झूठ बोलने के लिये तैयार करते हैं, और देश में बलवन्त तो हो गए, परन्तु सच्चाई के लिये नहीं; वे बुराई पर बुराई बढ़ाते जाते हैं, और वे मुझ को जानते ही नहीं, यहोवा की यही वाणी है। यह भी देखें: यिर्मयाह 9:8यिर्मयाह 4:22यशायाह 59:13-15अपने-अपने संगी से चौकस रहो, अपने भाई पर भी भरोसा न रखो; क्योंकि सब भाई निश्चय अड़ंगा मारेंगे, और हर एक पड़ोसी लुतराई करते फिरेंगे। यह भी देखें: मीका 7:5-6नीतिवचन 26:24-25स्तोत्र ग्रन्थ 12:2-3वे एक दूसरे को ठगेंगे और सच नहीं बोलेंगे; उन्होंने झूठ ही बोलना सीखा है; और कुटिलता ही में परिश्रम करते हैं। यह भी देखें: मीका 6:12यशायाह 59:13-15अय्यूब 15:5तेरा निवास छल के बीच है; छल ही के कारण वे मेरा ज्ञान नहीं चाहते, यहोवा की यही वाणी है। यह भी देखें: यिर्मयाह 13:10होशे 4:6नीतिवचन 1:24इसलिए सेनाओं का यहोवा यह कहता है, “देख, मैं उनको तपाकर परखूँगा, क्योंकि अपनी प्रजा के कारण मैं उनसे और क्या कर सकता हूँ? यह भी देखें: यशायाह 1:25यशायाह 48:10यिर्मयाह 6:27उनकी जीभ काल के तीर के समान बेधनेवाली है, उससे छल की बातें निकलती हैं; वे मुँह से तो एक दूसरे से मेल की बात बोलते हैं पर मन ही मन एक दूसरे की घात में लगे रहते हैं। यह भी देखें: स्तोत्र ग्रन्थ 28:3नीतिवचन 26:24-26स्तोत्र ग्रन्थ 120:3क्या मैं ऐसी बातों का दण्ड न दूँ? यहोवा की यह वाणी है, क्या मैं ऐसी जाति से अपना पलटा न लूँ? यह भी देखें: यिर्मयाह 5:29यिर्मयाह 5:9यशायाह 1:24“मैं पहाड़ों के लिये रो उठूँगा और शोक का गीत गाऊँगा, और जंगल की चराइयों के लिये विलाप का गीत गाऊँगा, क्योंकि वे ऐसे जल गए हैं कि कोई उनमें से होकर नहीं चलता, और उनमें पशुओं का शब्द भी नहीं सुनाई पड़ता; पशु-पक्षी सब भाग गए हैं। यह भी देखें: यिर्मयाह 12:4होशे 4:3यिर्मयाह 12:10मैं यरूशलेम को खण्डहर बनाकर गीदड़ों का स्थान बनाऊँगा; और यहूदा के नगरों को ऐसा उजाड़ दूँगा कि उनमें कोई न बसेगा।” (यशा. 25:2) यह भी देखें: यशायाह 25:2यशायाह 34:13यिर्मयाह 51:37जो बुद्धिमान पुरुष हो वह इसका भेद समझ ले, और जिसने यहोवा के मुख से इसका कारण सुना हो वह बता दे। देश का नाश क्यों हुआ? क्यों वह जंगल के समान ऐसा जल गया कि उसमें से होकर कोई नहीं चलता? यह भी देखें: होशे 14:9स्तोत्र ग्रन्थ 107:43व्यवस्थाविवरण 32:29और यहोवा ने कहा, “क्योंकि उन्होंने मेरी व्यवस्था को जो मैंने उनके आगे रखी थी छोड़ दिया; और न मेरी बात मानी और न उसके अनुसार चले हैं, यह भी देखें: 2 इतिहास 7:19यिर्मयाह 22:9एज्रा 9:10वरन् वे अपने हठ पर बाल नामक देवताओं के पीछे चले, जैसा उनके पुरखाओं ने उनको सिखाया। यह भी देखें: यिर्मयाह 3:17यिर्मयाह 7:241 पतरस 1:18इस कारण, सेनाओं का यहोवा, इस्राएल का परमेश्वर यह कहता है, सुन, मैं अपनी इस प्रजा को कड़वी वस्तु खिलाऊँगा और विष पिलाऊँगा। (भज. 69:21, यिर्म. 23:15) यह भी देखें: यिर्मयाह 8:14स्तोत्र ग्रन्थ 80:5विलापगीत 3:15मैं उन लोगों को ऐसी जातियों में तितर-बितर करूँगा जिन्हें न तो वे न उनके पुरखा जानते थे; और जब तक उनका अन्त न हो जाए तब तक मेरी ओर से तलवार उनके पीछे पड़ी रहेगी।” यह भी देखें: यहेजकेल 5:12लैव्यव्यवस्था 26:33यहेजकेल 5:2सेनाओं का यहोवा यह कहता है, “सोचो, और विलाप करनेवालियों को बुलाओ; बुद्धिमान स्त्रियों को बुलवा भेजो; यह भी देखें: आमोस 5:16-17सभोपदेशक 12:52 इतिहास 35:25वे फुर्ती करके हम लोगों के लिये शोक का गीत गाएँ कि हमारी आँखों से आँसू बह चलें और हमारी पलकें जल बहाए। यह भी देखें: यिर्मयाह 9:1यिर्मयाह 14:17यशायाह 22:4सिय्योन से शोक का यह गीत सुन पड़ता है, ‘हम कैसे नाश हो गए! हम क्यों लज्जा में पड़ गए हैं, क्योंकि हमको अपना देश छोड़ना पड़ा और हमारे घर गिरा दिए गए हैं।’” यह भी देखें: यिर्मयाह 4:13यहेजकेल 7:16-18व्यवस्थाविवरण 28:29इसलिए, हे स्त्रियों, यहोवा का यह वचन सुनो, और उसकी यह आज्ञा मानो; तुम अपनी-अपनी बेटियों को शोक का गीत, और अपनी-अपनी पड़ोसिनों को विलाप का गीत सिखाओ। यह भी देखें: लूकस 23:27-30यशायाह 32:9-13अय्यूब 22:22क्योंकि मृत्यु हमारी खिड़कियों से होकर हमारे महलों में घुस आई है, कि हमारी सड़कों में बच्चों को और चौकों में जवानों को मिटा दे। यह भी देखें: यिर्मयाह 6:11यहेजकेल 9:5-6यिर्मयाह 15:7तू कह, “यहोवा यह कहता है, ‘मनुष्यों की लोथें ऐसी पड़ी रहेंगी जैसा खाद खेत के ऊपर, और पूलियाँ काटनेवाले के पीछे पड़ी रहती हैं, और उनका कोई उठानेवाला न होगा।’” यह भी देखें: यिर्मयाह 8:2यिर्मयाह 25:33स्तोत्र ग्रन्थ 83:10यहोवा यह कहता है, “बुद्धिमान अपनी बुद्धि पर घमण्ड न करे, न वीर अपनी वीरता पर, न धनी अपने धन पर घमण्ड करे; यह भी देखें: 1 कुरिन्थियों 1:27-29यशायाह 5:21सभोपदेशक 9:11परन्तु जो घमण्ड करे वह इसी बात पर घमण्ड करे, कि वह मुझे जानता और समझता है, कि मैं ही वह यहोवा हूँ, जो पृथ्वी पर करुणा, न्याय और धार्मिकता के काम करता है; क्योंकि मैं इन्हीं बातों से प्रसन्न रहता हूँ। (1 कुरि. 1:31, 2 कुरि. 10:17) यह भी देखें: 2 कुरिन्थियों 10:17गलातियों 6:141 कुरिन्थियों 1:31“देखो, यहोवा की यह वाणी है कि ऐसे दिन आनेवाले हैं कि जिनका खतना हुआ हो, उनको खतनारहितों के समान दण्ड दूँगा, (रोम. 2:25) यह भी देखें: गलातियों 5:2-6रोमियों 2:8-9रोमियों 2:25-26अर्थात् मिस्रियों, यहूदियों, एदोमियों, अम्मोनियों, मोआबियों को, और उन रेगिस्तान के निवासियों के समान जो अपने गाल के बालों को मुँण्डा डालते हैं; क्योंकि ये सब जातियाँ तो खतनारहित हैं, और इस्राएल का सारा घराना भी मन में खतनारहित है।” (प्रेरि. 7:51) यह भी देखें: यिर्मयाह 4:4लैव्यव्यवस्था 26:41रोमियों 2:28-29
यह भी देखें: क्रॉस-संदर्भ OpenBible.info (CC BY) से, आंशिक रूप से Treasury of Scripture Knowledge (सार्वजनिक डोमेन) पर आधारित।
मनन
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टिप्पणियाँ · हेडॉक (1859, सार्वजनिक डोमेन)15 टिप्पणियाँ
टिप्पणियाँ अंग्रेज़ी में फ़ा. जॉर्ज लियो हेडॉक की 19वीं सदी की काथलिक टीका, जैसी प्रकाशित हुई।
ये टिप्पणियाँ अपने समय के विवादों को बनाए रखती हैं: कुछ यहूदी लोगों या अन्य ख्रीस्तीयों के बारे में कठोरता से बोलती हैं। आज कलीसिया कुछ और सिखाती है: ख्रीस्त की मृत्यु के लिए यहूदी लोगों को दोषी नहीं ठहराया जा सकता (नोस्त्रा एताते 4; धर्मशिक्षा 597–598), और अन्य समुदायों के ख्रीस्तीय प्रभु में हमारे भाई-बहन हैं (उनितातिस रेदिन्तेग्रात्सियो 3)। ख्रीस्तीय एकता
यिर्मयाह 9:1
Ver. 1. To. Heb. is more expressive. C. --- "Who will give my head waters, (H.) or change it into water, and my eyes into a fountain." C. --- Prot. "Oh that my head were waters." H. --- The miseries of my people are so great, (C.) a few tears would not suffice to bewail them. W.
↑ 1यिर्मयाह 9:2
Ver. 2. Men. Why cannot I retire (M.) from this scene of misery, or afford some consolation to the captives? Sept. "Who will give me the last station in the desert?" H.
↑ 2यिर्मयाह 9:3
Ver. 3. Lies. They are bent on deceit (C.) and murder, (H.) v. 8. Ps. lxiii. 4. and cxix. 2.
↑ 3यिर्मयाह 9:4
Ver. 4. Deceitfully. A man must guard against his relations and domestics. Mic.
vii. 5. Mat. viii.
35. C.
↑ 4यिर्मयाह 9:5
Ver. 5. Iniquity. It is become natural to them. S. Jer. --- They cannot lay the blame on the violence of passion. They sin on purpose. C. --- Sept. "they have not left off, (6.) in order to be converted. Usury upon usury; fraud upon fraud; they," &c. H.
↑ 5यिर्मयाह 9:7
Ver. 7. Try them in the crucible of war. C. vi. 27. C.
↑ 7यिर्मयाह 9:10
Ver. 10. Owner. Heb. mikne, "cattle," or (H.) "substance." S. Jer. --- Departed.
Beasts and birds will not continue long after men cease to cultivate the country. Theod. C. iv. 25. and xii. 4.
Soph. i. 3.
↑ 10यिर्मयाह 9:11
Ver. 11. Sand. The stones were burnt to dust. 2 Esd. iv. 2. C.
↑ 11यिर्मयाह 9:15
Ver. 15. Gall. Heb. rosh, "poison," &c. Deut. xxix. 18. H.
↑ 15यिर्मयाह 9:16
Ver. 16. Consumed. C. xliv. 27. No country shall afford them protection. C. ---
The richer sort were made captives, and most of the people destroyed, but not all. C. iv. 25. W.
↑ 16यिर्मयाह 9:17
Ver. 17. Wise, in composing or singing the Nænia, or mournful songs, recording the praises of the deceased. C. --- "This custom still subsists in Judea: women go about with dishevelled hair and naked breasts, with mournful tunes, exciting all to tears." S. Jer. --- Music was also used.
Mat. ix. 23. Thus feigned tears, at least, would supply the want of real ones.
↑ 17यिर्मयाह 9:21
Ver. 21. For. This was the song. C. --- Streets. Death spares none. The least suspecting fall. H.
--- It enters by the windows, if the doors be shut. Joel ii. 8.
↑ 21यिर्मयाह 9:22
Ver. 22. Speak. Our editions of the Sept. omit this word, though S. Jerom found it in his copies, (C.) and in Theodotion, expressed by "death;" while others rendered it, "speak," as the same letters dbr, may have both meanings, according as people may please to pronounce them. S. Jer.
--- Grabe supplies, "by death. (22.) These things, says the Lord." H.
↑ 22यिर्मयाह 9:24
Ver. 24. Me. Virtue will save, when riches, &c. will prove useless. M. ---
Phocilides, a pagan, said, (C.) "Boast not of wisdom, strength, or riches great.
One God is wise, and potent too, and rich." H.
↑ 24यिर्मयाह 9:26
Ver. 26. Egypt. the uncircumcised shall be punished as well as Juda, if they transgress. Only the Jewish nation properly observed the right of circumcision generally, or at first. Others imitated them, but with various ceremonies. C.
Diss. Ezec. xxxi. 18. Judith xiv. 6. --- Hyrcan obliged the Idumeans to receive circumcision. Jos. Ant. xiii. 17. --- Round. The Arabs, &c. Lev. xix. 27. C.
--- Heart. All then became guilty. Rom. ii. 25. M. --- Neither these nations nor Juda was circumcised in heart, and of course were hypocrites. W.
↑ 26लाइसेंस: Notes by Fr. George Leo Haydock (1774–1849), from the Douay-Rheims Bible with Haydock's commentary (first ed. Thomas Haydock, Manchester/Dublin, 1811–1814; New York: Edward Dunigan & Brother, 1859); New Testament notes compiled with Fr. Benedict Rayment. Public domain. Digital text: "The Haydock Bible", Internet Archive (archive.org/details/TheHaydockBible), uploaded 2011 under the Public Domain Mark. · आभार और लाइसेंस