AI-generated illustration: a stony desert path leading toward mountains under clouds pierced by sunbeams.
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यिर्मयाह

36
बाइबल पाठ

कृत्रिम आवाज़ (AI)

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फिर योशिय्याह के पुत्र यहूदा के राजा यहोयाकीम के राज्य के चौथे वर्ष में यहोवा की ओर से यह वचन यिर्मयाह के पास पहुँचा यह भी देखें: यिर्मयाह 25:1यिर्मयाह 45:12 राजाओं 24:1-2“एक पुस्तक लेकर जितने वचन मैंने तुझ से योशिय्याह के दिनों से लेकर अर्थात् जब मैं तुझ से बातें करने लगा उस समय से आज के दिन तक इस्राएल और यहूदा और सब जातियों के विषय में कहे हैं, सब को उसमें लिख। यह भी देखें: यिर्मयाह 30:2यिर्मयाह 25:3यिर्मयाह 36:6क्या जाने यहूदा का घराना उस सारी विपत्ति का समाचार सुनकर जो मैं उन पर डालने की कल्पना कर रहा हूँ अपनी बुरी चाल से फिरे और मैं उनके अधर्म और पाप को क्षमा करूँ।” यह भी देखें: यिर्मयाह 18:8प्रेरित-चरित 3:19व्यवस्थाविवरण 30:2अतः यिर्मयाह ने नेरिय्याह के पुत्र बारूक को बुलाया, और बारूक ने यहोवा के सब वचन जो उसने यिर्मयाह से कहे थे, उसके मुख से सुनकर पुस्तक में लिख दिए। यह भी देखें: यिर्मयाह 32:12यिर्मयाह 36:32यहेजकेल 2:9फिर यिर्मयाह ने बारूक को आज्ञा दी और कहा, “मैं तो बन्धा हुआ हूँ, मैं यहोवा के भवन में नहीं जा सकता। यह भी देखें: यिर्मयाह 32:2यिर्मयाह 33:12 कुरिन्थियों 11:23इसलिए तू उपवास के दिन यहोवा के भवन में जाकर उसके जो वचन तूने मुझसे सुनकर लिखे हैं, पुस्तक में से लोगों को पढ़कर सुनाना, और जितने यहूदी लोग अपने-अपने नगरों से आएँगे, उनको भी पढ़कर सुनाना। यह भी देखें: यिर्मयाह 36:8-9लैव्यव्यवस्था 16:29-31यिर्मयाह 26:2क्या जाने वे यहोवा से गिड़गिड़ाकर प्रार्थना करें और अपनी-अपनी बुरी चाल से फिरें; क्योंकि जो क्रोध और जलजलाहट यहोवा ने अपनी इस प्रजा पर भड़काने को कहा है, वह बड़ी है।” यह भी देखें: यिर्मयाह 36:3होशे 5:152 राजाओं 22:17यिर्मयाह भविष्यद्वक्ता की इस आज्ञा के अनुसार नेरिय्याह के पुत्र बारूक ने, यहोवा के भवन में उस पुस्तक में से उसके वचन पढ़कर सुनाए। यह भी देखें: यिर्मयाह 1:17मत्ती 16:24नहेम्याह 8:3योशिय्याह के पुत्र यहूदा के राजा यहोयाकीम के राज्य के पाँचवें वर्ष के नौवें महीने में यरूशलेम में जितने लोग थे, और यहूदा के नगरों से जितने लोग यरूशलेम में आए थे, उन्होंने यहोवा के सामने उपवास करने का प्रचार किया। यह भी देखें: 2 इतिहास 20:3योना 3:5यिर्मयाह 36:22तब बारूक ने यहोवा के भवन में सब लोगों को शापान के पुत्र गमर्याह जो प्रधान था, उसकी कोठरी में जो ऊपर के आँगन में यहोवा के भवन के नये फाटक के पास थी, यिर्मयाह के सब वचन पुस्तक में से पढ़ सुनाए। यह भी देखें: यिर्मयाह 36:11यिर्मयाह 52:25यिर्मयाह 26:10तब शापान के पुत्र गमर्याह के बेटे मीकायाह ने यहोवा के सारे वचन पुस्तक में से सुने। यह भी देखें: 2 इतिहास 34:202 राजाओं 25:22यिर्मयाह 36:10और वह राजभवन के प्रधान की कोठरी में उतर गया, और क्या देखा कि वहाँ एलीशामा प्रधान और शमायाह का पुत्र दलायाह और अकबोर का पुत्र एलनातान और शापान का पुत्र गमर्याह और हनन्याह का पुत्र सिदकिय्याह और सब हाकिम बैठे हुए हैं। यह भी देखें: यिर्मयाह 26:222 राजाओं 22:12यिर्मयाह 36:25मीकायाह ने जितने वचन उस समय सुने, जब बारूक ने पुस्तक में से लोगों को पढ़ सुनाए थे, उन सब का वर्णन किया। यह भी देखें: 2 राजाओं 22:102 इतिहास 34:242 इतिहास 34:16-18उन्हें सुनकर सब हाकिमों ने यहूदी को जो नतन्याह का पुत्र ओर शेलेम्याह का पोता और कूशी का परपोता था, बारूक के पास यह कहने को भेजा, “जिस पुस्तक में से तूने सब लोगों को पढ़ सुनाया है, उसे अपने हाथ में लेता आ।” अतः नेरिय्याह का पुत्र बारूक वह पुस्तक हाथ में लिए हुए उनके पास आया। यह भी देखें: यिर्मयाह 36:2यिर्मयाह 41:162 राजाओं 25:23तब उन्होंने उससे कहा, “अब बैठ जा और हमें यह पढ़कर सुना।” तब बारूक ने उनको पढ़कर सुना दिया। जब वे उन सब वचनों को सुन चुके, तब थरथराते हुए एक दूसरे को देखने लगे; और उन्होंने बारूक से कहा, “हम निश्चय राजा से इन सब वचनों का वर्णन करेंगे।” यह भी देखें: यिर्मयाह 13:18आमोस 7:10-11यिर्मयाह 36:24फिर उन्होंने बारूक से कहा, “हम से कह, क्या तूने ये सब वचन उसके मुख से सुनकर लिखे?” यह भी देखें: योहन 9:15योहन 9:10-11योहन 9:26-27बारूक ने उनसे कहा, “वह ये सब वचन अपने मुख से मुझे सुनाता गया ओर मैं इन्हें पुस्तक में स्याही से लिखता गया।” यह भी देखें: यिर्मयाह 36:4यिर्मयाह 36:2यिर्मयाह 43:2-3तब हाकिमों ने बारूक से कहा, “जा, तू अपने आपको और यिर्मयाह को छिपा, और कोई न जानने पाए कि तुम कहाँ हो।” यह भी देखें: 1 राजाओं 17:3यिर्मयाह 26:20-241 राजाओं 18:4तब वे पुस्तक को एलीशामा प्रधान की कोठरी में रखकर राजा के पास आँगन में आए; और राजा को वे सब वचन कह सुनाए। यह भी देखें: यिर्मयाह 36:12यिर्मयाह 36:21तब राजा ने यहूदी को पुस्तक ले आने के लिये भेजा, उसने उसे एलीशामा प्रधान की कोठरी में से लेकर राजा को और जो हाकिम राजा के आस-पास खड़े थे उनको भी पढ़ सुनाया। यह भी देखें: 2 राजाओं 22:102 इतिहास 34:18यहेजकेल 2:4-5राजा शीतकाल के भवन में बैठा हुआ था, क्योंकि नौवाँ महीना था और उसके सामने अँगीठी जल रही थी। यह भी देखें: आमोस 3:15यिर्मयाह 3:20यिर्मयाह 36:9जब यहूदी तीन चार पृष्ठ पढ़ चुका, तब उसने उसे चाकू से काटा और जो आग अँगीठी में थी उसमें फेंक दिया; इस प्रकार अँगीठी की आग में पूरी पुस्तक जलकर भस्म हो गई। यह भी देखें: 1 राजाओं 22:8नीतिवचन 19:211 राजाओं 22:27परन्तु न कोई डरा और न किसी ने अपने कपड़े फाड़े, अर्थात् न तो राजा ने और न उसके कर्मचारियों में से किसी ने ऐसा किया, जिन्होंने वे सब वचन सुने थे। यह भी देखें: यिर्मयाह 36:16स्तोत्र ग्रन्थ 36:11 राजाओं 21:27एलनातान, और दलायाह, और गमर्याह ने तो राजा से विनती भी की थी कि पुस्तक को न जलाए, परन्तु उसने उनकी एक न सुनी। यह भी देखें: उत्पत्ति 37:22यिर्मयाह 36:12प्रेरित-चरित 5:34-39राजा ने राजपुत्र यरहमेल को और अज्रीएल के पुत्र सरायाह को और अब्देल के पुत्र शेलेम्याह को आज्ञा दी कि बारूक लेखक और यिर्मयाह भविष्यद्वक्ता को पकड़ लें, परन्तु यहोवा ने उनको छिपा रखा। यह भी देखें: 1 राजाओं 19:14स्तोत्र ग्रन्थ 91:11 राजाओं 17:3जब राजा ने उन वचनों की पुस्तक को जो बारूक ने यिर्मयाह के मुख से सुन सुनकर लिखी थी, जला दिया, तब यहोवा का यह वचन यिर्मयाह के पास पहुँचा यह भी देखें: यिर्मयाह 36:4“फिर एक और पुस्तक लेकर उसमें यहूदा के राजा यहोयाकीम की जलाई हुई पहली पुस्तक के सब वचन लिख दे। यह भी देखें: जकर्याह 1:5-6अय्यूब 23:13यिर्मयाह 44:28और यहूदा के राजा यहोयाकीम के विषय में कह, ‘यहोवा यह कहता है: तूने उस पुस्तक को यह कहकर जला दिया है कि तूने उसमें यह क्यों लिखा है कि बाबेल का राजा निश्चय आकर इस देश को नष्ट करेगा, और उसमें न तो मनुष्य को छोड़ेगा और न पशु को। यह भी देखें: यिर्मयाह 26:9यशायाह 30:10यशायाह 29:21इसलिए यहोवा यहूदा के राजा यहोयाकीम के विषय में यह कहता है, कि उसका कोई दाऊद की गद्दी पर विराजमान न रहेगा; और उसकी लोथ ऐसी फेंक दी जाएगी कि दिन को धूप में और रात को पाले में पड़ी रहेगी। यह भी देखें: यिर्मयाह 22:302 राजाओं 24:12-15उत्पत्ति 31:40मैं उसको और उसके वंश और कर्मचारियों को उनके अधर्म का दण्ड दूँगा; और जितनी विपत्ति मैंने उन पर और यरूशलेम के निवासियों और यहूदा के सब लोगों पर डालने को कहा है, और जिसको उन्होंने सच नहीं माना, उन सब को मैं उन पर डालूँगा।’” यह भी देखें: नीतिवचन 29:1यिर्मयाह 35:17यिर्मयाह 19:15तब यिर्मयाह ने दूसरी पुस्तक लेकर नेरिय्याह के पुत्र बारूक लेखक को दी, और जो पुस्तक यहूदा के राजा यहोयाकीम ने आग में जला दी थी, उसमें के सब वचनों को बारूक ने यिर्मयाह के मुख से सुन सुनकर उसमें लिख दिए; और उन वचनों में उनके समान और भी बहुत सी बातें बढ़ा दी गई। यह भी देखें: यिर्मयाह 36:4यिर्मयाह 36:18निर्गमन 4:15-16

यह भी देखें: क्रॉस-संदर्भ OpenBible.info (CC BY) से, आंशिक रूप से Treasury of Scripture Knowledge (सार्वजनिक डोमेन) पर आधारित।

टिप्पणियाँ · हेडॉक (1859, सार्वजनिक डोमेन)18 टिप्पणियाँ

टिप्पणियाँ अंग्रेज़ी में फ़ा. जॉर्ज लियो हेडॉक की 19वीं सदी की काथलिक टीका, जैसी प्रकाशित हुई।

ये टिप्पणियाँ अपने समय के विवादों को बनाए रखती हैं: कुछ यहूदी लोगों या अन्य ख्रीस्तीयों के बारे में कठोरता से बोलती हैं। आज कलीसिया कुछ और सिखाती है: ख्रीस्त की मृत्यु के लिए यहूदी लोगों को दोषी नहीं ठहराया जा सकता (नोस्त्रा एताते 4; धर्मशिक्षा 597–598), और अन्य समुदायों के ख्रीस्तीय प्रभु में हमारे भाई-बहन हैं (उनितातिस रेदिन्तेग्रात्सियो 3)। ख्रीस्तीय एकता

यिर्मयाह 36:1

Ver. 1. Fourth, towards the conclusion, after the siege was raised. v. 6. 9.

↑ 1

यिर्मयाह 36:2

Ver. 2. Write. He had already prophesied 22 years. Now he was more frequently ordered to write. C. --- He executed the order by the hand of Baruch. v. 4.

↑ 2

यिर्मयाह 36:3

Ver. 3. If. This indicates free-will. H. --- God makes this last effort, that the hearing of so many separate prophecies together might make a deeper impression.

↑ 3

यिर्मयाह 36:4

Ver. 4. Book. This was afterwards burnt. What he wrote a second time has not come down to us, in the same order. Jeremias made us of his memory, which was directed by the Holy Spirit. C.

↑ 4

यिर्मयाह 36:5

Ver. 5. Shut up. Not that the prophet was now in prison; for the contrary appears from v. 19. but that he kept himself shut up, by reason of the persecutions he had lately met with. See C. xxvi.

Ch. --- If he had been confined, as Grotius asserts, the king would easily have found him. C. ---

He and Baruch retired to some secret place, as most priests (W.) did formerly in England, (H.) that they might better exercise their functions than they could do in the hands of the persecutors.

W.

↑ 5

यिर्मयाह 36:6

Ver. 6. Read. This may sometimes have as good an effect as preaching without a book. H. ---

Fasting day of expiation, (Usher, A. 3398) or rather on (H.) the day prescribed in the 9th month.

v. 9. Lyran. T.

↑ 6

यिर्मयाह 36:7

Ver. 7. They. Lit. "their supplication may fall prostrate before," &c. H. --- It is personified. So Homer represents (C.) "supplications," as daughters of Jupiter, lame, and with eyes averted, (Il.

ix.) to shew how we ought to pray. Jeremias finds means to instruct the people: the word of God is not bound. 2 Tim. ii. 9. C. --- As many refused to hear his discourses, God ordered him to write what might be a perpetual warning and reproach, or testimony against them. W.

↑ 7

यिर्मयाह 36:9

Ver. 9. Fast. Probably on account of the catastrophe the second year. Dan. i. 2.

Many such were afterwards appointed. Zac. vii. 3. and viii. 19. All came to Jerusalem on such occasions.

↑ 9

यिर्मयाह 36:10

Ver. 10. Gate, on the east, (2 Par. xx. 5.) leading to the court of the priests. C.

↑ 10

यिर्मयाह 36:18

Ver. 18. Reading. No study was requisite. H. --- Ink. It formerly resembled that used by printers, (C.) being composed of soot and gum. Vitruv. vii. 10.

↑ 18

यिर्मयाह 36:19

Ver. 19. Are. Thus they provide for the safety of the prophets, and perform their duty to the king.

↑ 19

यिर्मयाह 36:21

Ver. 21. Read it. This was the third time. It was in vain afterwards to destroy the book.

↑ 21

यिर्मयाह 36:22

Ver. 22. Winter-house. He was very magnificent, and had other apartments for summer. Though the climate was warm, fires would be useful in November. ---

Hearth. There was no chimney used, and the smoke went out by the door, or by holes at the top of the room, as we see in some old monasteries. C. ---

Charcoal was probably used. Bar. vi. 42.

↑ 22

यिर्मयाह 36:23

Ver. 23. Pages. Perhaps what was written on so many skins, (H.) or sheets of paper, pasted together, and rolled up; or there might be some marks to shew the different subjects, like the sections used in the synagogue, (C.) or our chapters; though we are assured that all was formerly written without any separation even of letters. Prot. have "leaves." H. --- Heb. "doors." C. The secretary cut and burnt the leaves by the king's order. v. 25. W.

↑ 23

यिर्मयाह 36:24

Ver. 24. Afraid. They saw all without any concern, not believing that God spoke to them. They did not imitate Josias. 2 Par. xxxiv. 19.

↑ 24

यिर्मयाह 36:26

Ver. 26. Hid them, and prevented any one from betraying them. C. --- He did not remove them to a place different from what they had chosen by his direction.

W.

↑ 26

यिर्मयाह 36:30

Ver. 30. None, &c. Because his son, Joachin or Jechonias, within three months after the death of his father, was carried away to Babylon, so that his reign is not worthy to be taken notice of. Ch.

Theodoret. W. --- He was subject to the Chaldees; his uncle took his place.

Joakim had the burial of an ass. C. xii. 18. C. --- None of the following princes enjoyed the glory or power of the ancient king. S. Tho. p. 3. qu. 31. a. 2. W.

↑ 30

यिर्मयाह 36:32

Ver. 32. Before. We cannot tell what. C. --- Prot. "many like words." H.

↑ 32

लाइसेंस: Notes by Fr. George Leo Haydock (1774–1849), from the Douay-Rheims Bible with Haydock's commentary (first ed. Thomas Haydock, Manchester/Dublin, 1811–1814; New York: Edward Dunigan & Brother, 1859); New Testament notes compiled with Fr. Benedict Rayment. Public domain. Digital text: "The Haydock Bible", Internet Archive (archive.org/details/TheHaydockBible), uploaded 2011 under the Public Domain Mark. · आभार और लाइसेंस

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